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PFI नेताओं पर चलेगा मुकदमा, अदालत ने कहा - 2047 तक भारत में इस्लामिक खिलाफत कायम करने की थी साजिश

दिल्ली की एक अदालत ने प्रतिबंधित संगठन PFI और उसके 25 नेताओं के खिलाफ UAPA और IPC की विभिन्न धाराओं में आरोप तय करने का आदेश दिया है. अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से यह गंभीर संदेह पैदा होता है कि संगठन भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को उखाड़कर 2047 तक शरिया आधारित इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की साजिश में शामिल था.

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अदालत ने PFI और उसके शीर्ष पदाधिकारियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया है (File Photo: ITG)
अदालत ने PFI और उसके शीर्ष पदाधिकारियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया है (File Photo: ITG)

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को PFI यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के 25 बड़े नेताओं के खिलाफ चार्ज फ्रेम करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि इन लोगों ने मिलकर भारत की लोकतांत्रिक सरकार को गिराने और 2047 तक देश में इस्लामिक कैलिफेट यानी शरिया कानून पर चलने वाली सत्ता कायम करने की साजिश रची.

PFI एक संगठन है जिसे सरकार ने 2022 में बैन कर दिया था. सरकार का कहना था कि इसके ISIS जैसे आतंकी संगठनों से संबंध हैं. इस पर UAPA के तहत पांच साल का बैन लगाया गया था.

NIA का केस कैसे शुरू हुआ?

अप्रैल 2022 में NIA ने इस मामले में FIR दर्ज की. जांच के बाद NIA ने 26 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट और एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की. इनमें PFI संगठन को भी आरोपी बनाया गया. मार्च और अप्रैल 2023 में कोर्ट ने इन चार्जशीट को माना और केस आगे बढ़ा.

NIA ने क्या आरोप लगाए?

दिसंबर 2024 में NIA के वकील राहुल त्यागी ने कोर्ट को बताया था कि PFI के नेता पड़ोसी देशों से हथियार लाने की कोशिश कर रहे थे और अपने कार्यकर्ताओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहे थे.

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कोर्ट ने क्या कहा?

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत देखने पर यह 'गंभीर संदेह' पैदा होता है कि आरोपियों ने मिलकर एक साजिश रची. इस साजिश का मकसद था - भारत की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार को हटाना. 2047 तक सशस्त्र संघर्ष यानी हिंसक लड़ाई के ज़रिए भारत में शरिया कानून पर चलने वाला इस्लामिक राज कायम करना. जज ने यह भी कहा कि हर आरोपी का रोल इस एक बड़ी साजिश के किसी न किसी हिस्से में फिट बैठता है.

PFI पर भी चार्ज क्यों?

आमतौर पर चार्ज सिर्फ लोगों पर लगते हैं. लेकिन कोर्ट ने PFI संगठन पर भी चार्ज फ्रेम करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि PFI कानून की नजर में यह एक ऐसी इकाई है जो खुद अपराध कर सकती है.

यह भी पढ़ें: 'वो पंक्चर जोड़ने वाला PFI का एजेंट है...', मोनालिसा के घर पहुंचे सनोज मिश्रा, बोले- CM मोहन यादव को बताऊंगा पूरा मामला

NEC और ऑफिस बेयरर्स की भूमिका

कोर्ट ने PFI की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद यानी NEC और उसके पदाधिकारियों के बारे में कहा कि ये ही PFI की "सोचने और फैसला लेने वाली ताकत" हैं. जो फैसले NEC की बैठकों में लिए गए, जैसे हिंदू नेताओं को निशाना बनाना और ISIS को समर्थन देना, वो इन नेताओं के निजी काम नहीं थे बल्कि खुद PFI के काम थे.

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किन धाराओं में चार्ज लगे?

कोर्ट ने IPC और UAPA दोनों के तहत चार्ज फ्रेम करने का आदेश दिया. इनमें शामिल हैं:

UAPA की धारा 18: आतंकी साजिश.
UAPA की धारा 18B: आतंकी कार्रवाई के लिए लोगों की भर्ती.
अलग-अलग समुदायों के बीच नफरत फैलाना.
सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश या उसमें मदद करना.
ऐसे इरादे से हथियार इकट्ठा करना.

कौन-कौन से नेता आरोपी हैं?

जिन बड़े नेताओं पर चार्ज फ्रेम होंगे उनमें शामिल हैं:

ओ.एम.ए. सलाम, PFI के डायरेक्टरी.
ई.एम. अब्दुल रहीमन, वाइस डायरेक्टरी.
अनीस अहमद, जनरल सेक्रेटरी.
अफसर पाशा, सेक्रेटरी.
ई. अबूबकर, फाउंडर डायरेक्टरी.

अब आगे क्या?

कोर्ट ने 10 जुलाई की तारीख तय की है जब इन सभी के खिलाफ औपचारिक रूप से चार्ज फ्रेम किए जाएंगे.

इनपुट: पीटीआई

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