फूलों से सजा फर्स्ट एसी कूपा, सफेद चादर उस पर गुलाब की पंखुड़ियां और लाल-सफेद गुब्बारे साथ ही I Love You का बड़ा संदेश,. सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो ने लाखों लोगों का ध्यान खींचा. लेकिन इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा किरदार अब भी रहस्य बना हुआ है. आखिर वह कपल कौन था, जिसने अपने हनीमून को यादगार बनाने के लिए ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे को हनीमून सूट की तरह सजवाया? रेलवे ने अब तक उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है. हालांकि, इस वायरल वीडियो की कीमत एक रेलवे कर्मचारी को निलंबन के रूप में चुकानी पड़ी, जबकि सजावट करने वाले डेकोरेटर के खिलाफ रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है.
पहली नजर में यह वीडियो किसी फिल्मी सीन जैसा लगता है. ऐसा लगता है मानो किसी फाइव स्टार होटल के हनीमून सुइट को फूलों और लाइटों से सजाया गया हो. लेकिन यह कोई होटल नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे की नांदेड़-मुंबई नांदीग्राम एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 11002) का फर्स्ट एसी कूपा था. यही वजह है कि यह मामला रोमांटिक सरप्राइज से निकलकर रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था तक पहुंच गया.
क्या है पूरा मामला
दक्षिण मध्य रेलवे के आधिकारिक बयान के अनुसार, 6 जुलाई 2026 को ट्रेन संख्या 11002 नांदीग्राम एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे एक कपल ने ऑनलाइन एक डेकोरेटर को बुक किया था. उद्देश्य था कि ट्रेन के फर्स्ट एसी कूपे को खास अंदाज में सजाकर यात्रा को यादगार बनाया जाए. जब ट्रेन महाराष्ट्र के जालना स्टेशन पर पहुंची, तब डेकोरेटर बिना रेलवे की अधिकृत अनुमति के कोच में दाखिल हो गया. कुछ ही मिनटों में उसने पूरे कूपे की तस्वीर बदल दी. बर्थ पर गुलाब की पंखुड़ियां बिछा दी गईं. चारों ओर फूलों की झालरें लगा दी गईं. लाल और सफेद गुब्बारों से पूरा कूपा भर गया. रंगीन लाइटें लगा दी गईं. और सामने बड़े अक्षरों में लिखा गया I Love You . सजावट पूरी होने के बाद उसका वीडियो बनाया गया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया.
वीडियो वायरल होते ही बदल गया पूरा मामला
शुरुआत में सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो को रोमांटिक सरप्राइज बताकर शेयर करने लगे. कई लोगों ने कहा कि भारतीय रेलवे में इस तरह की सजावट पहली बार देखने को मिली है. लेकिन कुछ ही घंटों में यह वीडियो रेलवे अधिकारियों तक पहुंच गया. इसके बाद मामला पूरी तरह बदल गया. रेलवे ने स्पष्ट किया कि असली सवाल सजावट नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था है.
रेलवे ने क्या कहा
दक्षिण मध्य रेलवे ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि कपल ने ऑनलाइन डेकोरेटर को बुक किया था. हालांकि, जालना स्टेशन पर डेकोरेटर का ट्रेन में प्रवेश पूरी तरह अनधिकृत था और इसे गंभीर चूक माना गया है. रेलवे ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.

कपल की पहचान अब भी रहस्य
पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस दंपति की हो रही है, जिसके लिए यह पूरी सजावट की गई. हालांकि, रेलवे ने अपने बयान में उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है. यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि वे किस शहर के रहने वाले थे या उन्होंने यह सेवा किस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए बुक की थी. फिलहाल रेलवे की जांच का केंद्र दंपति की पहचान नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है.
सस्पेंड हुआ संबंधित रेलवे कर्मचारी
इस मामले में सबसे पहली कार्रवाई ड्यूटी पर मौजूद संबंधित रेलवे कर्मचारी पर हुई. दक्षिण मध्य रेलवे ने उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच में यह पता लगाया जाएगा कि डेकोरेटर को ट्रेन तक पहुंचने की अनुमति कैसे मिली? कोच में प्रवेश किसकी जानकारी में हुआ? सुरक्षा जांच के दौरान उसे क्यों नहीं रोका गया? जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी? जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
डेकोरेटर पर भी दर्ज हुआ केस
रेलवे ने सजावट करने वाले निजी डेकोरेटर के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. उस पर रेलवे अधिनियम के तहत ट्रेन में अनधिकृत प्रवेश, बिना टिकट यात्रा, रेलवे परिसर में ट्रेसपासिंग के आरोप में मामला दर्ज किया गया है. रेलवे का कहना है कि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति ट्रेन में प्रवेश कर व्यावसायिक गतिविधि नहीं कर सकता.
आखिर रेलवे इसे इतना गंभीर क्यों मान रहा है?
कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर फूलों से सजावट कराने पर इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों हुई? रेलवे अधिकारियों का जवाब साफ है. मामला सजावट का नहीं है. मामला सुरक्षा का है. यदि एक निजी डेकोरेटर बिना अनुमति फर्स्ट एसी कोच तक पहुंच सकता है, तो भविष्य में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति उसी रास्ते का इस्तेमाल कर सकता है. यही वजह है कि रेलवे इस घटना को सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक के रूप में देख रहा है.
First AC कोच को लेकर नियम इतने सख्त क्यों?
फर्स्ट एसी भारतीय रेलवे की सबसे सुरक्षित और प्रीमियम श्रेणी मानी जाती है. यहां सीमित यात्रियों का प्रवेश होता है. कोच के अंदर अनावश्यक आवाजाही पर भी निगरानी रहती है. ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति का बिना अनुमति प्रवेश रेलवे की सुरक्षा नीति के खिलाफ माना जाता है.