केरलम के मुख्यमंत्री को लेकर दस दिनों से चला आ रहा सस्पेंस खत्म हो गया है. गुरुवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में वीडी सतीशन को नेता चुना गया है. कांग्रेस प्रभारी दीपा दास मुंशी ने दिल्ली एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीडी सतीशन के नाम का ऐलान किया. इस तरह दस साल के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के लिए सतीशन के नाम पर फाइनल मुहर लगा दी है.
2026 के केरलम विधानसभा चुनाव के बीच सतीशन ने कहा था कि अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन निर्णायक जीत नहीं दर्ज करता है तो वह राजनीतिक से सन्यास ले लेंगे. यह एक ऐसा साहसिक बयान था, जिसने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में जोश और भरोसा जगा दिया था. इस तरह जीत के हीरो रहे वीडी सतीशन को तमाम मंथन के बाद कांग्रेस ने सत्ता की कमान सौंपने का फैसला किया है.
केरलम में कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए इस जीत की जड़ें 2021 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद से जुड़ी, जब राहुल गांधी ने सतीशन को विपक्ष का नेता बनाया था. उस समय जो फैसला जोखिम भरा और अनिश्चित लग रहा था, वो कैसे जीत की संजीवनी बन गया. वीडी सतीशन ने सिर्फ माहौल ही नहीं बनाने का काम किया बल्कि लेफ्ट को सत्ता से बेदखल करके दिखाया. ऐसे में हम बताते हैं कि वीडी सतीशन कौन है और कैसे उन्होंने सियासी पारी का आगाज किया.
जानिए कौन हैं वीडी सतीशन
वीडी सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को केरल के एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर में हुआ. उनके पिता का नाम के दामोदरन मेनन तो माता का नाम वीपी सरस्वती अम्मा है. वीडी सतीशन का सफर छात्र राजनीति की गलियों से शुरू होकर सत्ता के सिंहासन तक पहुंचा है. उनकी पहचान एक प्रखर वक्ता, तर्कशील नेता और नीतिगत मुद्दों पर गहरी पकड़ रखने वाले राजनेता के रूप में होती है.
एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर रहने वाले वीडी सतीशन ने अपनी राजनीतिक सफर का आगाज छात्र जीवन से किया. सतीशन की राजनीतिक पारी की शुरुआत उनके कॉलेज के दिनों में हुई. वे कांग्रेस की छात्र शाखा केरल छात्र संघ से जुड़े. वे एर्नाकुलम के प्रतिष्ठित महाराजा कॉलेज और बाद में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में बेहद सक्रिय रहे. उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें KSU का राज्य अध्यक्ष और बाद में भारतीय युवा कांग्रेस का राष्ट्रीय सचिव भी नियुक्त किया गया.
सतीशन जब पहली बार बने विधायक
हाई कोर्ट में वकालत करने वाले वीडी सतीशन ने पहली बार 1990 के दशक के मध्य में परवूर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरे, लेकिन जीत से महरूम रह गए थे. इस असफलता को जल्द ही एक नये अवसर में बदल दिया. अपने अगले प्रयास में उन्होंने 2001 में शानदार जीत हासिल की और इसके बाद लगातार इस सीट को बरकरार रखते हुए दो दशकों से अधिक समय में मजबूत जमीनी पकड़ बनाई.
केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री के करुणाकरण के करीबी सतीशन माने जाते हैं. परवूर से 2006, 2011, 2016 और 2021 में लगातार जीत दर्ज की। इस प्रकार विधानसभा की राजनीति में उनका 25 वर्षों से अधिक का सियासी सफर है.
केरल में संगठन से सत्ता तक पकड़
वीडी सतीशन को कांग्रेस संगठन से लेकर सत्ता तक का अनुभव है. पार्टी के भीतर उन्होंने संगठनात्मक भूमिकाएं भी निभाई हैं, जिनमें अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के सचिव और केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं. वो अपने व्यवस्थित कार्यशैली के लिये चर्चित सतीशन ने किसी भी मुद्दे पर अपनी राय रखने से पहले उसे गहराई से समझने की आदत के कारण अपनी अलग पहचान बनाई.
वीडी सतीशन की सबसे बड़ी खूबी उनका संसदीय ज्ञान और डेटा के साथ अपनी बात रखना है. विधानसभा में उन्होंने सौर घोटाला और बार रिश्वत मामला जैसे बड़े मुद्दों पर तत्कालीन सरकारों को घेरा.
नेता विपक्ष के रूप में बनाई पहचान
साल 2021 के केरलम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDFकी हार के बाद, पार्टी में बदलाव की मांग उठी. हाईकमान ने युवा और अनुभवी चेहरों को आगे लाने के लिए रमेश चेन्निथला की जगह वीडी सतीशन को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया.
सतीशन ने यह जिम्मेदारी केरल में कांग्रेस को फिर से जीवित करने और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार को मजबूती से चुनौती देने के लिए दी गई है.
सतीशन का यह तरीका और विधानसभा में उनके त्वरित और प्रभावी हस्तक्षेप उन्हें कांग्रेस के भीतर मजबूत स्थिति बनाने में मददगार साबित हुए, भले ही लंबे समय तक उन्हें कार्यकारी पद नहीं मिल पाया. सामुदायिक और धार्मिक संगठनों के साथ कार्य संबंध बनाए रखते हुए उन्होंने तुष्टीकरण के खुले प्रदर्शन से दूरी बनाए रखी है.