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ललितेशपति त्रिपाठी थामेंगे टीएमसी का दामन, यूपी में ममता बनर्जी को कितना कर पाएंगे मजबूत?

यूपी में कांग्रेस को अलविदा कहने वाले ललितेशपति त्रिपाठी टीएमसी में शामिल होंगे. टीएमसी में उनकी एंट्री की पठकथा भी लिखी जा चुकी है, जिसमें चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) की अहम भूमिका बताई जा रही है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • ललितेश 20 अक्टूबर के बाद टीएमसी में होंगे शामिल
  • टीएमसी में एंट्री कराने में प्रशांत किशोर की अहम भूमिका
  • गांधी परिवार से ललितेश का चार पीढ़यों का नाता

उत्तर प्रदेश में गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाले ललितेश पति त्रिपाठी कांग्रेस से नाता तोड़ने के बाद अब पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थाम सकते हैं. टीएमसी में उनकी एंट्री की पठकथा भी लिखी जा चुकी है, जिसमें चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) की अहम भूमिका बताई जा रही है. सूबे में टीएमसी संगठन को खड़ा करने की जिम्मेदारी ललितेश को दिए जाने का प्लान है. ऐसे में देखना है कि यूपी में ममता बनर्जी को कितना मजबूत कर पाते हैं?

ललितेश की ममता बनर्जी से हो गई मुलाकात

सूत्रों की मानें तो ललितेशपति त्रिपाठी 20 अक्टूबर के बाद टीएमसी में शामिल होंगे. ललितेश ममता बनर्जी के साथ भी दो बार मुलाकात कर चुके हैं. कांग्रेस छोड़ने से पहले एक मुलाकात हुई और दूसरी हाल में हुई है. हालांकि, अभी भी ललितेश के समर्थक चाहते हैं कि वो समाजवादी पार्टी में शामिल हों, लेकिन सपा में वो फिट नहीं हो पा रहे हैं. कांग्रेस छोड़ने के बाद से ही ललितेश के सपा में जाने की चर्चाएं तेज थी, लेकिन खुद उन्होंने कहा था भविष्य की राजनीति का फैसला अपने समर्थकों के चर्चा करने के बाद लेंगे. 

ललितेशपति त्रिपाठी के सपा के बजाय टीएमसी में जाने के फैसले के पीछे वैचारिक कारण माना जा रहा है. ललितेश यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलापथि त्रिपाठी के प्रपौत्र हैं. गांधी-नेहरू परिवार से ललितेशपति का चार पीढ़यों से नाता रहा है. मिर्जापुर के मड़िहान विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर वह विधायक रह चुके हैं और प्रियंका गांधी के करीबी माने जाते थे.

टीएमसी को राष्ट्रीय पार्टी बनाने में जुटीं ममता

वहीं, ममता बनर्जी बंगाल चुनाव जीतने के बाद से टीएमसी का राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने में जुटी हैं. ममता बनर्जी देश में टीएमसी को कांग्रेस का विकल्प बनाने की कवायद में जुटी है. ममता बनर्जी एक दौर में कांग्रेस से ही अलग होकर टीएमसी का गठन किया था. 

ललितेश सपा की तुलना में टीएमसी में खुद को राजनीति के लिए ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. ललितेशपति त्रिपाठी को ममता बनर्जी अपनी पार्टी में शामिल कराकर यूपी में टीएमसी संगठन को खड़ा करने की जिम्मादारी दे सकती हैं. कांग्रेस के ललितेश यूपी उपाध्यक्ष थे और सियासी घराने से हैं. इसी का टीएमसी यूपी में राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है, लेकिन यह ललितेश के लिए आसान नहीं है. 

ललितेश की एंट्री में पीके की भूमिका अहम

हालांकि, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के बीच बेहतर तालमेल भी है. सपा ने बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी को बिना शर्त समर्थन किया था तो ऐसे में टीएमसी भी यूपी के 2022 चुनाव में सपा को अपना समर्थन दे सकती है.

टीएमसी का राजनीतिक प्लान 2024 का लोकसभा चुनाव का है, जिसके लिए सियासी बिसात बिछाने में पीके जुटे हुए हैं और ममता बनर्जी को राष्ट्रीय नेता के तौर पर स्थापित करने के लिए मशक्कत कर रहे हैं. इसके लिए वो एक के बाद एक नेता को टीएमसी में शामिल करा रहे हैं. 

सूत्रों की मानें तो ललितेशपति त्रिपाठी की टीएमसी में एंट्री के पीछे चुनावी रणनीतिकार पीके की अहम भूमिका मानी जा रही है. पीके 2017 में यूपी चुनाव में कांग्रेस के लिए काम कर रहे थे, उसी दौरान ललितेशपति त्रिपाठी के साथ उनकी नजदीकियां बढ़ी थी. ऐसे में ललितेश को ममता से मिलाने से लेकर टीएमसी में शामिल कराने और उनकी भूमिका को तय कराने की पूरी पठकथा उन्होंने ही लिखी है. 
 

 

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