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यूथ समिट में युवाओं ने दिया कामयाबी का मूलमंत्र

आज की युवा पीढ़ी की चाहत क्या है कैसे उसके ख्वाबों पर कुंडली मारकर बैठा है भ्रष्टाचार. लेकिन इन मुश्किलों के बीच भी कैसे कुछ युवा चेहरे बेहतरी की उम्मीद जगाते हैं. इन युवाओं ने अपने संघर्ष और ईमानदार मेहनत से एक मुकाम हासिल किया है. हिंदुस्तान के युवा दिलों की धड़कनों और उनके जेहन में बैठे भविष्य के सपनों को लेकर आया इंडिया टुडे माइंडरॉक्स का तीसरा यूथ समिट.

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आज की युवा पीढ़ी की चाहत क्या है कैसे उसके ख्वाबों पर कुंडली मारकर बैठा है भ्रष्टाचार. लेकिन इन मुश्किलों के बीच भी कैसे कुछ युवा चेहरे बेहतरी की उम्मीद जगाते हैं. इन युवाओं ने अपने संघर्ष और ईमानदार मेहनत से एक मुकाम हासिल किया है. हिंदुस्तान के युवा दिलों की धड़कनों और उनके जेहन में बैठे भविष्य के सपनों को लेकर आया इंडिया टुडे माइंडरॉक्स का तीसरा यूथ समिट.

बेटाजी से नेताजी बने के सामने उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को संभालने की चुनौती है तो उस चुनौती का सामना करने के लिए युवा उम्र की ताजगी और कुछ नया कर गुजरने का जोश. इंडियाटुडे माइंडरॉक्स के यूथ समिट में अखिलेश यादव ने मीडिया का शुक्रिया अदा किया कि लखनऊ की सड़कों पर संघर्ष करने वाले एक युवक को उसने खोज निकाला. फिर वो ऐसे चमका कि सबसे कम उम्र में उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाल ली.
 

अखिलेश आज युवाओं के रोल मॉडल हैं. लेकिन हेडलाइंस टुडे के मैनेजिंग एडिटर राहुल कंवल के इस सवाल का जवाब उन्होंने चुटकी में उड़ा दिया कि किस राज्य के सीएम को वो अपना आदर्श मानते हैं. दिल्ली की राजनीति ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को एक प्लेटफॉर्म पर खड़ा कर दिया है. लेकिन क्या राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनने के योग्य हैं, इस सवाल का जवाब भी अखिलेश ने हंसी में टाल दिया.

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38 साल की उम्र का जोश अखिलेश के होश को दबाता नहीं, बल्कि उसे और मांजता है. राजनीति के गिरते स्तर के बीच अपनी विरोधी मायावती पर हमला तो बोला, मगर नपे-तुले अंदाज में.

में पहले स्पीकर के तौर आए अखिलेश ने एक ऐसे युवा नेता की तस्वीर पेश की, जो युवा सोच की बुनियाद पर भविष्य के सपने बुन रहा है.

इस यूथ समिट में युवा आबादी को सीखा रहे भी सम्मिलित हुए. अरविंद ने अपने चिर-परिचित अंदाज में सरकारी भ्रष्टाचार पर हमला बोला. इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटर इन चीफ ने भी अपने वेलकम भाषण में इस सवाल को बहुत संजीदगी से उठाया. उन्होंने कहा, ‘सबसे बड़ी बात ये है कि आज देश करप्शन की बदबू से ग्रस्त है. आप जहां कहीं भी देखिए एक घोटाला या घपला नजर आ जाएगा. चंद भ्रष्ट राजनेता, चाटुकार नौकरशाह और धूर्त कारोबारी इस देश की अस्मत से खिलवाड़ कर रहे हैं. एक मायने में हमारे हालात रूस से ज्यादा बेहतर नहीं हैं जहां सरकार के साथ गठजोड़ करके लूटखसोट एक हुनर बन चुका है.’

इंडिया टुडे- माइंड रॉक्स का ये तीसरा यूथ समिट था. इसमें एक बात साफ झलकी कि कैसे युवा पीढ़ी भ्रष्टाचार और युवा नेतृत्व के सवाल पर सजग हो चुकी है.

