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बंगाल में लोकसभा जैसे नतीजे दोहरा पाती बीजेपी तो मिलती इतनी सीटें

साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में देखें तो इसबार बीजेपी के वोट शेयर में भी करीब दो फीसदी की कमी आई है. 2019 के 40 की तुलना में बीजेपी इसबार 38 फीसदी वोट ही प्राप्त कर सकी.

सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई) सांकेतिक तस्वीर (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बंगाल में बीजेपी के होते 120 से अधिक विधायक
  • 2019 के मुकाबले वोट शेयर में भी आई कमी

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं. बंगाल की 294 में से 292 सीटों की काउंटिंग हुई जिसमें अबकी बार 200 पार का नारा देने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 77 सीटें ही जीत सकी. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने 292 में से 213 सीटें जीत ली हैं. हालांकि, सीएम ममता बनर्जी पार्टी की प्रचंड जीत के बावजूद अपनी सीट पर चुनाव हार गईं.

बीजेपी भले ही 200 पार के नारे के बावजूद अपनी सीटों का आंकड़ा तीन अंकों में ले जाने में विफल रही हो लेकिन फिर भी इसमें कोई शक नहीं कि बीजेपी ने बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी का ओहदा हासिल कर लिया है. यह भी बीजेपी की बड़ी उपलब्धि है. बीजेपी साल 2016 में तीन सीटें ही जीत सकी थी. इसके आधार पर देखें तो बीजेपी की यह जीत बड़ी है लेकिन यदि हम साल 2019 के लोकसभा चुनाव में विधानसभावार पार्टी के प्रदर्शन को देखें तो तस्वीर कुछ और ही नजर आएगी.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 40.3 फीसदी वोट शेयर के साथ 42 में से 18 संसदीय सीटों पर जीत हासिल किया था. टीएमसी 43.7 फीसदी वोट शेयर के साथ 22 सीटें जीती थी. कांग्रेस पार्टी 5.7 फीसदी वोट शेयर के साथ दो सीटों पर विजयी रही थी. बीजेपी के लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन को देखें तो पार्टी 2021 के चुनाव में 2019 का करिश्मा दोहराने में विफल रही है.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 120 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी. टीएमसी ने भी 160 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई थी. साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में देखें तो इस बार बीजेपी के वोट शेयर में भी करीब दो फीसदी की कमी आई है. 2019 के 40 की तुलना में बीजेपी इस बार 38 फीसदी वोट ही प्राप्त कर सकी. बीजेपी साल 2019 का प्रदर्शन दोहराने में भी कामयाब हो जाती तो पार्टी के 120 से अधिक विधायक होते.

 

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