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पंजाब में 'महिला सम्मान' की सियासत, CM मान और MLA खैरा को लेकर आमने-सामने AAP और कांग्रेस

कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर आम आदमी पार्टी ने इसे महिलाओं का अपमान बताया, जबकि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयान को लेकर पलटवार किया.

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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (L) और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा. (Photo: PTI)
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (L) और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा. (Photo: PTI)

पंजाब विधानसभा के बजट सत्र के दौरान महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता योजना की घोषणा को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है. सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है और दोनों दल एक-दूसरे पर महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगा रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर 8 मार्च को पंजाब सरकार ने महिलाओं के लिए हर महीने ₹1,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की.

वहीं अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के लिए ₹1,500 मासिक सहायता देने का प्रस्ताव रखा गया है. यह योजना सरकार के चुनावी वादों में शामिल थी और 2026–27 के बजट में इसके लिए लगभग ₹9,300 करोड़ का प्रावधान किया गया है. हालांकि विपक्षी दलों ने योजना के समय और व्यवहारिकता पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस और भाजपा नेताओं का कहना है कि यह वादा लगभग चार साल से लंबित था. उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य सरकार बढ़ते कर्ज के बीच इस योजना के लिए धन की व्यवस्था कैसे करेगी. रिपोर्टों के मुताबिक पंजाब पर कुल कर्ज करीब ₹4.17 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है.

विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान मंगलवार को यह मुद्दा और गरमा गया, जब कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें एक यूट्यूब इंटरव्यू का जिक्र था. इस पोस्ट में कथित तौर पर लिखा गया था कि '₹1000 की घोषणा पर नाचती महिलाएं पंजाब की विरासत और इतिहास में क्या योगदान देंगी?' हालांकि बाद में खैरा ने इस बयान को लेकर सफाई भी दी. इस पोस्ट को लेकर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे महिलाओं का अपमान बताया.

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पंजाब राज्य महिला आयोग ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए खैरा से जवाब मांगा. वहीं आम आदमी पार्टी के विधायकों ने विधानसभा में उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पेश किया. मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब यह नहीं है कि महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए जाएं. वहीं कांग्रेस ने पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत माल के हालिया महिला दिवस कार्यक्रम के भाषण का मुद्दा उठाया. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में मान अपने कॉलेज के दिनों का एक किस्सा सुनाते नजर आते हैं. 

उन्होंने बताया कि कॉलेज में वह और उनके दोस्त एक लड़की को मजाक में 'भाभी' कहकर संबोधित करते थे और उसकी ड्रेस के रंग पर चर्चा करते थे, जबकि उसे इसकी जानकारी नहीं होती थी. मुख्यमंत्री ने बताया कि बाद में उस छात्रा ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वह उन्हें कॉलेज से निकलवा सकती है, क्योंकि प्रिंसिपल उसके पिता के करीबी थे. इसके बाद उन्होंने उस लड़की का पीछा करना बंद कर दिया. मान ने यह भी कहा कि कई साल बाद कॉलेज के एक कार्यक्रम में वही महिला उन्हें फूलों के साथ स्वागत करती नजर आई.

भगवंत मान ने मजाक में कहा कि अगर उस समय उस लड़की ने उन्हें डांटा न होता तो शायद आज वह उनके साथ होती, जिस पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने हंसी जाहिर की. विवाद बढ़ने पर खैरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि AAP नेताओं को पहले मुख्यमंत्री से माफी मांगने को कहना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि मान ने अपने भाषण में 'पटोला', 'भृंड' और 'पाकिस्तान दा झंडा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था और सवाल उठाया कि केवल उन्हें ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है. दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच मंगलवार को पंजाब विधानसभा का माहौल काफी गरमा गया.

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