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अलवर लिंचिंग पर राहुल का वार- ये मोदी का क्रूर भारत, नफरत ने ली मानवता की जगह

राहुल ने सवाल उठाया कि पुलिस वाले रास्ते में चाय का आनंद ले रहे थे. उन्होंने कहा कि ये मोदी का क्रूर न्यू इंडिया है, जहां मानवता की जगह नफरत ने ली है और लोगों को दबाया जा रहा है और उन्हें मरने के लिए छोड़ा जा रहा है.

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)

राजस्थान के अलवर में कथित गोरक्षकों के द्वारा की गई रकबर खान की हत्या का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. संसद से लेकर देश की सबसे बड़ी अदालत में इस मामले की गूंज है. अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले में पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोमवार को इस मामले के बारे में ट्वीट करते हुए राहुल ने लिखा कि जब मौका-ए-वारदात से अस्पताल सिर्फ 6 किमी. की दूरी पर ही था तो पुलिस को रकबर को वहां ले जाने पर 3 घंटे क्यों लगे.

राहुल ने सवाल उठाया कि पुलिस वाले रास्ते में चाय का आनंद ले रहे थे. उन्होंने कहा कि ये मोदी का क्रूर न्यू इंडिया है, जहां मानवता की जगह नफरत ने ली है और लोगों को दबाया जा रहा है और उन्हें मरने के लिए छोड़ा जा रहा है.

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एफआईआर और खबरों के मुताबिक पुलिस को करीब 12.40 बजे रकबर की सूचना मिली. लेकिन पुलिस ने करीब 4 बजे रकबर को अस्पताल पहुंचाया. सबसे बड़ी बात घटनास्थल से अस्पताल महज 6 किलोमीटर था. ऐसे में पुलिस को करीब 3-4 घंटे कैसे लग गए.

डॉक्टर का कहना है कि रकबर को अस्पताल लाने में देरी हुई और जब वो अस्पताल पहुंचा तब तक उसकी जान जा चुकी थी. आखिर रकबर को पुलिस ने अस्पताल में पहुंचाने में देरी कैसे की, 'आजतक' की टीम ने जब उसकी पड़ताल की तो एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आए.

लापरवाही नंबर-1

आपको जानकर हैरानी होगी कि पुलिस रकबर को अस्पताल ले जाने से पहले चाय की चुस्कियां लेने पहुंची. अगर रकबर की हालत अगर गंभीर थी तो पुलिस ने गाड़ी रोककर रास्ते में चाय क्यों पी.

लापरवाही नंबर-2

आरोप है कि पुलिस ने गाड़ी गंदी ना हो इसके लिए पहले कीचड़ में सने रकबर को नहलाया धुलाया.

लापरवाही नंबर-3

बताया जा रहा है कि रकबर को पहुंचाने से पहले करीब एक बजे गायों को गौशाला पहुंचा दिया गया, जबकि रकबर को पुलिस टहलाती रही.

आपको बता दें कि राजस्थान के अलवर जिले में मॉब लिंचिंग में रकबर खान की मौत के मामले में राज्य पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगे हैं. आरोप है कि पुलिस ने रकबर को अस्पताल पहुंचाने की जगह बरामद गायों को पहले गौशाला पहुंचाने को तरजीह दी. यही नहीं, पुलिस ने खुद भी रकबर की पिटाई की. इसकी वजह से रकबर को अस्पताल पहुंचाने में तीन घंटे की देरी हुई और उसकी मौत हो गई. 

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उक्त आरोपों पर अलवर के एसपी राजेंद्र सिंह ने आजतक से कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी. मीडिया में आई खबरों में यह कहा गया था कि रकबर को अस्पताल पहुंचाने में तीन घंटे लग गए और पुलिस ने रकबर को अस्पताल पहुंचाने की जगह पहले गायों को गौशाला तक पहुंचाने को प्राथमिकता दी.

गौरतलब है कि रामगढ़ थाना क्षेत्र के लालवंडी गांव में गो तस्करी के आरोप में कुछ कथित गोरक्षकों ने रकबर खान नामक एक शख्स को पीट-पीटकर मार डाला था.

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