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त्योहारों के पहले प्याज और चीनी की कीमतों को लेकर सरकार हुई चौकन्नी

खासतौर पर प्याज की कीमतों को लेकर जिस तरह से बाजार में अचानक उछाल आया है, उससे सरकार की चिंता बढ़ गई है.

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प्रतीकात्मक तस्वीरें
प्रतीकात्मक तस्वीरें

त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही प्याज और चीनी की कीमतों में उछाल से सरकार चौकन्नी हो गई है. अगले महीने से दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे महत्वपूर्ण त्योहार आने वाले हैं. यही नहीं त्यौहारों के अलावा इसी साल आने वाले महीनों में कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं. लेकिन इस बीच खासतौर पर प्याज की कीमतों को लेकर जिस तरह से बाजार में अचानक उछाल आया है, उससे सरकार की चिंता बढ़ गई है.

जहां महीने भर पहले प्याज की औसत कीमत 15 से 20 रुपये प्रति किलो थी, वहीं अब महानगरों के खुदरा बाजार में प्याज 40 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है.

तमाम दूसरे शहरों में भी प्याज की कीमत 30 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है. सरकार का मानना है कि इस साल प्याज का उत्पादन अच्छा हुआ था और बाजार में प्याज के सप्लाई की कोई कमी नहीं है, इसीलिए कीमतों के बढ़ने के पीछे बड़ा कारण हो सकती है.

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इससे पहले कि हालात काबू से बाहर हों, सरकार ने इसके लिए कदम उठाना शुरु कर दिया है. अक्सर ऐसा होता है कि कीमत बढ़ने के मामले में राज्य सरकार और केंद्र सरकार एक दूसरे के माथे पर इसका ठीकरा फोड़ने लगते हैं.

इसलिए केंद्र सरकार के खाद्य और उपभोक्ता मंत्रालय ने फैसला लिया है कि राज्यों को इस बारे में छूट दी जाए कि वह प्याज की स्टॉक लिमिट अपने यहां की जरूरत और परिस्थितियों के हिसाब से खुद तय करें. मंत्रालय ने इस बारे में आदेश जारी भी कर दिया है. अब राज्य खुद ही तय कर सकेंगे कि प्याज के लिए स्टॉक की सीमा कितनी हो ताकि उसी हिसाब से जमाखोरी और कालाबाजारी से निपटा जा सके और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके.

सरकार ने चीनी की कीमतों को भी नियंत्रित करने के लिए कदम उठाया है. त्योहारों के समय मिठाई की मांग की वजह से चीनी की खपत काफी बढ़ जाती है. सरकार ने आदेश जारी कर दिया है कि सितंबर और अक्टूबर के महीने में चीनी मिल मालिकों को बाजार में ज्यादा चीनी सप्लाई करनी पड़ेगी. इसके लिए चीनी का स्टॉक लिमिट तय  कर दिया गया है. सितंबर में चीनी मिल कुल उत्पादन का 21 फीसदी स्टॉक अपने पास रख सकते हैं वही अक्टूबर के महीने में चीनी की स्टॉक लिमिट सिर्फ आठ प्रतिशत तय कर दिया गया है.

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 यानी अक्टूबर के महीने में चीनी मिलों को चीनी उत्पादन का लगभग सारा हिस्सा बाजार में सप्लाई करना पड़ेगा. सरकार को उम्मीद है कि सप्लाई बढ़ने से कीमती काबू में रहेंगी. इसके अलावा चीनी की कीमतों पर नियंत्रण करने के लिए सरकार चीनी आयात करने पर भी विचार कर रही है. हो सकता है कि 5 लाख टन चीनी आयात के बारे में जल्दी ही फैसला कर लिया जाए.

वैसे सरकार का मानना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. मंत्री रामविलास पासवान ने ट्वीट करके भी कहा कि घरेलू खपत के लिए देश में चीनी की कमी नहीं है. लेकिन सरकार की चिंता यह है कि पिछले कई महीनों से खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 45 रुपये प्रति किलो पर बनी हुई है. सरकार को डर है कि अगर अभी से कदम नहीं उठाए गए तो त्यौहारों के समय चीनी त्योहारों की मिठास बिगाड़ सकती है.

 

 

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