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मछुआरा, छात्र नेता और अब विधायक, कौन हैं 3 बार के दिग्गज MLA को हराने वाले थॉमस

केरल के अलाप्पुझा में यूडीएफ की जीत से कांग्रेस में उत्साह है. एडी थॉमस ने सीपीआई(एम) के पीपी चिथरंजन को 21,015 वोटों से हराया. मछुआरे परिवार से आए थॉमस की कहानी संघर्ष और प्रेरणा की मिसाल है. के सी वेणुगोपाल ने उनकी जीत को खास बताया. राज्य में कांग्रेस 63 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि यूडीएफ को स्पष्ट बहुमत मिला और एलडीएफ को हार का सामना करना पड़ा.

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एडी थॉमस ने पीपी चिथरंजन को बीस हजार से ज्यादे मतों से हराया. (Photo ITG)
एडी थॉमस ने पीपी चिथरंजन को बीस हजार से ज्यादे मतों से हराया. (Photo ITG)

केरल के अलाप्पुझा विधानसभा क्षेत्र में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की बड़ी जीत के बाद कांग्रेस में उत्साह का माहौल है. एआईसीसी महासचिव के सी वेणुगोपाल ने जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी अपने सभी कार्यकर्ताओं की मेहनत पर गर्व करती है, लेकिन एडी थॉमस की जीत खास तौर पर प्रेरणादायक है.

30 वर्षीय एडी थॉमस ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के मौजूदा विधायक पीपी चिथरंजन को 21,015 मतों के बड़े अंतर से हराया. थॉमस फिलहाल केरल छात्र संघ के जिला अध्यक्ष हैं और एक साधारण मछुआरे परिवार से आते हैं. वे बचपन से ही समुद्र में मछली पकड़ने का काम करते रहे हैं.

थॉमस उस समय सुर्खियों में आए थे, जब राज्य सरकार की यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ प्रदर्शन करने पर सुरक्षा कर्मियों ने उनके साथ मारपीट की थी. इस घटना का वीडियो वायरल हुआ था, जिसने राज्य की राजनीति में काफी असर डाला.

जीत पर क्या बोले थॉमस?
अपनी जीत पर थॉमस ने कहा कि उन्हें जीत की उम्मीद थी, लेकिन इतने बड़े अंतर की नहीं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय के सी वेणुगोपाल को देते हुए कहा कि उन्होंने ही उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया. थॉमस ने बताया कि उन्होंने 17 साल की उम्र में अपने माता-पिता के संघर्ष को देखते हुए मछली पकड़ने का काम शुरू किया था.

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गौरतलब है कि अलाप्पुझा सीट से के सी वेणुगोपाल 1996 से 2009 तक तीन बार विधायक रह चुके हैं. इस जीत को केरल की राजनीति में यूडीएफ के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है.

आज थॉमस की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो साधारण पृष्ठभूमि से आकर कुछ बड़ा करने का सपना देखता है. यह साबित करता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है.

UDF को बहुमत
केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, जिसने कुल 63 सीटों पर जीत दर्ज की. इसके साथ ही संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) को स्पष्ट बहुमत हासिल हो गया है. वहीं, वाम दलों के गठबंधन एलडीएफ को इस बार झटका लगा है. सीपीआई(एम) को केवल 26 सीटों पर संतोष करना पड़ा. अन्य दलों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने 22 सीटें जीतीं, जबकि सीपीआई को 8 सीटें मिलीं. इसके अलावा केरल कांग्रेस को 7, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी को 3 और भाजपा को भी 3 सीटों पर जीत हासिल हुई.

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