scorecardresearch
 

राहुल गांधी की सांसदी पर लटकी तलवार! बीजेपी सांसद ने 'सब्सटैंटिव मोशन' को बनाया हथियार

निशिकांत दुबे ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने संसद में राहुल गांधी के कथित अनैतिक आचरण की जांच कराने के लिए यह प्रस्ताव पेश करने का नोटिस दिया है. यह मामला अब संसद में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है.

Advertisement
X
राहुल गांधी पिछले कुछ समय से लगातार राजनीतिक विवादों के केंद्र में रहे हैं. (File Photo- ITG)
राहुल गांधी पिछले कुछ समय से लगातार राजनीतिक विवादों के केंद्र में रहे हैं. (File Photo- ITG)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा में ‘सब्सटैंटिव मोशन’ लाने का नोटिस दिया है. दुबे ने मांग की है कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता रद्द की जाए और उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाए.

निशिकांत दुबे ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने संसद में राहुल गांधी के कथित अनैतिक आचरण की जांच कराने के लिए यह प्रस्ताव पेश करने का नोटिस दिया है. यह मामला अब संसद में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है.

क्या है ‘सब्सटैंटिव मोशन’ और क्यों है अहम?

संसदीय प्रक्रिया के अनुसार ‘सब्सटैंटिव मोशन’ एक स्वतंत्र और औपचारिक प्रस्ताव होता है, जिसे सदन की मंजूरी के लिए पेश किया जाता है. इसका उद्देश्य किसी खास मुद्दे पर सदन की राय या फैसला प्राप्त करना होता है. आमतौर पर ऐसे प्रस्ताव के जरिए किसी सदस्य के आचरण या आरोपों की जांच के लिए समिति गठित करने की मांग की जाती है. इस मामले में निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के कथित व्यवहार की जांच के लिए समिति बनाने की मांग की है.

Advertisement

प्रस्ताव स्वीकार होने पर क्या होगी आगे की प्रक्रिया?

संसदीय नियमों के अनुसार, किसी भी ‘सब्सटैंटिव मोशन’ को सदन में स्वीकार करना या अस्वीकार करना पीठासीन अधिकारी यानी लोकसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है. सबसे पहले इस प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा के महासचिव को दिया जाता है, जो संसदीय प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा होता है.

यदि लोकसभा अध्यक्ष प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं और सदन में इस पर चर्चा होती है, तो इसे मतदान के लिए रखा जा सकता है. यदि सदन इस प्रस्ताव को पारित कर देता है, तो लोकसभा अध्यक्ष आरोपों की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन कर सकते हैं.

यह समिति मामले की विस्तृत जांच करेगी और तय समयसीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश करेगी. रिपोर्ट पेश होने के बाद सदन फिर से इस पर चर्चा करेगा और समिति की सिफारिशों को स्वीकार या अस्वीकार करने का फैसला करेगा. यदि समिति गंभीर आरोपों को सही पाती है, तो सदस्यता समाप्त करने जैसी कार्रवाई भी संभव हो सकती है.

राहुल गांधी पर पहले भी उठ चुके हैं विवाद

राहुल गांधी पिछले कुछ समय से लगातार राजनीतिक विवादों के केंद्र में रहे हैं. संसद में दिए गए उनके भाषणों, राजनीतिक आरोपों और बयानबाजी को लेकर कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली है. बीजेपी लगातार राहुल गांधी पर संसद और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ बयान देने का आरोप लगाती रही है, जबकि कांग्रेस इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती है.

Advertisement

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रस्ताव का इस्तेमाल आमतौर पर गंभीर संसदीय विवादों या आचरण से जुड़े मामलों में ही किया जाता है, इसलिए इस मामले को राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement