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‘मर्यादा ही लोकतंत्र की ताकत’, ओम बिरला की निष्पक्षता की PM मोदी ने की तारीफ, विपक्ष पर साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने हालिया अविश्वास प्रस्ताव पर हुई चर्चा में बिरला के धैर्य, संयम और निष्पक्षता की सराहना की. प्रधानमंत्री ने संसद को संवाद और विचार-विमर्श का पवित्र मंच बताया, जहां हर क्षेत्र की आवाज़ को उचित रिप्रेजेंटेशन मिलना चाहिए.

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संसद की गरिमा पर पीएम मोदी का पत्र - लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की संयमित भूमिका की सराहना की (File Photo: PTI)
संसद की गरिमा पर पीएम मोदी का पत्र - लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की संयमित भूमिका की सराहना की (File Photo: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा है. यह पत्र पिछले सप्ताह लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई लंबी चर्चा और उसके खारिज होने के बाद लिखा गया है. अपने पत्र में प्रधानमंत्री ने सदन की कार्यवाही के दौरान ओम बिरला द्वारा पेश किए गए धैर्य, संयम और निष्पक्षता की सराहना की है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संसद ने एक नई राजनीतिक संस्कृति को जन्म दिया है, जहां संवाद, तर्क और विचार-विमर्श को प्रायोरिटी दी जा रही है. उन्होंने यह भी साफ़ किया कि कुछ लोग वंशवादी और सामंती सोच के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं को अपने सीमित दायरे में बांध कर रखना चाहते हैं और नए नेतृत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं. संसद को उन्होंने एक पवित्र मंच बताया, जहां देश के हर क्षेत्र की आवाज़ को उचित रिप्रेजेंटेशन मिलना चाहिए.

प्रधानमंत्री के इस पत्र पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा भारत की संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं पर अटूट विश्वास रखा है. उन्होंने कहा कि यह पत्र सार्वजनिक जीवन के उच्च नैतिक मूल्य दर्शाता है.

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इसके बाद ओम बिरला ने लोकसभा में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को एक अलग पत्र भी भेजा. इसमें उन्होंने सदस्यों के अनुचित व्यवहार से संसद की गरिमा को हो रहे नुकसान पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने बैनर, पोस्टर और तख्तियों के उपयोग और भाषा की गुणवत्ता पर भी ध्यान देने की अपील की. ओम बिरला ने कहा कि संसद में हमेशा गरिमापूर्ण चर्चा और संवाद की परंपरा रही है, जिसे बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है.

स्पीकर ने सभी दलों के नेताओं से आग्रह किया कि वे अपने सांसदों के आचरण और अनुशासन पर ख़ासतौर से ध्यान दें. उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दल संसद की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखने में पूरा सहयोग देंगे. 

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