scorecardresearch
 

कम से कम 6 फीट लंबाई, हाथ में 9 फीट लंबे भाले... बेहद खास हैं राष्ट्रपति के ये अंगरक्षक

देश की राष्ट्रपति की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है. राष्ट्रपति की अंगरक्षक टुकड़ी के सभी बलिष्ठ जवान अनिवार्य रूप से कम से कम छह फुट लंबे होते हैं और ये अंगरक्षक अपने हाथों में करीब नौ फुट लंबे भाले लिए होते हैं. आइए इस रिपोर्ट में हम राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की ताकत के बारे में जानते हैं.

Advertisement
X
राष्ट्रपति के अंगरक्षक (फाइल फोटो)
राष्ट्रपति के अंगरक्षक (फाइल फोटो)

आज यानी 26 जनवरी को देश की राजधानी समेत देशभर में गणतंत्र दिवस का जश्न देखने को मिलेगा. इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू कर्तव्य पथ राजकीय समारोह में भाग लेंगी. राष्ट्रपति की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है. जिस दस्ते को इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाती है वो दस्ता भी देश का सबसे अहम दस्ता होता है. इन्हें अंगरक्षक कहा जाता है, जो हमेशा राष्ट्रपति के साथ रहते हैं और हर परेड या किसी भी समारोह में वे साथ रहते हैं.

राष्ट्रपति की अंगरक्षक टुकड़ी के सभी बलिष्ठ जवान अनिवार्य रूप से कम से कम छह फुट लंबे होते हैं और ये अंगरक्षक अपने हाथों में करीब नौ फुट लंबे भाले लिए होते हैं. इन जवानों की कदकाठी से मेल करते हुए 15.5 हाथ ऊंचे घोड़े इस रेजिमेंट में शामिल किए जाते हैं. इन शानदार घोड़ों की नस्ल रिमाउंट वेटनरी कोर द्वारा तैयार की जाती है. 

यह भी पढ़ें: UP पुलिस के जिन अफसरों ने किया था दुजाना गैंग के बदमाशों को ढेर, उन्हें मिलेगा राष्ट्रपति गैलेंट्री मेडल

वर्तमान में 44 सैन्य वेटनरी अस्पताल के कर्नल नीरज गुप्ता की कमान में इनकी देखभाल की जा रही है. इस घुड़सवार रेजिमेंट के दस्ते की धुन, सधी कदमचाल, जो दर्शकों के लिए बेशक सहज हो वास्तव में यह प्रदर्शन कई महीनों के अथक परिश्रम और निरंतर अभ्यास का सुखद परिणाम है. 

Advertisement

अंगरक्षक दो भागों में बंटे हैं

समारोहिक अंगरक्षक दो भागों में बंटे हुए हैं. राष्ट्रपति की बग्घी के आगे चलने वाली टुकड़ी और एक पीछे चल रही टुकड़ी. निशान टोली तो राष्ट्रीय ध्वज लेकर चलती है. आगे चलने वाली टुकड़ी का नेतृत्व वरदान पर सवार रिसालदार मेजर विजय सिंह करते हैं और भूरे रंग के घोड़े एलेक्जेंडर पर सवार बिगुलवादक राष्ट्रपति महोदय की बग्घी के ठीक पीछे चलते हैं. रेजिमेंटल निशान अथवा रेजिमेंटल स्टैडर्ड लेकर चल रही टुकड़ी की अगुआई 'ऐस' पर सवार रिसालदार हरमीत सिंह करते हैं.

यह भी पढ़ें: 'संविधान हमें एक परिवार की तरह पिरो कर रखता है', राष्ट्र के नाम संबोधन में बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

अश्व को सूर्यपुत्र माना जाता है

रेजिमेंट का निशान अथवा के रेजिमेंटल स्टैंडर्ड अमिगो पर सवार रिसालदार राजेंद्र सिंह के हाथ में तो पीछे चल रही टुकड़ी की कमान 'अर्जुन' पर सवार रिसालदार सतनाम सिंह के हाथों में होती. आपको इस तथ्य से भी अवगत करवाना चाहेंगे कि अश्व को सूर्यपुत्र माना जाता है जो समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए हैं.

वे हमारे समृद्ध, शानदार अतीत और संस्कृति का अभिन्न अंग हैं. महाराणा प्रताप और रानी लक्ष्मी बाई के अश्वों ने अपने सवारों का युद्ध के मैदान में पूरा साथ दिया, निष्ठा दिखाई और इतिहास में अमर हो गए. जनवरी 2025 में रेजिमेंट अपने नाम की उपाधि राष्ट्रपति के अंगरक्षक के 75 वर्ष या कहिए हीरक जयंती मना रही है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: गणतंत्र दिवस के लिए Noida ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइजरी, ये रास्ते रहेंगे बंद

खास तरह का है पहनावा 

इनकी वेशभूषा पर ध्यान दिया जाए तो सर्दियों के दौरान पारंपरिक वर्दी और साज-सज्जा में नीले और सुनहरे रंग की समारोहिक पगड़ी, लाल अंगरखे, सुनहरे कमरबंद के साथ लंबे लाल कोट, सफेद दस्ताने, सफेद ब्रीचिस, स्पर्स और ऊंचे लंबे बूट शामिल हैं. अंगरक्षकों के दाएं हाथ में धारित बल्लम-लांसेस नौ फीट और नौ इंच लंबे और हाथ से बने होते हैं. और उन पर पारंपरिक लाल और सफेद कैवेलरी रंग उत्कीर्ण होता है जो आत्मसमर्पण के बदले रक्त का प्रतीक है.

यह भी पढ़ें: 6 लेयर की सिक्योरिटी, 15 हजार जवान और AI कैमरे... गणतंत्र दिवस पर दिल्ली पुलिस ने की खास तैयारी

अंगरक्षक का लोकाचार है तथा वे इसे दाएं हाथ में वहन करते हैं. अधिकारी और जेसीओ कैवलरी किरच धारण करते हैं. अश्वों को शैबरैक्स, गले के आभूषणों और सफेद ब्रो बैंड से सजाया जाता है. इस रेजिमेंट का आदर्श वाक्य और युद्धघोष है. 'भारत माता की जय'

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement