एक बार फिर उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी वीरता के लिए इतिहास रचा है. पुलिस फोर्स व अर्ध सैनिक बलों में वीरता के लिए मिलने वाले सबसे बड़े पुरस्कार राष्ट्रपति गैलेंट्री मेडल में यूपी पुलिस के 17 बहादुरों को गैलेंट्री मेडल मिले हैं. किसी भी राज्य की पुलिस फोर्स में उत्तर प्रदेश को सर्वाधिक मेडल मिले हैं. मेडल पाने वालों में सर्वाधिक नाम गाजियाबाद में अनिल दुजाना गैंग के बिल्लू दुजाना और राकेश दुजाना एनकाउंटर करने वाली टीम का है, जिसके 7 सदस्यों को राष्ट्रपति का वीरता पदक दिया गया है.
कैसे किया था यूपी पुलिस के इन बहादुरों ने बदमाशों को ढेर
20 अप्रैल 2022 को गाजियाबाद की वेब सिटी में भारत सरकार के गृह मंत्रालय में काम करने वाले जितेंद्र सिंह और उनके दोस्त मुनेंद्र सिंह की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी. दोनों को 10-10 गोलियां मारी गई थीं. पुलिस ने जांच की तो पता चला कि इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले बिल्लू दुजाना और राकेश दुजाना हैं. दोनों की तलाश की गई और 29 मई 2022 को गाजियाबाद में पुलिस की दो टीमों ने एक ही रात में एक लाख के इनामी बिल्लू दुजाना और 50,000 के इनामी राकेश दुजाना को दो अलग-अलग एनकाउंटर में मार गिराया.
एक लाख के इनामी बिल्लू दुजाना को गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम इलाके में उस समय गाजियाबाद की एसपी क्राइम रहीं आईपीएस दीक्षा शर्मा और उनकी टीम ने मुठभेड़ में ढेर किया था. दूसरा एनकाउंटर पुलिस ने इंदिरापुरम में किया था. दोनों बदमाशों ने पुलिस पर कई राउंड फायरिंग की जिसमें डिप्टी एसपी स्वतंत्र सिंह की बुलेट प्रूफ जैकेट में 1 गोली लगी और दो पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
18 साल की उम्र में जॉइन की अनिल दुजाना की गैंग
गैंगस्टर अनिल दुजाना के गांव का ही रहने वाला बिल्लू शार्प शूटर और भाड़े पर हत्या करने वाला बदमाश था. 18 साल की उम्र में बिल्लू दुजाना, अनिल दुजाना की गैंग में शामिल हुआ. बिल्लू की महत्वाकांक्षा इतनी बड़ी थी कि वह अपने ही गैंग लीडर अनिल दुजाना से बड़ा अपराधी और माफिया बनना चाहता था. साल 2015 में बिल्लू ने अनिल दुजाना के नाम पर एक व्यापारी से रंगदारी वसूली. करोड़ों की इस रंगदारी की रकम तो पूरी आई लेकिन रंगदारी की रकम का 30 फीसदी हिस्सा खुद रख लिया. जानकारी अनिल को हुई तो उसने बिल्लू दुजाना को दूसरे गैंग मेंबर्स के सामने थप्पड़ मार दिया और तभी से बिल्लू दुजाना की अनिल दुजाना से दूरी भी बढ़ गई.
बिल्लू दुजाना एनकाउंटर में मारे जाने से पहले भी तीन बार गिरफ्तार हुआ था लेकिन अक्टूबर 2021 में जेल से छूटने के बाद वह लगातार दिल्ली और गाजियाबाद के इलाके में हत्या, लूट, रंगदारी को अंजाम दे रहा था. इसी कड़ी में बिल्लू और राकेश दुजाना ने 20 अप्रैल 2022 को मुखबिरी के शक में जितेंद्र सिंह और उनके साथी मुनेंद्र सिंह की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी. बिल्लू को शक था कि 5 साल पहले उसके भाई की हत्या में जितेंद्र सिंह का हाथ था और उसकी मुखबिरी से ही उसके भाई की हत्या हुई थी.
दूसरी गैंग्स को हथियार सप्लाई करता था राकेश दुजाना
वहीं दूसरी तरफ राकेश दुजाना भी अनिल दुजाना का शार्प शूटर और करीबी था. 15 साल की उम्र में दुजाना गैंग से जुड़कर राकेश ने फिरौती, रंगदारी की वसूली की और कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया. राकेश अपराध को अंजाम देने के साथ-साथ दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई दूसरी गैंग को असलहों की सप्लाई भी करता था. 20 अप्रैल 2022 को हुई जितेंद्र सिंह और उनके साथी की हत्या में बिल्लू दुजाना और राकेश का नाम आया था.
29 मई 2022 को जब इनका एनकाउंटर हुआ तो बिल्लू दुजाना पर एक लाख और राकेश पर 50,000 का इनाम था. दोनों पर हत्या, लूट और डकैती के 52 मुकदमे दर्ज थे. इन दोनों बदमाशों को ढेर करने वाले पुलिस अधिकारी आईपीएस दीक्षा शर्मा एसपी हमीरपुर के पद पर हैं. वहीं स्वतंत्र कुमार सिंह गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में एसीपी के पद पर तैनात हैं.