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आजतक के स्टिंग का बड़ा असर... आयुष्मान योजना में इलाज से मना करने वाले अस्पतालों को नोटिस

आजतक के स्टिंग ऑपरेशन 'ऑपरेशन आयुष्मान' ने गरीबों के मुफ्त इलाज में रोड़ा अटकाने वाले निजी अस्पतालों की पोल खोल दी है. इस खुलासे के बाद पंजाब की स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) ने कड़ा एक्शन लेते हुए मोहाली और डेराबस्सी के दो बड़े अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है.

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आजतक के कैमरे में कैद हुआ प्राइवेट अस्पतालों का खेल (Representative Image/File)
आजतक के कैमरे में कैद हुआ प्राइवेट अस्पतालों का खेल (Representative Image/File)

आजतक चैनल के विशेष खोजी कार्यक्रम '10 तक' में दिखाए गए स्टिंग ऑपरेशन के बाद पंजाब सरकार एक्शन मोड में आ गई है. पंजाब स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) ने 7 जनवरी 2026 को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के तहत लिस्टेड दो प्राइवेट अस्पतालों को कारण बताओ नोटिस (संख्या SHA/2026/322-23) जारी किया है. इनमें मोहाली के ज़ीरकपुर स्थित 'जेपी सिंगला ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स' (विशेष रूप से जेपी डायग्नोस्टिक्स) और डेराबस्सी का 'इंडस इंटरनेशनल अस्पताल' शामिल हैं. 

स्टिंग में इन अस्पतालों द्वारा योजना के लाभार्थियों को इलाज देने से मना करने या कैश मांगने का सच सामने आया था. नोटिस में कहा गया है कि लिस्टेड अस्पतालों के लिए पात्र लाभार्थियों को वक्त पर कैशलेस इलाज देना अनिवार्य है और बिना किसी ठोस कारण के इलाज से इनकार करना योजना की शर्तों का गंभीर उल्लंघन है. 

एजेंसी ने इन अस्पतालों के मेडिकल सुपरिटेंडेंट से तुरंत लिखित स्पष्टीकरण मांगा है. संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और पैनल से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.

आजतक के कैमरे में कैद हुआ अस्पतालों का खेल

आजतक की टीम ने जब '10 तक' सीरीज के लिए स्टिंग किया, तो पाया कि कई प्राइवेट अस्पताल आयुष्मान कार्ड होल्डर्स को बहाने बनाकर वापस भेज रहे थे. कहीं सरकारी भुगतान पेंडिंग होने का हवाला दिया गया, तो कहीं सीधे तौर पर कैश की मांग की गई. ज़ीरकपुर और डेराबस्सी के इन दो अस्पतालों में इलाज से इनकार करने का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया और तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए.

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'नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं...'

स्टेट हेल्थ एजेंसी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि इलाज से इनकार करना न सिर्फ दिशानिर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि यह लाभार्थियों के लिए अनुचित कठिनाई पैदा करता है और योजना के मकसदों को कमजोर करता है. आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध सभी निजी अस्पतालों के लिए यह जरूरी है कि वे कार्ड धारकों को बिना किसी भुगतान के इलाज उपलब्ध कराएं. ऐसा न करने पर 'एंटी-फ्रॉड यूनिट' द्वारा निगरानी और ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई भी की जा सकती है.

क्या है आयुष्मान भारत योजना का नियम?

AB-PMJAY के तहत गरीब परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है. अस्पतालों को यह सुविधा 'कैशलेस' और 'पेपरलेस' देनी होती है. आजतक की पड़ताल ने दिखाया कि कैसे कुछ अस्पताल इस 'गेम-चेंजर' योजना को धरातल पर पलीता लगा रहे थे. नोटिस मिलने के बाद अब इन अस्पतालों को यह साबित करना होगा कि उन्होंने मरीजों को क्यों लौटाया, वरना उन्हें भारी दंड भुगतना पड़ सकता है.

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