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लोकसभा में आज परिसीमन पर 18 घंटे की मैराथन बहस, क्या हैं तीनों बिल जिससे बदल जाएगी विधायिका की तस्वीर

लोकसभा में अगर ये तीन बिल पास हो गए तो भारत के संसदीय लोकतंत्र का चेहरा पूरी तरह से बदल जाएगा. फिर लोकसभा में 850 सांसद होंगे, सत्ता में आने के लिए वर्तमान नियमों के आधार पर 426 सीटों की जरूरत होगी. यही नहीं 2029 का चुनाव अगर इस आधार पर हुआ तो लोकसभा में 270 से ज्यादा महिला सांसद होंगी.

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2023 में महिला आरक्षण बिल पास होने के मौके पर महिला सांसदों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (Photo: File/PTI)
2023 में महिला आरक्षण बिल पास होने के मौके पर महिला सांसदों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (Photo: File/PTI)

भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) एक ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज होने जा रहा है. इस दिन संसद का विशेष सत्र शुरू हो रहा है, जिसमें तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे. इनका उद्देश्य 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को पूरी तरह ऑपरेशनलाइज करना है. यह कदम न केवल देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि लोकसभा की विधायी संरचना को भी बदल देगा. 

सरकार ने गुरुवार को लोकसभा में पेश करने के लिए तीन बिलों की सूची जारी की है. इनका मकसद 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा की सदस्य संख्या को बढ़ाकर 850 तक करना है. 

ये तीन बिल हैं. 

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
परिसीमन विधेयक, 2026 
केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026

इन तीनों बिलों को लोकसभा में पेश किया जाएगा और इन्हें पारित करने से पहले इन बिलों पर लंबी चर्चा होगी. 

जहां केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पहले दो बिल पेश करेंगे, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीसरा बिल पेश करेंगे. 

लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति ने इस चर्चा के लिए 18 घंटे का समय तय किया है, जो शुक्रवार तक भी चल सकती है. 

लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा में इन बिलों पर चर्चा होगी. 

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पहला बिल संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रावधान करता है. इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए हैं जबकि 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए है. 

यह भी पढ़ें: यूपी में 80 से 140 MP, तमिलनाडु 39 से 50 सांसद... लोकसभा की प्रस्तावित सीट बढ़ोतरी पर क्यों उबल रहा है दक्षिण

दूसरा बिल परिसीमन विधेयक, 2026 है जो 2011 की जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की नई सीमाएं तय करेगा. 

तीसरा विधेयक दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों (जहां विधानसभा है) में महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ करेगा. 

ये तीनों विधेयक मिलकर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे. महिला आरक्षण कानून तो 2023 में पारित हो चुका था, लेकिन इनको अमल में लाना जनगणना और परिसीमन पर टिकी हुई थी. अब विशेष सत्र में इन बिलों के पारित होने के बाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी एक ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लेगी. अगर 2029 चुनाव में इसी आधार पर चुनाव होता है तो लोकसभा में  270 से ज्यादा महिला सांसद होंगी. 

विधानसभाओं में भी बढ़ेंगी सीटें 

इन बिलों के पास होने के बाद सिर्फ लोकसभा की ही सीटें नहीं बढ़ेंगी, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी. 

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लोकसभा सदस्यों के बीच बांटे गए ड्राफ़्ट बिल में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें "किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों को बारी-बारी से आवंटित की जाएंगी."

अन्य प्रावधानों के अलावा यह बिल संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन करना चाहता है. 

इसमें कहा गया है, "लोकसभा  में 815 से ज़्यादा सदस्य नहीं होंगे, जिन्हें राज्यों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुनाव द्वारा चुना जाएगा; और 35 से ज़्यादा सदस्य केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नहीं होंगे, जिन्हें संसद द्वारा कानून बनाकर तय किए गए तरीके से चुना जाएगा."

अनुच्छेद 81 का खंड 3 जो लोकसभा की संरचना के बारे में बात करता है, यह भी निर्धारित करता है कि प्रत्येक राज्य को आवंटित सीटों का समायोजन राज्य की "जनसंख्या" के आधार पर होगा और जनगणना के आंकड़ों के अनुसार इसे समायोजित किया जा सकता है. 

संविधान में 2001 और 2003 के संशोधनों के बाद इन सीटों का पुनर्समायोजन 1971 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर 2026 की जनगणना के बाद तक के लिए रोक दिया गया था. 

हालांकि प्रस्तावित विधेयक जनसंख्या जनगणना के आंकड़ों को "अनलॉक" कर देगा, जिससे संसद यह तय कर सकेगी कि सीटों के पुनर्समायोजन का आधार कौन से जनगणना के आंकड़े होंगे. 

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प्रस्तावित विधेयक में अनुच्छेद 82 के इस खंड 3 में एक संशोधन शामिल है जिसमें कहा गया है, 'इस अनुच्छेद में, "जनसंख्या" अभिव्यक्ति का अर्थ उस जनगणना के अनुसार निर्धारित जनसंख्या से है जिसे संसद कानून द्वारा निर्धारित कर सकती है, और जिसके प्रासंगिक आंकड़े प्रकाशित हो चुके हैं.'

