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बिहार विधान परिषद चुनाव: क्लीन स्वीप पर NDA की नजर, निशांत और दीपक का क्या होगा?

बिहार विधान परिषद की 10 सीटों पर होने वाला चुनाव सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि NDA के लिए बड़ा इम्तिहान है. एक तरफ गठबंधन सभी सीटों पर कब्जा जमाने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ निशांत कुमार और दीपक प्रकाश के लिए यह चुनाव मंत्री पद बचाने की संवैधानिक जरूरत भी बन गया है.

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10 MLC सीटों पर सियासी घमासान, क्लीन स्वीप के लिए भी NDA बना रहा रणनीति. (File Photo: ITG)
10 MLC सीटों पर सियासी घमासान, क्लीन स्वीप के लिए भी NDA बना रहा रणनीति. (File Photo: ITG)

बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए होने वाला आगामी चुनाव राज्य की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है. सत्ताधारी NDA इस चुनाव में क्लीन स्वीप की तैयारी में है. वहीं, यह चुनाव बिहार सरकार के दो मंत्रियों स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है.

दरअसल, दोनों नेताओं को हाल ही में बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया था, लेकिन वे न तो बिहार विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के. ऐसे में संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें 6 महीने के भीतर दोनों सदनों में किसी एक का सदस्य बनना जरूरी है. माना जा रहा है कि दोनों इस शर्त को पूरा कर लेंगे.

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग मई के अंतिम सप्ताह में विधान परिषद चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर सकता है. NDA ने अपनी रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं. गठबंधन का लक्ष्य सिर्फ बहुमत हासिल करना नहीं, बल्कि सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज करना है. NDA की कोशिश है कि RJD को एक भी सीट न मिले.

10 सीटों में 9 सीटें 28 जून को होंगी खाली

इन 10 सीटों में से 9 सीटें 28 जून 2026 को रिक्त हो जाएंगी. जबकि दसवीं सीट पहले ही खाली हो चुकी है. यह सीट तब रिक्त हुई थी जब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद विधान परिषद से इस्तीफा दे चुके थे. जिन 10 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें फिलहाल 5 सीटें JDU के पास हैं. 

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इन नेताओं का खत्म हो रहा कार्यकाल

दो सीटें भारतीय जनता पार्टी के पास हैं. जबकि दो सीटें RJD और एक सीट कांग्रेस के खाते में है. JDU की जिन पांच सीटों पर चुनाव होना है, वे नीतीश कुमार, गुलाम गौस, भीष्म साहनी, कुमुद वर्मा और भगवान सिंह कुशवाहा से जुड़ी हुई हैं. भगवान सिंह कुशवाहा बाद में जगदीशपुर से विधायक निर्वाचित हो गए थे.

उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया. वहीं BJP की एक सीट तब खाली हुई जब सम्राट चौधरी 2025 के विधानसभा चुनाव में तारापुर सीट से विधायक चुन लिए गए. वरिष्ठ BJP नेता संजय मयूख का कार्यकाल भी 28 जून को समाप्त हो रहा है. इसके अलावा RJD के मो. फारूक और सुनील सिंह का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है.

NDA के पास है मजबूत गणित

कांग्रेस के समीर कुमार सिंह का कार्यकाल भी इसी तारीख को खत्म होगा. 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में विधान परिषद के एक सदस्य को चुनने के लिए 25 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है. RJD के पास 25 विधायक हैं. पार्टी को उम्मीद है कि महागठबंधन के समर्थन से कम से कम एक सीट अपने पास बरकरार रख सकेगी.

हालांकि, आंकड़ों के लिहाज से NDA काफी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है. गठबंधन के पास 202 विधायकों का समर्थन है. इस संख्या के आधार पर NDA आसानी से नौ सीटें जीत सकता है. अब गठबंधन की नजर 10वीं सीट पर भी है. इसके लिए NDA अतिरिक्त समर्थन जुटाने और विपक्ष को पूरी तरह मात देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.

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मंत्री के लिए चुनाव जीतना जरूरी

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के लिए यह चुनाव राजनीतिक रूप से बेहद अहम है. दोनों नेता यदि विधान परिषद के लिए निर्वाचित हो जाते हैं तो वे औपचारिक रूप से राज्य विधायिका के सदस्य बन जाएंगे. इसके बाद बिहार सरकार में मंत्री बने रहने के लिए जरूरी संवैधानिक शर्त भी पूरी हो जाएगी.

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