केरलम विधानसभा चुनाव नतीजे आने बाद से मुख्यमंत्री के नाम पर चला आ रहा सस्पेंस गुरुवार खत्म हो गया. राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले केसी वेणुगोपाल सीएम के प्रबल दावेदारों में से एक थे. कांग्रेस की सियासत ने ऐसी करवट ली कि सीएम की रेस में वीडी सतीशन ने केसी वेणुगोपाल को पछाड़ते हुए अपनी जगह बनाई.
कांग्रेस हाईकमान ने गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वीडी सतीशन के नाम का ऐलान किया. अब सोमवार को केरलम मुख्यमंत्री पद की सतीशन शपथ लेंगे, लेकिन सवाल यही है कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में पिछड़ने के बाद वेणुगोपाल क्या करेंगे.
केरलम के मुख्यमंत्री नहीं बन पाने से वेणुगोपाल को भले ही सियासी तौर पर झटका लगा हो, लेकिन उनके सियासी कद पर कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है. इसकी वजह यह है कि वह अभी भी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के भरोसेमंद बन हुए हैं. ऐसे में वेणुगोपाल केरलम से लेकर दिल्ली तक की सियासत में कैसा रोल अदा करेंगे?
वीडी सतीशन बनेंगे केरल के सीएम
कांग्रेस हाईकमान के द्वारा वीडी सतीशन के नाम पर फाइनल मुहर लग गई है. इसके बाद केरल प्रदेश कांग्रेस प्रमुख सन्नी जोसेफ वीडी सतीशन और राज्य की कांग्रेस प्रभारी दीपा दासमुंशी ने गुरुवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने के लिए समर्थन पत्र सौंपा. 18 मई को सतीशन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.
केरलम के मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किए जाने के बाद सतीशन ने पार्टी आलाकमान का धन्यवाद दिया. इसके साथ ही लोगों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए काम करने की बात कही. उन्होंने कहा कि केरलम की जनता ने 10 साल लंबे वामपंथी शासन को खत्म किया और 140 विधानसभा सीटों में से 102 सीटें जीतने में हमारी मदद करके हमें सत्ता सौंपी. हमने जनता से जो भी वादे किए हैं, उन सभी को हम एक-एक करके पूरा करेंगे.
अब क्या करेंगे केसी वेणुगोपाल
कांग्रेस के अंदर एक बड़ा तबका वेणुगोपाल के केरल के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में पिछड़ने को हार के रुप में देख रहा है. उन लोगों की दलील है कि संगठन में सबसे ताकतवर होने के बावजूद वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को नहीं मना पाए. ऐसे में कहा जाने लगा था वेणुगोपाल पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के इतने भरोसेमंद नहीं हैं, जितना वह संदेश देते हैं.
हालांकि, रणनीतिकार मानते हैं कि मुख्यमंत्री पद पर पिछड़ने के बाद केसी वेणुगोपाल के सियासी कद पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. केसीवेणुगोपाल अभी भी कांग्रेस संगठन महासचिव हैं. मुख्यमंत्री की रेस में पिछड़ने का मतलब यह नहीं है कि उनका कद कम हुआ है. राहुल गांधी के सबसे करीबी और भरोसेमंद बने हुए हैं. वे दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के सबसे शक्तिशाली चेहरों में बने रहेंगे.
केरलम में बनने वाली सतीशन सरकार में वेणुगोपाल अपने समर्थक विधायकों को मंत्री बनाकर शामिल करा सकते हैं, ताकि केरल की राजनीति में उनका दबदबा बरकरार रहे. वेणुगोपाल केरल के अलाप्पुझा से सांसद हैं और उनके समर्थक विधायकों की संख्या भी अच्छी-खासी है. ऐसे में अपने समर्थक विधायकों को सरकार में एंट्री करा सकते हैं.
केरल सरकार और संगठन के बीच 'सेतु'
केरलम की सियासत में भले ही वीडी सतीशन मुख्यमंत्री बनने जा रहे हों, लेकिन उन्हें सरकार चलाने के लिए दिल्ली (हाईकमान) का समर्थन अनिवार्य है. ऐसे में वेणुगोपाल राज्य और केंद्र के बीच एक सेतु की भूमिका निभाने का रोल अदा कर सकते हैं. राज्य के नए मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे में वेणुगोपाल की राय अहम होगी.
वीडी सतीशन के मुख्यमंत्री बनने के फैसले लिए जाने के बाद केरलम में अन्य समुदायों को खुश रखने और पार्टी के भीतर गुटबाजी (खासकर रमेश चेन्निथला के समर्थकों को शांत रखने) में वेणुगोपाल 'संकटमोचक' की भूमिका निभा सकते हैं.
केसी वेणुगोपाल का सियासी कद समझें
कांग्रेस में वेणुगोपाल के सियासी कद का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान किए जाने से पहले राहुल गांधी ने उन्हें भरोसे में लिया. राहुल खुद वेणुगोपाल के घर जाकर मुलाकात की. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच ढाई घंटे तक बातचीत हुई. इसके बाद भी सतीशन के नाम का ऐलान किया गया.
माना जा रहा है कि राहुल गांधी ने केसी वेणुगोपाल को समझाया कि संगठन महासचिव के तौर पर कांग्रेस को उनकी ज्यादा जरूरत है. इसके साथ आगे चलकर पार्टी अध्यक्ष के पद जैसी बड़ी जिम्मेदारी भी उनके सामने हो सकती है. पर इसके लिए उन्हें फिलहाल केरल में मुख्यमंत्री पद की दावेदारी को छोड़ना होगा.
सीएम की घोषणा के बाद वेणुगोपाल ने बेहद सधा हुआ बयान दिया है कि वे 'पार्टी आलाकमान के फैसले का सम्मान करते हैं.' साथ ही उन्होंने सतीशन को बधाई दी और केरल में विकास के लिए मिलकर काम करने की बात कही. इससे साफ है कि वे फिलहाल पार्टी में किसी भी तरह के विद्रोह या गुटबाजी को हवा देने के मूड में नहीं हैं.
वेणुगोपाल के पास भविष्य की राह
वेणुगोपाल की उम्र अभी 63 साल है और राहुल गांधी से उनकी निकटता को देखते हुए, उनके पास अभी भी भविष्य में कई अवसर हैं. राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव और आगामी राज्यों के चुनावों की कमान संभाले रहेंगे. केरलम में अगर सतीशन की सरकार को किसी राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ता है, तो वेणुगोपाल फिर से एक 'सर्वसम्मत विकल्प' के रूप में उभर सकते हैं.
केसी वेणुगोपाल ने केरलम की 'गद्दी' जरूर खोई है, लेकिन दिल्ली के 'दरबार' में उनका प्रभाव अभी भी बरकरार है. वे भले ही केरलम के किंग नहीं बन सके, लेकिन किंगमेकर के तौर पर राष्ट्रीय और केरलम की राजनीति में अपनी भूमिका अदा करते रहेंगे.