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यूपी में 80 से 140 MP, तमिलनाडु 39 से 50 सांसद... लोकसभा की प्रस्तावित सीट बढ़ोतरी पर क्यों उबल रहा है दक्षिण

गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही हंगामेदार रहने की आशंका है. कांग्रेस समेत दक्षिण के राज्यों ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित तीन बिलों का तगड़ा विरोध करने का फैसला किया है. इन बिलों से परिसीमन का रास्ता साफ होगा और राज्यों की लोकसभा सीटें बदल जाएंगी. दक्षिण के राज्यों को इस प्रस्तावित बदलाव में अपना घाटा नजर आ रहा है.

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महिला आरक्षण के लिए लोकसभा सीटें बढ़ाने की तैयारी. (Photo: ITG)
महिला आरक्षण के लिए लोकसभा सीटें बढ़ाने की तैयारी. (Photo: ITG)

परिसीमन पर भारत में एक बार फिर से नॉर्थ बनाम साउथ का विवाद गहराता जा रहा है. तमिलनाडु के सीएम  ने परिसीमन का आक्रामक विरोध किया है. और हर घर में काला झंडा लहराने का आह्वान किया है. दक्षिण के राज्यों को भय सता रहा है कि परिसीमन की वजह से लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा. 

ये सारा विवाद महिला आरक्षण बिल पर चर्चाओं को लेकर शुरू हो गया है. पीएम मोदी ने कहा है कि वे 2029 के चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी प्रतिनिधित्व का आरक्षण लाभ देना चाहते हैं. इस कोशिश के लिए सरकार लोकसभा की सीटें बढ़ाने जा रही हैं. सरकार चाहती है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में लोकसभा की सीटें 850 की जाए. इनमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेश के लिए होंगी. 

 केंद्र सरकार ने 14 अप्रैल 2026 को तीन महत्वपूर्ण विधेयकों के ड्राफ्ट सांसदों के बीच साझा किए हैं. ये विधेयक हैं- 

1-संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
2-परिसीमन विधेयक, 2026
3-केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026

ये तीनों बिल 16-18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में पेश किए जाएंगे.

ये तीनों विधेयक 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित हैं. इसी अधिनियम में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था. अगर ये तीनों विधेयक पारित हो जाते हैं, तो 2029 के अगले आम चुनाव में इस आरक्षण का रास्ता साफ हो सकता है.

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इनसे लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़कर 850 हो जाएंगी. यह परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा, ताकि 33% महिला आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू हो सके. 

ये 307 सीटें (850-543) कैसे बढ़ेंगी, किस राज्य की कितनी सीटें बढ़ेंगी. सीटों का बढ़ाने का आधार क्या होगा. एक राज्य की सीट ज्यादा क्यों बढ़ेगी तो दूसरे राज्य की सीट कम बढ़ेगी. सारा विवाद इसी को लेकर है. 

दक्षिणी राज्य तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश आदि इस प्रस्ताव का सबसे तेज़ विरोध कर रहे हैं.

कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक पोस्ट में कहा है कि इस परिसीमन की वजह से दक्षिण के 5 राज्यों जिन्होंने अपनी जनसंख्या वृद्धि की दर को स्थिर किया है का लोकसभा में प्रतिनिधित्व घट जाएगा. इन राज्यों का प्रतिनिधित्व अभी 24.3 प्रतिशत है, परिसीमन के बाद ये घटकर 20.7 फीसदी हो जाएगा. 

चिदंबरम ने कहा, "लोकसभा में तमिलनाडु का मौजूदा प्रतिनिधित्व 39 है. सरकार कहती है कि यह बढ़कर 58 हो जाएगा. मैंने कहा कि यह कोरा भ्रम है. जब परिसीमन किया जाएगा, तो यह 58 घटकर 46 रह जाएगा. वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश की मौजूदा संख्या 80 है. यह पहले बढ़कर 120 होगी और परिसीमन के बाद यह और बढ़कर लगभग 140 तक पहुंच जाएगी."

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एक वीडियो संदेश में तमिलनाडु के सीएम स्टालिन ने बड़े पैमाने पर आंदोलनों की चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को पूरी तरह से ठप कर देंगे अगर यदि राज्य को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम उठाया गया, या यदि परिसीमन में उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति को असंतुलित रूप से बढ़ाया गया, तो "पूरी ताकत के साथ विरोध प्रदर्शन" किए जाएंगे. 

एक और गैर बीजेपी शासित राज्य तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने PM मोदी को खुला पत्र लिखा. इसमें उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया. उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक योगदान पर विचार किए बिना आनुपातिक आधार पर लोकसभा सीटों में वृद्धि करने से देश के संघीय संतुलन में विकृति आ जाएगी.

रेड्डी ने कहा कि आनुपातिक मॉडल दक्षिणी राज्यों के लोगों और सरकारों को स्वीकार्य नहीं होगा और उनकी चिंताओं का समाधान किए बिना आगे बढ़ने का कोई भी प्रयास अनिवार्य रूप से व्यापक विरोध और प्रतिरोध को जन्म देगा, क्योंकि यह निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के मूल सिद्धांत को प्रभावित करता है. 

इसलिए उन्होंने कहा कि एक ऐसा सामूहिक समाधान खोजा जाना चाहिए जो न्यायसंगत और टिकाऊ दोनों हो. 

