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बंगाल: दलबदलुओं को नहीं दिया वोटरों ने भाव, 16 हारे, बीजेपी के 3 सांसदों को भी मिली शिकस्त

ममता बनर्जी भले ही नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी का दुर्ग नहीं भेद पाईं, लेकिन उन्होंने बंगाल के रण में 213 सीटें जीतकर बीजेपी के सत्ता में आने के अरमानों पर पानी फेर दिया है. इतना ही नहीं ममता बनर्जी की लहर में वो तमाम दिग्गज नेता चुनाव में धराशायी हो गए, जिन्होंने टीएमसी का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था. 

बाबुल सुप्रियो और लॉकेट चटर्जी बाबुल सुप्रियो और लॉकेट चटर्जी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जनता ने दलबदलू नेताओं को नकार दिया
  • टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनाव लड़ना महंगा पड़ा
  • हालांकि, बीजेपी में आए शुभेंदु ने ममता को दी मात

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी लगातार तीसरी बार चुनाव जीत दर्ज करने में कामयाब रही है. ममता बनर्जी भले ही नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी दुर्ग नहीं भेद पाईं, लेकिन बंगाल के रण में उन्होंने 213 सीटें जीतकर बीजेपी के सत्ता में आने के अरमानों पर पानी फेर दिया है. इतना ही नहीं ममता बनर्जी की लहर में वो तमाम दिग्गज नेता चुनाव में धराशायी हो गए, जिन्होंने टीएमसी का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था. 

बता दें कि पश्चिम बंगाल में साल 2016 के चुनाव के बाद से टीएमसी नेताओं का पार्टी छोड़ने और बीजेपी का दामन थामने का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वो 2021 विधानसभा चुनाव में भी जारी रहा. 2019 में बीजेपी को इसका सियासी फायदा भी मिला था, लेकिन विधानसभा चुनाव में जनता ने दलबदलू नेताओं को पूरी तरह से नकार दिया है. पिछले दो सालों में टीएमसी के करीब एक दर्जन से ज्यादा विधायकों सहित 30 नेताओं ने बीजेपी में एंट्री ली. 

बीजेपी ने इन सभी नेताओं में से बड़ी तादाद में प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था, जिनमें से 8 विधायक सहित 16 को चुनाव मात खानी पड़ी है. हालांकि, टीएमसी से आए आधा दर्जन नेताओं को विधानसभा चुनाव में जीत मिली है. वहीं, बीजेपी ने अपने चार सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारा था, जिनमें तीन को करारी मात मिली है और महज एक सांसद को ही जीत मिल सकी है. 

बीजेपी के तीन सांसद हारे
बंगाल की सियासी जंग फतह करने के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी थी. ऐसे में बीजेपी ने अपने चार सांसदों को भी चुनावी मैदान में भी उतार दिया था, इसमें से लॉकेट चटर्जी चुंचुरा सीट से, स्वपन दास गुप्ता तारकेश्वर सीट से और बाबुल सुप्रियो, टॉलीगंज से चुनाव हार गए हैं. वहीं, निसिथ प्रामाणिक को दिनहटा सीट से जीत मिली है. ऐसे में देखना है कि निसिथ सांसद रहते हैं या फिर विधानसभा में आते हैं. 

टीएमसी से आए नेताओं को मिली मात
टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनाव लड़े राजीव बनर्जी को दोमजुर विधानसभा सीट पर 43 हजार वोटों से टीएमसी प्रत्याशी के हाथों मात खानी पड़ी है. टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनाव लड़ने वाली वैशाली डालमिया को बाली सीट पर 6 हजार वोटों से शिकस्त मिली. ऐसे ही सिंगूर सीट पर रवींद्रनाथ भट्टाचार्य को 25 हजार वोटों से हार मिली है, ये भी टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनावी मैदान में उतरे थे. 

कलना सीट पर विश्वजीत कुंडू को 8 हजार वोटों से हार मिली है और ये भी टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनावी मैदान में किस्मत आजमा रहे थे. डायमंड हॉर्बर सीट पर दीप हल्दर को 23 हजार वोटों से हार मिली है, ये टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनाव लड़ रहे थे. शिलभद्र दत्ता को टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनाव लड़ना मंहगा पड़ा, उन्हें खड़दह सीट पर 28 हजार वोटों से हार मिली है. ऐसे ही अरिंदम भट्टाचार्य को भी टीएमसी छोड़कर बीजेपी से उतरने पर हार का मुंह देखना पड़ा है, उन्हें जगतदल सीट पर 19 हजार से हार मिली है. 

विद्यानागर सीट पर बीजेपी की तरफ से उतरे सब्यसागी गुप्ता को 8 हजार से मात मिली है. उन्होंने चुनाव से ठीक पहले टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था. इसके अलावा क्रिकेटर अशोक डिंडा, अभिनेत्री पायल सरकार, अभिनेता यश दासगुप्ता और पूर्व आईपीएस भारती घोष सहित कई दिग्गज चुनाव हार गए हैं. 

इन दलबदलुओं को मिली जीत
टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनाव लड़ने वाले शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को मात दी है. ऐसे ही मुकुल रॉय कृष्णानगर उत्तर सीट से जीत दर्ज की है. पार्थ चटर्जी को रानाघाट उत्तर पश्चिम सीट से जीत मिली है. मिहिर गोस्वामी नाटाबाड़ी विधानसभा सीट से जीते हैं. पंडाबेश्वर सीट से बीजेपी उम्मीदवार जितेंद्र तिवारी ने जीत दर्ज की है. इसके अलावा विश्वजीत दास बगदा सीट से जीत दर्ज की है. ये सभी नेता टीएमसी छोड़कर बीजेपी से चुनावी मैदान में उतरे थे. 


 

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