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बीजू पटनायक पर निशिकांत दुबे की टिप्पणी से विवाद, BJD बोली- उन्हें मेंटल डॉक्टर की जरूरत

बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर भाजपा नेता निशिकांत दुबे की विवादित टिप्पणी के विरोध में संसदीय समिति से इस्तीफा दे दिया. बीजद सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया और बीजेपी सांसद से माफी की मांग की.

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बीजद के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा. (Photo: X/@SansadTV)
बीजद के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा. (Photo: X/@SansadTV)

बीजू जनता दल (BJD) के सांसद सस्मित पात्रा ने संसद की कम्युनिकेशन और आईटी संबंधी स्टैंडिंग कमेटी से इस्तीफा दे दिया है. इस कमेटी की अध्यक्षता बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे करते हैं. सांसद सस्मित पात्रा ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजद संस्थापक बीजू पटनायक पर निशिकांत दुबे की एक टिप्पणी के विरोध में यह इस्तीफा दिया है. इस विवाद से परिचित सूत्रों ने बताया कि निशिकांत दुबे ने कथित तौर पर बीजू पटनायक को 'सीआईए एजेंट' कहा था, जिसके कारण यह विवाद खड़ा हुआ.

सस्मित पात्रा ने राज्यसभा चेयरमैन को अपना इस्तीफा भेजा है, जिसमें उन्होंने कहा कि वह ऐसे व्यक्ति के नेतृत्व में काम जारी नहीं रख सकते, जो बीजू पटनायक जैसे सम्मानित नेता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करे. यह विवाद कुछ दिन पहले तब शुरू हुआ जब निशिकांत दुबे ने कथित तौर पर कहा था कि 1960 के दशक में बीजू पटनायक, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के बीच कड़ी थे. उनके इस बयान के बाद संसद में हंगामा हुआ था और बीजद सांसदों ने कड़ा विरोध जताया था.

राज्यसभा में सोमवार को कार्यवाही शुरू होने के तुरंत बाद बीजद सांसद सस्मित पात्रा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बीजू पटनायक को लेकर दिया गया निशिकांत दुबे का बयान झूठा, अपमानजनक और मनगढ़ंत है. उन्होंने कहा, '​बीजेपी सांसद ने बीजू पटनायक को सीआईए एजेंट कहा है. यह बेहद शर्मनाक है. सत्ताधारी पार्टी इस हद तक गिर चुकी है. बीजद इसका कड़ा विरोध करती है और हम विरोध स्वरूप वॉकआउट कर रहे हैं.' इसके बाद बीजद के सदस्य सदन से बाहर चले गए और निशिकांत दुबे से माफी की मांग की.

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यह भी पढ़ें: BJD ने अपने 6 विधायकों को किया सस्पेंड, राज्यसभा चुनाव में की थी क्रॉस वोटिंग

नवीन पटनायक ने भी दी प्रतिक्रिया

बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक ने सोमवार को निशिकांत दुबे के 'सीआईए कनेक्शन' वाले बयान की कड़ी आलोचना की. उनके शब्दों को अपमानजनक बताते हुए ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा, 'बीजेपी सांसद को किसी मेंटल डॉक्टर की सलाह की जरूरत है.' अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए, 79 वर्षीय पटनायक ने यह भी कहा कि जब चीनी सेना ने भारत पर हमला किया था, तब वह 13 वर्ष के थे, और बीजू पटनायक ने चीनी आक्रमणकारियों को खदेड़ने के लिए हर संभव प्रयास किया था. उन्होंने कहा, 'बीजू बाबू हमले से बहुत क्रोधित थे और मुझे याद है कि उन्होंने इसे रोकने के लिए कितना कुछ किया था.'

कौन थे बीजू पटनायक?

बीजू पटनायक ओडिशा के दो बार मुख्यमंत्री (1961-63 और 1990-95) रहे. उन्हीं के नाम पर बीजू जनता दल (BJD) का नाम रखा गया है. वह राज्य के सबसे प्रभावशाली नेता रहे हैं. वह एक स्वतंत्रता सेनानी और कुशल पायलट थे. उन्होंने  1947 में इंडोनेशियाई स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं को बचाने के लिए साहसिक मिशन चलाया था. उन्होंने अपनी पत्नी ज्ञान पटनायक के साथ एक डकोटा डीसी-3 विमान को डच-नियंत्रित क्षेत्र में उड़ाया और गोलीबारी के बीच सुल्तान शाहरिर और उपराष्ट्रपति मोहम्मद हट्टा को बाहर निकाला था. 

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उनके इस योगदान के लिए इंडोनेशिया ने उन्हें ‘भूमि पुत्र’ की उपाधि दी, जो विदेशियों को बहुत कम दी जाती है. 1995 में उन्हें 'बिंतांग जासा उतमा' (इंडोनेशिया का सर्वोच्च सेवा सम्मान) सम्मान भी मिला और उन्हें इंडोनेशिया की मानद नागरिकता प्रदान की गई. 1997 में बीजू पटनायक का निधन हुआ. उसी साल उनके बेटे नवीन पटनायक ने बीजू जनता दल की स्थापना की. पार्टी पहली बार 2000 में ओडिशा की सत्ता में आई और 2024 के विधानसभा चुनावों में भाजपा से हारने से पहले 24 वर्षों तक राज्य पर शासन किया. नवीन पटनायक ओडिशा के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बने.

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