गणतंत्र दिवस परेड का इतिहास रोचक और महत्वपूर्ण है. 1950 से 1954 तक परेड विभिन्न स्थानों पर आयोजित की गई. 1955 में राजपथ (वर्तमान कर्तव्यपथ) पर पहली बार औपचारिक परेड हुई. यह परेड भारत के कूटनीतिक संबंधों का प्रतीक रही है. पाकिस्तान और चीन के नेताओं को मुख्य अतिथि बनाया गया. 1961 में महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय की उपस्थिति ऐतिहासिक थी. 1962 तक परेड छह मील लंबी हो गई थी. इसी वर्ष कैप्टन गुरवचन सिंह सालारिया को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया.