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हल्द्वानी हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत रद्द की

हाईकोर्ट द्वारा डिफॉल्ट बेल यानी चार्जशीट दाखिल करने में देरी के आधार पर मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने सही नहीं माना है. हल्द्वानी में आठ फरवरी 2024 को बनभूलपुरा में रेलवे को जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा में पुलिस स्टेशन पर हमला कर आगजनी की गई थी.

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हल्द्वानी हिंसा मामले में आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत रद्द. (Photo- ITGD)
हल्द्वानी हिंसा मामले में आरोपियों की डिफॉल्ट जमानत रद्द. (Photo- ITGD)

हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे लाइन के आसपास अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान फैलाई गई हिंसा के आरोपियों को उत्तराखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत पर रिहा करने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है.

जावेद सिद्दीकी और अरशद अयूब सहित अन्य आरोपियों की 'डिफॉल्ट जमानत' निरस्त करते हुए कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया.

हाईकोर्ट द्वारा डिफॉल्ट बेल यानी चार्जशीट दाखिल करने में देरी के आधार पर मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने सही नहीं माना है. हल्द्वानी में आठ फरवरी 2024 को बनभूलपुरा में रेलवे को जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई हिंसा में पुलिस स्टेशन पर हमला कर आगजनी की गई. उन घटनाओं में छह लोगों की मौत हुई थी. इन वारदात में मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक को हाईकोर्ट ने अप्रैल 2026 में जमानत दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने तथ्यों को समझने में गलती की थी. उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने पलटते हुए कहा कि जमानत पर बाहर आए सभी आरोपियों को अब स्थानीय अदालत के समक्ष आत्म समर्पण करना होगा.

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