दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी चुनौतियों से घिरी हुई है. पार्टी के सबसे बड़े नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जेल में हैं. कथित शराब घोटाले को लेकर आक्रामक विपक्ष भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली पार्टी को करप्शन के मुद्दे पर ही घेर रहा है. कई नेता पार्टी छोड़कर जा चुके तो वहीं सत्येंद्र जैन जेल से बाहर होते हुए भी सक्रिय राजनीति से दूर हैं. स्वाति मालीवाल संसद के भीतर और बाहर आम आदमी पार्टी को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं.
ऐसे समय में जब विधानसभा चुनाव कुछ ही महीने दूर हैं, चुनौतियों से जूझ रही आम आदमी पार्टी के लिए पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की जमानत बड़ी राहत लेकर आई है. जमानत पर जेल से बाहर आए सिसोदिया एक्शन में हैं. सिसोदिया ने अपनी रिहाई के कुछ ही घंटे बाद आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं के साथ बैठक की और दिल्ली चुनाव की रणनीति और तैयारियों पर मंथन किया. बैठक के बाद पार्टी की ओर से ये ऐलान किया गया कि मनीष सिसोदिया 14 अगस्त से पदयात्रा पर निकलेंगे.
सिसोदिया की सक्रियता AAP की नई रणनीति?
दिल्ली सरकार में आबकारी मंत्री रहे मनीष सिसोदिया का शराब घोटाला केस में जेल से बाहर आते ही सक्रिय हो जाना अपने सियासी भविष्य पर उठते सवालों पर विराम लगाने की कोशिश है या आम आदमी पार्टी की रणनीति? ये सवाल भी उठ रहे हैं. बीजेपी शराब घोटाले में किंगपिन बताते हुए सीधे अरविंद केजरीवाल को टार्गेट कर रही है और चुनाव में भी 10 साल की सत्ताधारी पार्टी को हराने के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी में है.
अब AAP ने मनीष सिसोदिया को रणनीति के तहत जनता के बीच उतार दिया है जिनके पास ही संबंधित मंत्रालय था. AAP की रणनीति साफ है- जनता के बीच खुद को पीड़ित बताते हुए जाना और शराब घोटाले के नैरेटिव को तोड़ने की कोशिश करना. पोस्टर पर जेल की सलाखें और उनके पीछे केजरीवाल की फोटो भी सिम्पैथी हासिल करने की इसी रणनीति का ही हिस्सा है.
अब सवाल ये भी उठता है कि सिसोदिया की सक्रियता आम आदमी पार्टी की नई रणनीति कैसे है. आम आदमी पार्टी की रणनीति अब तक यही रही है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार के कामकाज को लेकर जनता के बीच पहुंचा जाए. विकास के एजेंडे पर चुनाव लड़ने की बात करने वाली आम आदमी पार्टी पिछले चुनावों में बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियां लेकर जनता के बीच जाने की बात करती रही है. लेकिन इस बार के चुनाव से पहले दिल्ली में हालात अलग हैं. ऐसे में इसके पीछे आखिर क्या रणनीति हो सकती है? इसे तीन पॉइंट में समझ सकते हैं.
1- भ्रष्टाचार के नैरेटिव की काटः आम आदमी पार्टी को शराब घोटाले को लेकर विपक्षी पार्टियां घेर रही हैं. मनीष सिसोदिया की पदयात्रा के जरिये आम आदमी पार्टी की रणनीति इसे लेकर नैरेटिव सेट करने की कोशिश की काट करने की हो सकती है. आम आदमी पार्टी के तमाम नेता भी सिसोदिया या केजरीवाल के पास किसी तरह की जब्ती नहीं होने, कुछ भी नहीं मिलने और जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को आधार बनाकर ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि ये एक राजनीतिक कार्रवाई है.
2- नेतृत्व को लेकर सवालः अरविंद केजरीवाल के बाद आम आदमी पार्टी का नेतृत्व कौन करेगा, सवाल ये भी उठता रहा है. केजरीवाल के जेल जाने के बाद सुनीता केजरीवाल भी एक्टिव नजर आईं. केजरीवाल की गिरफ्तारी के विरोध में इंडिया ब्लॉक की दिल्ली रैली में वो मंच पर भी नजर आईं. लोकसभा चुनाव के लिए गुजरात और अन्य राज्यों के लिए पार्टी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में भी उनका नाम केजरीवाल के बाद दूसरे नंबर पर था. दिल्ली की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी इसे लेकर परिवारवाद के मुद्दे पर भी आम आदमी पार्टी को घेर रही थी. जेल जाने के बाद सिसोदिया की उपेक्षा के आरोप भी पार्टी पर लग रहे थे. पहले घर पर बड़े नेताओं की बैठक बुलाकर और अब पदयात्रा पर निकल सिसोदिया ने एक तरह से ये साफ कर दिया है कि पार्टी में केजरीवाल के बाद वे ही दूसरे नंबर के नेता हैं.
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3- नेताओं-कार्यकर्ताओं की एकजुटताः आम आदमी पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव नतीजों और ताजा परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं और नेताओं को एकजुट रखना भी बड़ी चुनौती है. केजरीवाल के जेल जाने के बाद राजकुमार आनंद समेत कई नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ चुके हैं. वहीं, राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल भी बागी तेवर दिखा रही हैं. सिसोदिया की संगठन पर मजबूत पकड़ मानी जाती है और एक रणनीति एकजुटता भी हो सकती है.
पदयात्रा बनाएगी सत्ता की राह?
आम आदमी पार्टी बिजली-पानी की व्यवस्था को केजरीवाल सरकार बड़ी उपलब्धि के रूप में लेकर जनता के बीच जाती है, दूसरे राज्यों में भी बताती है लेकिन इस बार गर्मियों में ऐसी स्थिति बनी कि दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी पानी के लिए धरने पर बैठ गईं. 2013 में कुछ दिनों की सरकार हटा दें तो करीब 10 साल लंबी सत्ता के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी से पार पाने की चुनौती भी आम आदमी पार्टी के सामने होगी.
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चुनौतियों से भरे ऐसे वातावरण में जब केजरीवाल जेल में हैं, तब सरकार में डिप्टी रहे सिसोदिया ने अपनी रिहाई के बाद आगे आकर जिम्मेदारी ली है. मनीष सिसोदिया की ये पदयात्रा इन तमाम चुनौतियों को चीर सत्ता की राह बनाने में कितनी सफल रहेगी, ये दिल्ली चुनाव और उसके नतीजे ही बताएंगे.