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सिक्किम सीएम के चुनाव लड़ने पर दिल्ली HC में सुनवाई आज, नेता प्रतिपक्ष ने आयोग के फैसले को दी है चुनौती

सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार तमांग 2016 के दिसंबर में साढ़े नौ लाख रुपये की हेराफेरी के मामले में दोषी पाए गए थे. इन्हें भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत एक साल एक महीने कैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी.

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दिल्ली हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
दिल्ली हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नेता प्रतिपक्ष बोले- नियम के तहत अगस्त 2024 तक रहनी चाहिए थी पाबंदी
  • चुनाव आयोग ने 2019 में ही उनको चुनाव लड़ने की दे दी थी अनुमति
  • दिसंबर 2016 में साढ़े नौ लाख रुपये की हेराफेरी में पाए गए थे दोषी

दिल्ली हाईकोर्ट आज इस मामले में फाइनल सुनवाई करेगा कि सिक्किम के सीएम प्रेम कुमार तमांग चुनाव लड़ सकेंगे या फिर 2024 तक उन पर बैन जारी रहेगा. सिक्किम विधानसभा में नेता विपक्ष ने चुनाव आयोग के एक फैसले के खिलाफ अर्जी दाखिल की है. सुनवाई में कोर्ट तमांग के पद पर बने रहने के सवाल के साथ-साथ एक अहम कानूनी सवाल पर भी अपना रुख साफ करेगा. सवाल यह है कि क्या निर्वाचन आयोग को क्या यह अधिकार है कि वह भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी व्यक्ति पर छह साल तक चुनाव लड़ने की पाबंदी की अवधि घटाकर साल भर कर सकता है.

9.50 लाख रुपये की हेराफेरी में पाए गए थे दोषी

सिक्किम के मौजूदा सीएम प्रेम कुमार तमांग को कोर्ट ने 2016 के दिसंबर में साढ़े नौ लाख रुपये की हेराफेरी के लिए भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत एक साल एक महीने कैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी. कानून के मुताबिक तमांग के चुनाव लड़ने पर एक साल एक महीना सजा अवधि और अगले छह साल यानी कुल सात साल एक महीना तक पाबंदी लगनी चाहिए थी. 

आयोग ने 5 साल घटा दी चुनाव लड़ने की पाबंदी 

तमांग ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. दोनों ही जगह हारने पर उनको एक साल एक महीने जेल में गुजारने पड़े. सजा पूरी हुई तो 18 अगस्त 2018 को तमांग रिहा हुए. अब उनकी चुनाव लड़ने के अयोग्यता की अवधि शुरू होने का समय शुरू हुआ है. उनके चुनाव लड़ने पर अगस्त 2024 तक पाबंदी लगनी चाहिए थी, लेकिन आयोग ने 2019 में ही उनको हरी झंडी दिखा दी. 

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मुख्य विपक्षी पार्टी ने आयोग के फैसले को दी चुनौती

सिक्किम विधानसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के उपाध्यक्ष जेबी धरनाल की याचिका में निर्वाचन आयोग के 20 सितंबर 2019 को जारी आदेश को चुनौती दी गई है. उस आदेश में तमांग की सजा अवधि यानी एक साल एक महीने को ही चुनाव लड़ने से अयोग्य रहने की अवधि बताते हुए उन्हें चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी गई. दिल्ली हाईकोर्ट सिक्किम विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष की अर्जी के इसी मुद्दे पर सुनवाई करेगा.

क्या कहता है जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 ए के मुताबिक भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम सहित किसी भी अपराध में दो या अधिक साल की सजा काटने के बाद अगले छह साल तक अपराधी व्यक्ति कोई भी चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य रहेगा लेकिन तमांग के मामले में आयोग ने ढील दी है. विपक्ष ने सवाल किया है कि क्या आयोग के अधिकार क्षेत्र में यह शक्ति है?

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