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कांग्रेस Ex-MLA राजेंद्र भारती को HC से झटका, बैंक फ्रॉड केस में सजा बरकरार

दिल्ली हाई कोर्ट ने बैंक फ्रॉड मामले में पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की अपील खारिज कर दी है. 3 साल की सजा बरकरार रहने से उनकी विधायकी पहले ही जा चुकी है और उपचुनाव लड़ने पर भी संकट बना हुआ है.

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बैंक फ्रॉड मामले में पूर्व कांग्रेसी विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका. (Photo: ITG)
बैंक फ्रॉड मामले में पूर्व कांग्रेसी विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका. (Photo: ITG)

मध्य प्रदेश के दतिया से पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने बैंक फ्रॉड मामले में उनकी अपील खारिज कर दी और दोषसिद्धि को चुनौती देने की मांग पर राहत नहीं दी. इस मामले में उन्हें पहले ही 3 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसके बाद उनकी विधायकी भी चली गई थी.

दरअसल, राजेंद्र भारती को दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट ने एक पुराने कॉपरेटिव बैंक एफडी घोटाले और धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया था. अदालत ने 2 अप्रैल 2026 को उन्हें 3 साल की जेल की सजा सुनाई थी. इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. वहीं, निर्वाचन आयोग ने दतिया सीट पर 30 जुलाई 2026 को वोटिंग और 3 अगस्त 2026 को नतीजों का कार्यक्रम घोषित कर रखा है.

हाई कोर्ट में क्या हुआ?

दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले उनकी जेल की सजा को निलंबित कर दिया था. हालांकि दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी मांग पर राहत नहीं मिली. अब अदालत ने उनकी अपील भी खारिज कर दी है. राजेंद्र भारती ने अदालत से चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी राहत मांगी थी, लेकिन उन्हें इसमें भी सफलता नहीं मिली.

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कानूनी नियमों के मुताबिक, किसी भी मामले में 2 साल या उससे ज्यादा की सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता तुरंत खत्म हो जाती है. इसी आधार पर मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने कार्रवाई करते हुए राजेंद्र भारती की विधायकी रद्द कर दतिया सीट को खाली घोषित कर दिया था. नियमों के तहत जब तक ऊपरी अदालत दोषसिद्धि पर पूरी तरह स्टे नहीं लगाती, तब तक न तो विधायकी बहाल हो सकती है और न ही नया चुनाव लड़ा जा सकता है. इसी नियम के तहत दतिया सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था.

दतिया सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया चल रही है. चुनाव आयोग मतदान की तारीख भी घोषित कर चुका है. राजेंद्र भारती की कानूनी टीम लगातार दोषसिद्धि पर रोक लगाने की कोशिश कर रही थी, क्योंकि बिना राहत मिले वे चुनाव लड़ने के पात्र नहीं होंगे. हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद उनकी राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

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