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विकी डोनर से लाखों दिलों में जगह बनाने वाले के आते ही झूम उठी देश की युवा पीढ़ी. तालियों की गूंज के साथ आयुष्मान का स्वागत हुआ. उनके फैन्स की खुशी तो देखते ही बनती थी.

स्पर्म डोनेशन जैसे बोल्ड विषय पर बनी फिल्म ने आयुष्मान को बना दिया है युवा पीढ़ी का सबसे चहेता हीरो. इंडिया टुडे माइंडरॉक्स में आए आयुष्मान ने अपनी सफलता का राज बताया और कामयाबी का मूलमंत्र.

आयुष्मान ने कहा, ‘पहले मैं भीड़ का एक हिस्सा था. शायद उनसे थोड़ा सा अलग क्योंकि मैं एमटीवी से जुड़ा हुआ था. लेकिन क्या लाइमलाइट ने मुझे ये ऊंचा मुकाम दिलाया. मुझे ये यकीन दिलाया कि मुझमे कुछ खास है. मैं ऐसा नहीं सोचता. मुझे लगता है कि मुझे सिर्फ एक सही मौका मिला और वो भी तब जब मैं इसके लिए पूरी तरह से तैयार था. सफलता और तैयारी मौके दिलाती है. मौकों की कभी कमी नहीं होती. कमी होती है तो सिर्फ तैयारी की.

संगीतकार ने भी यूथ समिट में जमकर समां बांधा. शुरुआत ही उन्होंने दिल्ली की तारीफ से की चांदनी चौक की चांदनी है तू लाल किले की लाली... अनु मलिक यहीं नहीं रूके. एक के बाद एक हिट गाने सुनाकर उन्होंने माइंडरॉक्स को बना दिया रॉकिंग.

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अनु मलिक ने कहा, ‘जब मैं छोटा था तो मैं सिर्फ सुना करता था. मैं आज भी बहुत कुछ जानना चाहता हूं. आज मैं अनु मलिक हूं तो बस इसलिए क्योंकि मैने अपने पिता को देखकर सीखा. मैने शंकर जयकिशन, आर डी बर्मन, लता जी और आशा जी को सुनकर सीखा. मैं उस समय सिर्फ 8 या 9 साल का हुआ करता था और मैं हैरान रह जाता था कि वो महान कैसे बने. आज मैं इन्हें सुन रहा हूं और हैरान हो रहा था कि वो उन्होंने ये कैसे कर दिखाया. हर किसी की एक कहानी होती है. मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूं भारत दुनिया का सबसे अच्छा देश है और इसे आपको और महान बनाना है. सिर्फ सुनिए और देखिए आप कहां जाते हैं.’

पाकिस्तानी गायक और अभिनेता खास न्योते पर माइंडरॉक्स में शिरकत करने हिंदुस्तान आए. ‘तेरे बिन लादेन’ और ‘लंदन, पेरिस, न्यूयॉर्क’ जैसी फिल्मों में अभिनय कर बॉलीवुड में दस्तक दे चुके अली के चाहने वाले हिंदुस्तान में भी कम नहीं.

जफर को ये कामयाबी बड़ी मेहनत और कोशिशों से मिली है और इसीलिए युवा पीढ़ी को उनका कहना है कि सपने देखो. जरूर देखो. लेकिन उन्हें सच करने के लिए पूरी शिद्दत से कोशिश भी करो.

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अली जफर ने कहा, ‘किसी मशहूर पेंटर ने कहा था 97 प्रतिशत कोशिश और 3 प्रतिशत टैलेंट. कोशिश करना बहुत जरूरी है. दूसरी चीज ये है कि आपको सपने देखने चाहिए. आपको हमेशा ऐसे लोग मिलेंगे जो कहते हैं कि जो सपना आपने देखा है वो हासिल नहीं कर सकते. मेरा मानना है कि आप जो भी सपना देखते हैं उसे आप सच कर सकते हैं. बस आपको बड़े सपने देखने चाहिए. आपको थोड़ा कल्पनाशील होना चाहिए और आपको ये तय करना चाहिए कि आपकी प्राथमिकता क्या है.’