सपोर्ट में चंद्रबाबू नायडू

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केंद्र में सत्ता में साझीदार टीडीपी नेता और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य के राजनीतिक दलों और सभी सांसदों से संसद में महिला आरक्षण अधिनियम में किए जा रहे संशोधनों को समर्थन देने का आग्रह किया. नायडू ने संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण प्रदान करने के प्रधानमंत्री के संकल्प को मज़बूत करने का आह्वान किया.

1973 में आखिरी बार बढ़ी लोकसभा सीट

भारत में अब तक तीन बार परिसीमन हुआ है. और लोकसभा सीटें बढ़ी हैं. 1973 में 1971 की जनगणना पर आधारित तीसरा परिसीमन हुआ और लोकसभा सीटें 522 से बढ़कर 543 हो गईं. यही आखिरी बार था जब लोकसभा की कुल सीटों में वृद्धि हुई. 

इसके बाद 1976 में 42वें संविधान संशोधन द्वारा लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों पर फ्रीज लगा दिया गया, जो 1971 जनगणना पर आधारित थी.  इसका मुख्य उद्देश्य था कि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों खासकर दक्षिणी राज्य को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान न हो. 

सीटों को बढ़ाने का आधार जनसंख्या है

भारत में परिसीमन के आधार पर लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने का मुख्य क्राइटेरिया जनसंख्या है.  इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या लगभग समान हो ताकि "एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य" का सिद्धांत लागू रहे. परिसीमन के दौरान प्रत्येक राज्य को उसकी कुल जनसंख्या के अनुपात में सीटें मिलती हैं.  कुल सीटें बढ़ाने का फैसला संसद करता है, लेकिन इसका वितरण जनसंख्या अनुपात पर आधारित होता है. 

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जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिण के राज्य कर रहे हैं विरोध

दक्षिणी के राज्यों का तर्क है कि सरकार जनसंख्या नियंत्रण को लागू करने का दंड दक्षिण के राज्यों को दे रही है. वे इसे संघीय ढांचे पर हमला मानते हैं. 

1970 के दशक में केंद्र ने परिवार नियोजन को बढ़ावा दिया था. दक्षिणी राज्यों ने इसे सफलतापूर्वक लागू किया. उनकी फर्टिलिटी रेट रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे है. इस वजह से दक्षिण के राज्यों की आबादी स्थिर है. 2011 जनगणना में भी उनकी आबादी वृद्धि कम रही. अगर 2011 या बाद की जनगणना के आधार पर सीटें बांटी गईं, तो उत्तर के राज्यों UP, बिहार, राजस्थान, MP को ज्यादा सीटें मिलेंगी, क्योंकि उनकी आबादी ज्यादा बढ़ी. दक्षिण के राज्यों का तर्क है कि उन्हें अच्छा काम करने की 'सजा' दी जा रही है.

संसद में राजनीतिक शक्ति का नुकसान

वर्तमान में दक्षिणी राज्य अपनी आबादी के अनुपात से ज्यादा प्रतिनिधित्व रखते हैं. नया परिसीमन उनके सापेक्षिक अनुपात का घटा देगा. 

उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश जहां अभी लोकसभा की 80 सीटें हैं वहां की सीटें काफी बढ़ सकती है. कुछ अनुमानों में इसे 120 तक हो जाएगी. चिदंबरम ने कहा कि परिसीमन के बाद ये बढ़कर 140 तक हो जाएगा. 

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तमिलनाडु में अभी लोकसभा की 39 सीटें हैं. परिसीमन के बाद तमिलनाडु की सीटें 50-51 तक हो सकती हैं. लेकिन तमिलनाडु की कुल भागीदारी कम हो जाएगी. चुनाव विश्लेषक योगेन्द्र यादव ने एक्स पर दावा किया है कि परिसीमन की वजह से तमिलनाडु को 11 सीटों और केरल को  8 सीटों का नुकसान होगा. 

दक्षिण के राज्यों का कहना है कि कुल मिलाकर दक्षिण के 5 राज्यों की कुल सीटें उत्तर के मुकाबले कमजोर पड़ जाएंगी जिससे सरकार की नीतियां फंडिंग, भाषा, विकास योजनाएं उत्तर-केंद्रित हो सकती है. 

सरकार की सफाई

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि कुछ लोग गलत परिसीमन के आंकड़े पेश करके दक्षिण भारतीय राज्यों को महिला आरक्षण के मुद्दे पर गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के मामले में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए. सभी राजनीतिक दल 'नारी शक्ति' के लिए एकजुट हैं.

किरेन रिजिजू ने मंगलवार को कहा कि एक संविधान संशोधन विधेयक के तहत जब लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 सीटें कर दी जाएगी तो दक्षिणी राज्यों को इसका लाभ मिलेगा क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी. रिजिजू ने जोर देकर कहा कि संविधान संशोधन विधेयक पूरी तरह से संतुलित और सोच-समझकर तैयार किया गया है और यह हर समुदाय, क्षेत्र और राज्य की आकांक्षाओं का ध्यान रखेगा. इसलिए इसकी आलोचना की कोई गुंजाइश नहीं है. 

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अगर कोई नीतियों और कार्यक्रमों के आधार पर इसकी आलोचना करता है, तो राजनीतिक क्षेत्र में यह बात पूरी तरह से समझ में आती है, अलग-अलग राजनीतिक दलों के विचार अलग-अलग होते हैं,  लेकिन कोई भी दल विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है.

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