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कौन होगा बंगाल में बीजेपी का चेहरा दिलीप घोष वर्सेज शुभेंदु अधिकारी

ममता बनर्जी को नंदीग्राम में मात देने से शुभेंदु अधिकारी का सियासी कद काफी बढ़ गया है. वहीं, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के नेतृत्व में बीजेपी भले ही सत्ता में न आ सकी हो, लेकिन दूसरे नंबर की पार्टी जरूर बन गई है. ऐसे में अब सवाल उठता है कि बंगाल में बीजेपी का चेहरा दिलीप घोष होंगे या फिर शुभेंदु अधिकारी? 

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • बंगाल में बीजेपी के तमाम बड़े नेता चुनाव हारे
  • शुभेंदु अधिकारी और मुकुल रॉय ही जीते हैं
  • दिलीप घोष बंगाल में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे हाई-प्रोफाइल सीट नंदीग्राम में टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले शुभेंदु अधिकारी ने प्रदेश की सबसे ताकतवर नेता ममता बनर्जी को पराजित कर दिया है. इसके पहले शुभेंदु अधिकारी वाम मोर्चा के बड़े नेता लक्ष्मण सेठ को भी पराजित कर चुके हैं.

ममता को नंदीग्राम में मात देने से शुभेंदु अधिकारी का सियासी कद काफी बढ़ गया है. वहीं, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के नेतृत्व में बीजेपी भले ही सत्ता में न आ सकी हो, लेकिन दूसरे नंबर की पार्टी जरूर बन गई है. ऐसे में अब सवाल उठता है कि बंगाल में बीजेपी का चेहरा दिलीप घोष होंगे या फिर शुभेंदु अधिकारी? 

बीजेपी बंगाल में 3 से 77 सीटों पर पहुंचकर मुख्य विपक्षी दल बन गई है. हालांकि, बंगाल में बीजेपी का कोई बड़ा जनाधार नहीं था, कार्यकर्ता नहीं थे और ना ही कोई ठोस कार्यक्रम, यहां तक ठीक से बंगाली बोलने और समझने वाला नेता भी पार्टी के पास नहीं. इसके लिए उसने टीएमसी में सेंध लगाई और तोड़ फोड़ कर बहुत से नेताओं, विधायकों और कार्यकर्ताओं को अपने पाले में कर लिया. इसके बाद कहीं जाकर बीजेपी ने बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के लिए पूरी ताकत झोंकी.  

मध्य प्रदेश से बंगाल जाकर कैलाश विजयवर्गीय ने दो साल से ज़्यादा वक्त से मेहनत की, लेकिन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष इस सबमें पीछे कहीं छूट गए. बंगाल का यह चुनाव बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने लड़ा. ऐसे में पिछली विधानसभा चुनाव में जिस पार्टी का कोई नामलेवा नहीं था, सिर्फ तीन विधायक थे वो अब 77 के आंकड़े पर पहुंच गई. विधानसभा में वो भले ही सरकार में नहीं बैठ पाई हो, लेकिन सत्ता में बैठे लोग अब उसकी आवाज को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं, एक ताकतवर विपक्ष की भूमिका में वो दिखाई देगी. ऐसे में अब बंगाल में बीजेपी का चेहरा कौन होगा यह अहम सवाल है. 

बंगाल के सियासी रण में शुभेंदु अधिकारी ने जिस तरह से नंदीग्राम की सियासी जंग लड़ी है और ममता बनर्जी को मात देने से सफल रहे है, उससे उनका सियासी कद बंगाल में काफी बढ़ गया है. हालांकि, शुरुआती रुझान में शुभेंदु अधिकारी जब आगे चल रहे थे तो दिलीप घोष को भी यकीन नहीं था कि वो ममता को चुनावी मात दे देंगे. इसीलिए उन्होंने कहा था कि शुभेंदु भले ही आगे चल रहे हों, लेकिन ममता अभी आगे हो जाएंगी. दिलीप घोष के इस बयान से साफ लगता है कि वो शुभेंदु अधिकारी की जीत उनकी सियासी राह के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा. 

शुभेंदु अधिकारी टीएमसी छोड़कर बीजेपी में आए थे तब भी दिलीप घोष बहुत ज्यादा खुश नहीं थे. उन्होंने इंडिया टुडे ग्रुप से बातचीत में कहा था कि यही वो लोग थे, जो बीजेपी नेताओं पर हमले कराया करते थे पर अब हमारे साथ आ गए हैं. एक तरह से शुभेंदु अधिकारी के बीजेपी में आने के बाद दिलीप घोष का सियासी कद घटा है. वहीं, अब शुभेंदु ने जिस तरह से ममता को नंदीग्राम में मात दिया है, उससे उनके बंगाल में बीजेपी का चेहरा बनने की प्रबल संभावना है. 

बंगाल चुनाव में बीजेपी 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी है, लेकिन पार्टी के तमाम बड़े नेता चुनाव हार गए हैं. लॉकेट चटर्जी चुंचुरा सीट से, स्वपन्न दास गुप्ता तारकेश्वर सीट से और बाबुल सुप्रियो, टॉलीगंज से चुनाव हार गए हैं. इसके अलावा राजीव बनर्जी और रविंद्रनाथ भट्टाचार्य भी नहीं जीत सके. ऐसे में मुकुल रॉय और शुभेंदु अधिकारी ही दो बड़े चेहरे हैं, जिन्होंने जीत दर्ज करने में सफल रहे हैं. ऐसे में बीजेपी विधानसभा सदन में इन्हीं दोनों में किसी एक चेहरे को प्रतिपक्ष का नेता बनाएगी, क्योंकि दिलीप घोष मौजूदा समय में सांसद हैं और बीजेपी के प्रदेश हैं. 

दिलीप घोष के हाथों में भले ही बीजेपी की कमान रही हो, लेकिन पूरा चुनाव शीर्ष नेतृत्व ने लड़ा है. हालांकि, दिलीप घोष खुद को संगठन का नेता बताते रहते हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पहले ही मंत्री बनने से मना कर दिया था और संगठन में काम करने की अपनी इच्छा जतायी थी. वो कहते भी हैं कि हमें सरकार के ज्यादा संगठन में रहते हुए लोगों के बीच काम करना पंसद है. हालांकि, बंगाल चुनाव नतीजे के बाद अब जिस तरह के सियासी समीकरण बन रहे हैं, उसमें देखना होगा कि बीजेपी का चेहरा राज्य में कौन बनता है. 

 

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