दिल्ली की सियासत में आम आदमी पार्टी भले ही भ्रष्टाचार के मामले में घिरी हुई है. पार्टी के दो बड़े नेता मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन जेल में है. इसके बावजूद आम आदमी पार्टी के संयोजक सीएम अरविंद केजरीवाल ने मिशन-2023 का बिगुल फूंक दिया है. पिछले दो दिनों में केजरीवाल ने दो चुनावी राज्यों कर्नाटक और छत्तीसगढ़ का दौरा करके राजनीतिक एजेंडा सेट करने शुरू कर दिया है और होली के बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश का दौरा प्रस्तावित है. इन चारों ही राज्यों में अरविंद केजरीवाल की पार्टी की एंट्री से कांग्रेस और बीजेपी किसे सियासी फायदा और किसे नुकसान उठाना पड़ेगा?
साल 2023 में अब छह राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है, जिसमें कर्नाटक, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और मिजोरम है. तेलंगाना और मिजोरम को छोड़ दें तो बाकी चार राज्यों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई है. इन छह राज्यों में से कांग्रेस-बीजेपी की दो-दो राज्यों में सरकार है जबकि दो राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियां काबिज है. 2023 में होने वाले छह राज्यों के चुनाव को 2024 के लोकसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट माना जा रहा है. ऐसे में कांग्रेस-बीजेपी ही नहीं बल्कि आम आदमी पार्टी भी पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने जा रही है.
कर्नाटक में केजरीवाल की एंट्री से क्या होगा
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए अपनी सरकार को बचाए रखने की चुनौती है जबकि कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए बेताब है. जेडीएस भी तीसरी ताकत के रूप में है, लेकिन अब कांग्रेस और बीजेपी के बीच मानी जा रही सीधी लड़ाई में आम आदमी पार्टी के एंट्री से मुकाबला रोचक होने की उम्मीद है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी के कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान ने एक जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने राज्य के लोगों के लिए मुफ्त बिजली, सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अच्छी स्वास्थ्य सेवा देने का भी वादा किया.
कर्नाटक में आम आदमी पार्टी के उतरने से चतुष्कोणीय लड़ाई हो सकती है. 2018 के चुनाव में बीजेपी 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी तो कांग्रेस को 80 सीटें मिली थी. कांग्रेस और बीजेपी में भले ही 24 सीटों का अंतर रहा हो लेकिन कांग्रेस को बीजेपी से 3 फीसदी ज्यादा वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर जेडीएस थी, जो 37 सीटें और करीब 18 फीसदी वोट मिले थे. बीजेपी ने येदियुरप्पा को सीएम पद के हटाकर बोम्मई को सत्ता की कमान सौंप रखी है, लेकिन चुनौती काफी बढ़ गई है. ऐसे में आम आदमी पार्टी के एंट्री से सत्ता विरोधी वोट के बिखरने का खतरा भी बन गया है, जिसका सीधा असर कांग्रेस की वापसी की संभावना पर पड़ सकता है.
छत्तीसगढ़ में AAP की दस्तक
छत्तीसगढ़ के रायपुर में रविवार को आम आदमी पार्टी ने शक्ति प्रदर्शन किया. अरविंद केजरीवाल ने 24 घंटे मुफ्त बिजली देने और अनियमित कर्मचारियों को नियमित करने का इशारा तक किया. उन्होंने कहा कि बीजेपी-कांग्रेस में कोई ज्यादा अंतर नहीं है. दोनों की अडानी से दोस्ती है. पार्टी के नाम बदल जाते हैं, मुख्यमंत्री बदल जाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ की जनता की जिंदगी नहीं बदल रही है, व्यवस्थाएं नहीं बदल रही हैं. आम आदमी पार्टी की सभा उसी मैदान में हुई थी, जहां कुछ दिन पहले कांग्रेस की आम सभा हुई थी. छत्तीसगढ़ में भी सीधी लड़ाई कांग्रेस और बीजेपी के बीच है, लेकिन आम आदमी पार्टी के एंट्री से त्रिकोणीय मुकाबला हो सकता है.
राजस्थान और मध्य प्रदेश का दौरा
सीएम अरविंद केजरीवाल 13 मार्च को राजस्थान का दौरा करेंगे और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. उनके कार्यक्रम की तैयारी शुरू हो गई है जबकि 14 मार्च को मध्य प्रदेश का दौरा प्रस्तावित है. दोनों ही राज्यों में 2023 के आखिर में चुनाव होने है, जिसके लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही चुनावी मोड में उतर चुकी है तो आम आदमी पार्टी भी अपने अभियान को धार देने में जुट गई है. मध्य प्रदेश में बीजेपी सत्ता में है तो राजस्थान में कांग्रेस. ऐसे में आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश में अपना एक मेयर बना चुकी है और कुछ पार्षद भी जिता रखे हैं, लेकिन राजस्थान में अभी तक कोई बड़ा करिश्मा नहीं दिखा सकी है. ऐसे में केजरीवाल अब पूरी तरह से दोनों ही राज्यों पर अपना केंद्रित किया है और माहौल बनाने और सियासी एजेंडा सेट करने के लिए की कवायद में है.
कांग्रेस की जमीन पर खड़ी AAP
आम आदमी पार्टी की दिल्ली और पंजाब में सरकार है. दिल्ली में तीसरी बार तो 2022 में पंजाब में एतिहासिक जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी. आम आदमी पार्टी पंजाब में 117 में से 92 सीटों पर जीत दर्ज की है. दिल्ली की तरह पंजाब में भी AAP ने तत्कालीन सीएम समेत कई बड़े नेताओं को पराजित किया. आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के वोटबैंक में सेंधमारी करके ही अपना राजनीतिक आधार खड़ा किया है. दिल्ली में 2013 में शीला दीक्षित की सरकार को सत्ता से बेदखल कर केजरीवाल सीएम बने थे और अभी तक अपना वर्चस्व बरकरार रखे हुए हैं. इसी तरह से पंजाब में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस सरकार को हटाकर अपना दबदबा कायम किया है.
आम आदमी पार्टी का गोवा विधानसभा चुनाव में भी दो सीटों पर अपना कब्जा जमाया. पिछले साल आप ने बीजेपी के गढ़ गुजरात में जाकर विधानसभा चुनाव लड़ा था. गुजरात में पार्टी को 5 सीटों पर जीत मिली और उसे 14 फीसदी के करीब वोट मिले थे. इसके बाद ही आम आदमी पार्टी एक राष्ट्रीय पार्टी बन गई और देशभर में पार्टी के विस्तार करने में जुटी है. अरविंद केजरीवाल जिस भी राज्य में चुनाव लड़ा है, उन राज्यों में कांग्रेस को ही सियासी नुकसान पहुंचाया है.
साल 2023 में होने वाले छह राज्यों में से चार राज्यों में चुनावी मैदान में उतरने जा रही है, इन राज्यों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी लड़ाई है. ऐसे में देखना है कि केजरीवाल की पार्टी कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनावी जंग बीजेपी और कांग्रेस में से किसे राजनीतिक लाभ और किसे सियासी नुकसान पहुंचाते हैं, लेकिन वोटिंग पैटर्न को देखते हुए कांग्रेस और बीजेपी दोनों की चिंताए बढ़ गई हैं?