मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की पढ़ाई के बारे में जानकारी लीक करने वाले दिल्ली युनिवर्सिटी के पांच कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया. इस मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. मामला बढ़ता देख खुद स्मृति ईरानी ने सफाई पेश की है. निलंबन की आंच सरकार पर पड़ती देखकर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने खुद सफाई पेश की और डीयू के वीसी से कर्मचारियों को बहाल करने की मांग की.
Since DU is an autonomous institution I have put forth my personal appeal to the VC to reinstate the officials.
— Smriti Z Irani (@smritiirani)
आपको बता दें कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की शिक्षा से संबंधित जानकारी लीक करने के आरोप में दिल्ली विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया. दिल्ली विश्वविद्यालय में संयुक्त अध्यक्ष छात्र कल्याण एवं मीडिया समन्वयक मलय नीरव ने कहा, ‘स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग के पांच कर्मचारियों को गोपनीय फाइल देखने और उसकी जानकारी लीक करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है.’ उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी संभाग अधिकारी से नीचली श्रेणी के हैं.
वहीं, डीयू के पांच कर्मचारियों के निलंबन के बाद वर्चुअल स्पेस पर मोदी सरकार की आलोचना होने लगी.
5 officials of Delhi University suspended for leaking HRD Minster's educational qualification details!Does this Govt believe in transparency
— digvijaya singh (@digvijaya_28)
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर लिखा की मानव संसाधन विकास मंत्री की शैक्षणिक जानकारी लीक करने वालों को सस्पेंड कर दिया गया, तो क्या मोदी सरकार पारदर्शिता में यकीन रखती है.
ACHHE DIN AA GAYE HEIN. Would anyone stand up for the suspended officials of DU ?
— digvijaya singh (@digvijaya_28)
दिग्विजय के साथ ही कांग्रेस प्रवक्ता मीम अफजल भी इस मुद्दे पर बोले.
Thanks Smriti for appealing to VC DU for reinstating DU officials. Now let people of this Country know your actual Educational Qualification
— digvijaya singh (@digvijaya_28)
एक हिंदी दैनिक में लीक दस्तावेज प्रकाशित होने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने कार्रवाई की है. अखबार ने लिखा है कि ईरानी ने पिछले साल दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग में दाखिला लिया था, लेकिन परीक्षा में शामिल नहीं हुईं.
शैक्षणिक योग्यता को लेकर स्मृति ईरानी तब विवादों में आ गईं जब नवगठित केंद्रीय मंत्रिमंडल में उन्हें मानव संसाधन विभाग जैसा महत्वपूर्ण विभाग सौंप दिया गया. इस मामले को तूल देते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि स्मृति ईरानी ने अपने शपथपत्र में शक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी है.
कांग्रेस ने कहा है कि ईरानी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी के तौर पर शपथपत्र में खुद को कला स्नातक (बीए) बताया था. दावा किया गया था कि उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के पत्राचार पाठ्यक्रम के जरिए 1996 में उपाधि ली थी.
लेकिन इस साल के लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी के तौर पर अपने शपथपत्र में उन्होंने खुद को डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (पत्राचार) से 1994 में स्नातक वाणिज्य पार्ट 1 बताया है. बीजेपी इसके जवाब में कहा है कि उसने कभी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया की शिक्षा के बारे में सवाल उठाया है क्या?