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पूरे देश में जल्द शुरू होगी SIR, बोले चुनाव आयुक्त ञानेश कुमार

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस और चुनाव आयोग स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर बताया कि SIR प्रक्रिया जल्द ही देश के शेष राज्यों में भी लागू की जाएगी. मौजूदा समय में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR जारी है, जिसमें बिहार में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और असम में विशेष पुनरीक्षण चल रहा है.

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मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि बिहार में SIR सफल रही (Photo: ITG)
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि बिहार में SIR सफल रही (Photo: ITG)

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि मतदाता सूचियों का स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) जल्द ही देश के बाकी राज्यों में भी लागू किया जाएगा. यह जानकारी उन्होंने राष्ट्रीय मतदाता दिवस और चुनाव आयोग के स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर अपने संदेश में दिया. उन्होंने कहा कि “शुद्ध” मतदाता सूची ही लोकतंत्र की सबसे मजबूत बुनियाद होती है.

ज्ञानेश कुमार ने बताया कि मौजूदा समय में 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है. बिहार में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि असम में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण चल रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू किया जाएगा.

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि SIR का उद्देश्य हर योग्य मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना और अयोग्य मतदाताओं के नाम हटाना है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब मतदाता सूची पूरी तरह से शुद्ध और भरोसेमंद हो.

बिहार में SIR की सफलता का उदाहरण देते हुए ज्ञानेश कुमार ने बताया कि अंतिम मतदाता सूची के खिलाफ कोई भी अपील नहीं हुई, जो इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता का प्रूफ है. उन्होंने कहा कि इसी मजबूत आधार पर हुए चुनावों में 67.13 प्रतिशत मतदान हुआ, जो 1951 के बाद सबसे अधिक है. खास बात यह रही कि महिला मतदाताओं की भागीदारी 71.78 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो अब तक का उच्चतम स्तर है.

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यह भी पढ़ें: 'जहां-जहां SIR, वहां-वहां वोट चोरी...', चुनान आयोग की निष्पक्षता पर राहुल गांधी ने उठाए गंभीर सवाल

मुख्य चुनाव आयुक्त ने युवाओं से अपील की कि वे न केवल मतदान करें, बल्कि लोकतंत्र के प्रहरी बनकर गलत सूचना और झूठी खबरों के विरुद्ध खड़े हों. उन्होंने कहा कि इसके लिए चुनाव प्रक्रिया और आयोग की पहलों की सही जानकारी आवश्यक है.

उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी और पिछले 16 सालों से इस दिन को राष्ट्रीय मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि लोकतंत्र में मतदाताओं की भूमिका को सम्मानित किया जा सके.

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