जब वी मेट और रॉकस्टार जैसी फिल्मों से बॉलीवुड में एक अलग मुकाम हासिल कर चुके फिल्म निर्देशक भी कुछ ऐसी ही सोच रखते हैं. उनका मानना है कि सही फैसले लेने के लिए जरूरी है. खुद से बातें करना और खुद से पूछना.

इम्तियाज अली कहते हैं, ‘खुद से बातें कीजिए. आपको बहुत कुछ दिलचस्प जानने को मिलेंगा. हिचकिचायें नहीं, खुद को शीशे में देख कर पूछिए. क्योंकि सिर्फ एक शख्स ये बता सकता है कि आपको क्या फैसला लेना और वो आप हैं.’

अलग अलग क्षेत्रों में अपने काम से धाक जमा चुके इन युवा चेहरों ने इंडिया टुडे माइंड रॉक्स में युवाओं को अपना भविष्य संवारने के मंत्र तो बताए ही. अपनी हाजिर जवाबी, अपने फलसफों से सुनने वालों का मन भी मोह लिया.

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लंदन ओलंपिक में इस बार हिंदुस्तान के पांच सितारे चमके और इन पांचो सितारों ने इंडिया टुडे माइंडरॉक्स में आकर अपनी कामयाबी और संघर्षों की दास्तां सुनायी. अपने दम से सफलता की बुलंदियों को छून वाले ओलंपिक के ये नए हीरो बन गये हैं यूथ आइकॉन.

आज की युवा पीढ़ी के दिलो-दिमाग पर छाए ये वो हीरो हैं, जिन्होंने लंदन ओलंपिक्स में हिंदुस्तान का नाम रोशन किया. फ्रीस्टाइल कुश्ती में सिल्वर मेडल जीतने वाले 28 साल के वर्ल्ड चैंपियन बनने से गदगद हैं.

वहीं सुशील कुमार के दोस्त ने कांस्य पदक जीतकर अपना वो सपना पूरा किया, जो उन्हें अच्छी नींद देती है. बॉक्सिंग में ब्रांज जीतने वाली ने तो रैंप पर चहलकदमी करके अपने फैंस को ये भी बता दिया कि उनका हर कदम कैसे मील का पत्थर बन जाता है. लेकिन सबसे ज्यादा तो वो अपने बच्चों की रोलमॉडल हैं.

शूटिंग में सिल्वर जीतने वाले के लिए ओलंपिक का ये पहला मौका था, लेकिन आखिरी मौके की तरह वो लड़े और जीते. वही गगन नारंग ने शूटिंग में ही ब्रांज जीता. करोड़ों दिलों पर छा चुके शूटिंग के ये हीरो कुंवारे हैं, लेकिन अभी शादी से ज्यादा अपने खेल पर फोकस करना चाहते हैं.

इंडिया टुडे माइंड रॉक्स में आए खेल के ये रोल मॉडल ये बता गये कि कैसे लगन से पहाड़ जैसे लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है.

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क्रिकेट के आसमान पर चमकता वो नया सितारा है जिसके आगे मानो दूसरे सितारों की चमक फीकी पड़ गई है. महज 17 साल की उम्र में अंडर 19 वर्ल्ड कप जिताने वाले उन्मुक्त ने खुद बताया कि ये सफर उनके लिए कितना मुश्किलों भरा रहा है.

युवाओं के लिए एक नई उम्मीद और नया चेहरा बनकर उभरे हैं उनमुक्त चंद. अंडर-19 वर्ल्ड कप में उन्मुक्त की शानदार सेंचुरी की बदौलत टीम इंडिया ने ताज जीत लिया. किशोर उम्र के बच्चों के इस नए रोल मॉडल को पिच पर पसीना बहाना जितना अच्छा लगता है, उतना ही पढ़ना-लिखना.

उन्मुक्त ने बताया, ‘मैं क्लास आठवीं तक टॉपर था, क्रिकेट खेलते रहने के बावजूद मैंने 10वीं और 12वीं में पढ़ाई में अच्छा किया. सेंट स्टीफंस कॉलेज से जुड़े विवाद को बेवजह तूल दिया गया. जैसा मीडिया में बताया जा रहा है मामला वैसा नहीं है. मुझे कम हाजिरी होने के कारण परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया. सेकेंड सेमेस्टर में रणजी और अंडर 19 खेलने की वजह से मैं कॉलेज नहीं जा सका, लेकिन मुझे कॉलेज जाना पसंद है.’

