देहरादून में त्रिपुरा के एक छात्र की हत्या के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है. मृतक छात्र अंजेल चकमा के पिता ने उत्तराखंड पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि घटना को चार महीने बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी अब तक फरार है और पुलिस की कार्रवाई संतोषजनक नहीं है. बता दें, अंजेल चकमा त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के रहने वाले थे, देहरादून में पढ़ाई कर रहे थे. 9 दिसंबर 2025 को देहरादून के सेलाकुई इलाके में उन पर छह लोगों के एक समूह ने हमला कर दिया था. बताया गया कि यह हमला तब हुआ जब अंजेल ने अपने और अपने छोटे भाई के खिलाफ की गई नस्लीय टिप्पणियों का विरोध किया था.
हमले में गंभीर रूप से घायल अंजेल को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 26 दिसंबर को उनकी मौत हो गई. इस घटना के बाद परिवार पूरी तरह से टूट गया है और अब न्याय की मांग कर रहा है. अंजेल के पिता तरुण प्रसाद चकमा सीमा सुरक्षाबल में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं, उन्होंने कहा कि मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी अब तक गिरफ्त में नहीं आया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही और प्रशासनिक विफलता के कारण आरोपी अभी भी फरार है.
तरुण प्रसाद चकमा ने यह भी कहा कि मुख्य आरोपी नेपाल के कंचनपुर का रहने वाला है और घटना के बाद सीमा पार कर नेपाल चला गया. उनके अनुसार, पुलिस की तरफ से ठीक तरीके से कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिसकी वजह से आरोपी के बारे में कोई ठोस जानकारी भी नहीं मिल पाई है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस आरोपी के साथ मिली हुई है. उनका कहना है कि इस मामले में प्राथमिकी भी तुरंत दर्ज नहीं की गई थी और एक सांसद के हस्तक्षेप के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई.
घटना के चार महीने बाद भी जांच की रफ्तार पर उठ रहे सवाल
अपने बेटे को याद करते हुए उन्होंने कहा कि अंजेल एक होनहार छात्र था. उसने एमबीए की पढ़ाई पूरी की थी और उसे 12 लाख रुपये सालाना पैकेज के साथ नौकरी का ऑफर मिला था. वह 27 दिसंबर को अपनी इंटर्नशिप शुरू करने वाला था, लेकिन उससे पहले ही उसकी जिंदगी खत्म हो गई.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि 30 साल तक बीएसएफ में 24 घंटे की ड्यूटी करके अपने बेटे की पढ़ाई के लिए मेहनत की थी, लेकिन अब उनका सपना अधूरा रह गया. इस घटना का असर परिवार के दूसरे बेटे पर भी पड़ा है. अंजेल का छोटा भाई, जो उत्तराखंड में ही ग्रेजुएशन के दूसरे साल में पढ़ रहा है, इस घटना के बाद पूरी तरह से सदमे में है. पिता के अनुसार, वह अब बिल्कुल चुप रहता है और इस सदमे से उबर नहीं पा रहा है.
परिवार को समाज कल्याण विभाग की तरफ से 8.25 लाख रुपये का मुआवजा मिला है, लेकिन परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए. पुलिस की तरफ से अब तक इस मामले में छह आरोपियों में से पांच को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल हैं. हालांकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है.
विकासनगर के सर्किल ऑफिसर विवेक सिंह कुटियाल ने बताया कि जनवरी में आरोपी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था. इसके साथ ही ब्लू कॉर्नर नोटिस की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है ताकि आरोपी को पकड़ने में मदद मिल सके. उन्होंने यह भी बताया कि रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया फिलहाल जारी है. पुलिस का कहना है कि आरोपी को पकड़ने के लिए जरूरी सभी कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं.
पुलिस ने पांच आरोपियों को पकड़ा, मुख्य आरोपी की तलाश जारी
इसके बावजूद परिवार का आरोप है कि कार्रवाई धीमी है और मुख्य आरोपी को पकड़ने में देरी हो रही है. चार महीने बीत जाने के बाद भी आरोपी का फरार रहना कई सवाल खड़े कर रहा है. अब देखना यह होगा कि पुलिस की आगे की कार्रवाई कितनी तेज होती है और क्या अंजेल चकमा के परिवार को जल्द न्याय मिल पाता है या नहीं.