इस बीच NDA के सूत्रों ने बताया कि परिसीमन आयोग ही सीटों की अंतिम संख्या तय करेगा और इसलिए बिल में सीटों की कोई सटीक संख्या या कोई तय प्रतिशत (जैसे 50 प्रतिशत) नहीं बताया गया है. 

850 का आंकड़ा लोकसभा की कुल सीटों की सिर्फ़ ऊपरी सीमा को दिखाता है. 

सत्ता पर कब्ज़ा करने की एक कोशिश: राहुल

बुधवार को इस बिल पर दिन पर राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं. राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बिना किसी शर्त के महिला आरक्षण का समर्थन करती है. संसद ने 2023 में सर्वसम्मति से इस बिल को पास किया था और अब यह हमारे संविधान का हिस्सा बन चुका है. 

सरकार अब जो प्रस्ताव ला रही है, उसका महिला आरक्षण से कोई लेना-देना नहीं है. यह संशोधन असल में 'परिसीमन' (delimitation) और 'चुनावी क्षेत्रों की मनमानी फेरबदल' के ज़रिए सत्ता पर कब्ज़ा करने की एक कोशिश है. 

हम जातिगत जनगणना के आंकड़ों को नज़रअंदाज़ करके OBC, दलित और आदिवासी समुदायों के 'हिस्से की चोरी' नहीं होने देंगे. साथ ही हम दक्षिणी, उत्तर-पूर्वी, उत्तर-पश्चिमी और छोटे राज्यों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होने देंगे. 

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बुधवार को इन बिलों पर चर्चा करने के लिए इंडिया गठबंधन की मीटिंग हुई. इसमें कांग्रेस, डीएमके, जेएमएम, समाजवादी पार्टी, सीपीआईएम, आरजेडी समेत दूसरे दलों के नेता शामिल हुए. 

इस मसले पर चर्चा करने के लिए समाजवादी पार्टी ने भी गुरुवार को बैठक बुलाई है. गुरुवार को दिल्ली में SP प्रमुख अखिलेश यादव की अध्यक्षता में SP सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है. 9:30 बजे संसद भवन स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में यह बैठक होगी.

दक्षिण के राज्यों की आपत्ति

विपक्षी पार्टियों खासकर दक्षिणी राज्यों की पार्टियों ने संघीय ढांचे पर पड़ने वाले असर और दक्षिणी राज्यों को कथित तौर पर उनके प्रतिनिधित्व और अधिकारों से वंचित करने के बारे में गंभीर चिंताएं जताई हैं. DMK प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन ने चेतावनी दी है कि अगर राज्यों को संसद में सीटों की संख्या में नुकसान होता है, तो वे "सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन" करेंगे. 

DMK के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील P. विल्सन ने इंडिया टुडे को बताया कि सीट समायोजन से जुड़े प्रावधान "राज्यों को दी गई संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन" हैं. 

विल्सन ने कहा, "सरकार ने या उद्देश्यों के विवरण में कहीं भी यह नहीं बताया है कि वे 815 और 35 के आंकड़ों तक कैसे पहुंचे. 1971 की जनगणना के आधार पर समायोजन को रोककर जो सुरक्षा उपाय किए गए थे, उनका मकसद संवैधानिक गारंटी देना और जनसंख्या नियंत्रण सुनिश्चित करना था. अब वे उन राज्यों को सज़ा दे रहे हैं जिन्होंने जनसंख्या पर नियंत्रण किया है."

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इंडिया टुडे से बात करते हुए वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने भी राय दी कि "ऐसा लगता है कि वे महिला आरक्षण बिल का इस्तेमाल एक बहाने के तौर पर कर रहे हैं, ताकि दक्षिणी राज्य सीटों की संख्या में बढ़ोतरी को स्वीकार कर लें."

सीटों की गिनती कैसे होगी?

प्रस्तावित परिसीमन बिल की धारा 8 परिसीमन आयोग को यह अधिकार देती है कि वह "नवीनतम जनगणना के आंकड़ों" और संवैधानिक तथा कानूनी प्रावधानों के आधार पर सीटों का बंटवारा तय करे.

इस खंड में आयोग से यह भी कहा गया है कि वह गणितीय रूप से यह हिसाब लगाए कि प्रत्येक राज्य की विधानसभा में कितनी सीटें होंगी, जो उस राज्य की लोकसभा सीटों की संख्या पर निर्भर करेगा. 

हालांकि अनुच्छेद 170 का वह प्रावधान, जो विधायकों की संख्या को 60 से 500 सीटों के बीच सीमित करता है नहीं बदला गया है, लेकिन संविधान संशोधन बिल में यह प्रस्ताव है कि अब विधानसभा में सीटों की संख्या की गणना "उस जनगणना के आधार पर की जाएगी, जिसे संसद कानून बनाकर तय करेगी और जिसके संबंधित आंकड़े प्रकाशित हो चुके होंगे."

इसका मतलब है कि राज्य विधानसभा में सीटों का बंटवारा भी उन जनगणना आंकड़ों पर निर्भर करेगा जिन्हें परिसीमन आयोग विचार के लिए चुनेगा. 
 

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