अपनी सरपट और तेज पैदल चाल के जानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों व्हील चेयर पर हैं. 10 तारीख़ को नंदीग्राम में उन्हें चोट लगी थी. पैर में प्लास्टर बंधा गया था लेकिन कल वे 5 दिनों बाद पूरे जोश के साथ सड़क पर रोड शो के लिए उतरीं. व्हील चेयर पर ही क़रीब 5 किलोमीटर लंबा रोड शो उन्होंने किया. इस दौरान उनके समर्थक एक नारा लगाते रहे- भोंगो पाये खेला होबे! यानि टूटे पैर से खेला जाएगा. लेकिन कल ममता बनर्जी की चोट के मामले में तस्वीर चुनाव आयोग ने साफ़ कर दी है. चुनाव आयोग ने अलग अलग रिपोर्ट्स पर मंथन किया और ये निष्कर्ष निकाला कि ममता को जो चोट लगी है वो महज़ एक हादसा था न कि एक सुनियोजित हमला. क्योंकि ख़ुद ममता और टीएमसी के कई नेताओं ने इसे हमला बताया था और इस सहारे बीजेपी को आड़े हाथों लिया था. ख़ैर ममता बनर्जी कल एक्शन मोड में ज़रूर दिखाई दी. रोड शो के बाद ममता ने कहा कि मुझे अभी भी दर्द हो रहा है और काफ़ी चोटें आयी हैं लेकिन मैं अपने लोगों को लेकर ज़्यादा चिंतित हूं। मैं पूरे पश्चिम बंगाल में इसी व्हील चेयर पर बैठकर चुनाव यात्रा करूंगी। मुझे अपने लोगों का दर्द मेरे दर्द से ज़्यादा महसूस होता है. तो लोगों को इमोशनल करने का कार्ड ममता ने चल दिया लेकिन इसे लेकर जनता का कैसा रुख देखने को मिला?
90 के दशक की शुरुआत में राम मंदिर आंदोलन अपने चरम पर था. शुरुआती सालों में ही यह इतना विकराल हुआ कि बाबरी मस्जिद गिरा दी गई. इसके बाद ‘अयोध्या तो झांकी है, काशी मथुरा बाकी है’ जैसे नारे उछाले जाने लगे. सालों बाद 9 नवंबर 2019 को अयोध्या के राम मंदिर मसले पर तो फ़ैसला आ गया लेकिन काशी और मथुरा में हिंदू मंदिरों के बगल में बनी मस्ज़िदों का मामला तूल पकड़ने लगा. इसी के साथ उठने लगी मांग कि उपासना स्थल क़ानून 1991 को असंवैधानिक क़रार दिया जाए. बीजेपी नेता अश्विनि उपाध्याय ने उपध्याय ने इसके लिए याचिका लगाई थी जिस पर पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गया है. इस मसले पर कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. लेकिन अब इस क़ानून के पक्ष में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड उतर आया है. बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल करने के लिए लखनऊ की टीले वाली मस्जिद के इंतजामिया को अधिकृत किया है. बोर्ड के अध्यक्ष का कहना है कि ये कानून देश और संविधान के सेक्युलर आधार की नुमाइंदगी करता है. और वे इसके पक्ष में लड़ाई करेंगे तो क्या है इस क़ानून में और इसे चैलेंज किए जाने की मंशा क्या है?
भारत के केरल राज्य में कोच्चि से 150 किलोमीटर दूर एक गांव है कोडिन्ही. यहां के बारे में एक ऐसा रहस्य है जो विज्ञान को भी हैरान किए है. 2000 की आबादी वाले इस गांव में हर घर में जुड़वा बच्चे हैं. कई बार इसे लेकर मीडिया में ख़बरें बनती रहती हैं. कई डॉक्यूमेंट्रीज़ भी हैं लेकिन आप सोच रहे होंगे कि आज बात इसकी क्यों तो दरअसल हम आज जुड़वा बच्चों से जुड़ी एक रिसर्च लेकर आए हैं सोचा इसी से बात शुरु की जाए तो साइंस जर्नल ह्यूमन रिप्रोडक्शन (Journal of Human reproductive science) में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया का हर 40वां बच्चा जुड़वा पैदा होता हैं. शोधकर्ताओं ने इसके लिए 135 देशों से 2010-2015 के बीच के आकड़े जुटाए. आंकड़ों के अनुसार ग्लोबली जुड़वां बच्चे पैदा होने की दर में एक तिहाई की बढ़ोतरी हुई है. हर साल लगभग 16 लाख (1.6 मिलियन) जुड़वा बच्चे जन्म ले रहे हैं. सबसे ज्यादा जुड़वा बच्चों के पैदा होने की दर अफ्रीका में है. तो मेडिकल टर्म में जुड़वे बच्चे कैसे होते है? इस दर में बढ़ोतरी के लिए में क्या कारक जिम्मेदार हैं? और क्या इस रिपोर्ट की फ़ाइडिंग चिंताजनक हैं?
रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा टी-20 मैच खेला गया. इस मैच में भारत ने इंग्लैंड को 7 विकेट से हरा दिया. टॉस जीतकर भारत ने गेंदबाज़ी का फैसला किया था जिसके बाद इंग्लैंड ने 20 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 164 रन बनाए और भारत के सामने 165 रनों का लक्ष्य रखा. लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरूआत अच्छी नहीं रही और सलामी बल्लेबाज़ के.एल राहुल बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए लेकिन उसके बाद इशान किशन और विराट कोहली की शानदार पारी की बदौलत भारत ने इंग्लैड पर 7 विकेट से जीत दर्ज की. विराट ने 73 और ईशान किशन ने 56 रन की पारी खेली. ईशान डेब्यू मैच में फिफ्टी लगाने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। कोहली की टी-20 करियर में यह 26वीं फिफ्टी रही. तो इस मैच में कैसा रहा भारतीय टीम का प्रदर्शन. इसके अलावा देश दुनिया से ताज़ा हेडलाइंस, समाचारों की सुर्खियां और आज के दिन की अहमियत सुनिए 'आज का दिन' में अमन गुप्ता के साथ.