उन्मुक्त चंद इस मान्यता को गलत साबित करना चाहते हैं कि पढ़ाई और खेल दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते. लेकिन 23 साल में वर्ल्ड कप दिलाने वाले चाहते हैं कि काश, वो उनमुक्त के कोच होते.

कपिल ने कहा, ‘उन्मुक्त भाग्यशाली नहीं है क्योंकि मैं उसका कोच नहीं हूं. अगर मैं कोच होता और मुझे लगता कि वो मेरी नजर में अच्छा है तो मैं उससे अगले तीन साल तक काफी मेहनत करवाता. इस कदर मेहनत करवाता कि वो 30 सालों तक राजा होता.’

कभी युवाओं को सबसे ज्यादा रिझाने वाले टीम इंडिया के पूर्व कप्तान अजहरुद्दीन भी उस दिन का इंतजार कर रहे हैं, जब बाएं हाथ के बल्लेबाज उन्मुक्त चंद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उभरकर सामने आएं. उन्मुक्त में भविष्य की काफी संभावनाएं हैं और उन उम्मीदों को पूरा करने के लिए उनकी मां चाहती हैं कि वो अपने खेल से कभी बेवफाई ना करें.

इंडिया टुडे माइंडरॉक्स के तीसरे यूथ समिट में आज के युवा क्रिकेटर उनमुक्त चंद हैं तो वहां आए ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी, जिन्हें आज भी कपिलदेव युवाओं के सबसे बड़े आइकन लगते हैं.

कपिल कहते हैं, ‘मैं समझता हूं कि युवाओं को ईमानदार होना चाहिए. अगर आप कुछ हासिल कर लेते हैं जैसा कि अजहर ने कहा आपको नम्र और ईमानदार होना पड़ेगा. मेरा मानना है कि युवाओं को हमेशा अपनी बात रखनी चाहिए. मैं खुद भी इसमें विश्वास करता हूं.’

जाहिर है कि कपिलदेव से उनमुक्त चंद तक युवाओं की पीढ़ियां बदलती गयीं, लेकिन आदर्श नहीं बदले और ना ही उनकी उम्मीदें.

इंडिया टुडे माइंडरॉक्स में मिस वर्ल्ड प्रियंका चोपड़ा आईं और बस छा गईं. युवाओं में उनका क्रेज किस कदर है ये इस समिट में साफ दिखा. हर कोई जानना चाहता था कि बरेली जैसे छोटे से शहर से मिस वर्ल्ड और फिर बॉलीवुड तक उनका सफर कैसा रहा. प्रियंका ने अपनी कहानी सुनाई. .लेकिन साथ ही ये वो भी बताना नहीं भूलीं कि कई बार दिल की सुननी ही चाहिए क्योंकि तभी आपको मिलता है संतोष.

यूथ समिट में शिरकत करने के लिए बॉलीवुड की मसककली यानी भी पूरी तैयारी के साथ पहुंची थीं. हर जवां दिल की धड़कन सोनम को कैसा जीवनसाथी चाहिए. ये सवाल जब उठा तो उन्होंने खुल कर इसका जवाब दिया.

वक्त बदला है तो क्या सही जीवनसाथी के पैमाने भी बदले हैं. क्या सोचती है आज की जेनरेशन प्यार और शादी के बारे में. इसका जवाब दिया गैंग्स ऑफ वसईपुर से चर्चा में आईं हुमा कुरैशी ने.

माइंडरॉक्स में अभिनेत्रियों ने अपने दिल का हाल बयां किया और बेबाकी से अपनी राय रखी तो अभिनेता अजय देवगन ने युवा पीढ़ी को दी एक सलाह.
 

युवा पीढ़ी को मिले सही राह. कामयाबी के आसमान में चमक रहे सितारों से मिले हर नौजवान को प्रेरणा. यही मकसद है इंडिया टुडे माइंडरॉक्स का जिसके लिए कोशिशें जारी हैं.

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