scorecardresearch
 

'ईरान के होर्मोज्गन में फंसे 600 तमिल', पूर्व मंत्री ने केंद्र सरकार से लगाई मदद की गुहार

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान से एक चिंताजनक खबर सामने आई है. तमिलनाडु के पूर्व मंत्री डी. जयकुमार ने दावा किया है कि होर्मोज्गन इलाके में करीब 600 तमिल फंसे हुए हैं. उनका कहना है कि वहां हालात मुश्किल हैं और लोगों को तुरंत मदद की जरूरत है.

Advertisement
X
होर्मोज्गन से आई चिंताजनक खबर (Photo: x.com/ @djayakumaroffcl)
होर्मोज्गन से आई चिंताजनक खबर (Photo: x.com/ @djayakumaroffcl)

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के बीच कई भारतीय नागरिक ईरान में फंसे हुए हैं. भारत सरकार अपने लोगों को सुरक्षित वापस लाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. इसी बीच तमिलनाडु के पूर्व मंत्री डी. जयकुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया है कि ईरान के होर्मोज्गन इलाके में तमिलनाडु के करीब 600 लोग फंसे हुए हैं और उन्हें तुरंत मदद की जरूरत है. उन्होंने केंद्र सरकार से इन लोगों तक जल्द राहत पहुंचाने और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था करने की अपील की है.

जयकुमार ने ट्वीट कर बताया कि बंदर-ए-मोगम इलाके में फंसे ये लोग युद्ध के हालातों की वजह से घरों में कैद होने को मजबूर हैं. उनके लिए रोजमर्रा का जरूरी सामान जुटाना भी मुश्किल हो गया है, जिससे वहां खाने-पीने और दवाइयों का भारी संकट खड़ा हो गया है. इधर तमिलनाडु में उनके परिवार वाले बुरी तरह डरे हुए हैं और सरकार की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके अपने जल्द से जल्द सुरक्षित घर लौट आएं.

दूतावास से संपर्क में दिक्कत का दावा

जयकुमार का कहना है कि फंसे हुए लोगों ने भारतीय दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की है. कुछ लोगों की फोन पर बात तो हुई, लेकिन अभी तक उन्हें वहां से निकालने या राहत पहुंचाने को लेकर कोई साफ जानकारी नहीं मिल पाई है. इस वजह से वहां फंसे लोगों के बीच असमंजस और डर का माहौल है.

Advertisement

केंद्र सरकार से तत्काल मदद की मांग

ऐसे में उन्होंने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई है कि इस मामले में तुरंत दखल दें. उनका कहना है कि दूतावास के जरिए फंसे हुए लोगों तक फौरन खाना और दवाइयां पहुंचाई जाएं. साथ ही, उन्हें वहां से निकालने या सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए जल्द से जल्द कोई प्लान तैयार किया जाए.

मदद के लिए उन्होंने कन्याकुमारी के रहने वाले पीटर का व्हाट्सएप नंबर (+98 939 330 4792) भी साझा किया है, जो खुद वहां फंसे हुए हैं. ताकि अधिकारी सीधे उनसे बात कर वहां की जमीनी हकीकत जान सकें.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement