विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता. पासपोर्ट सेवा दिवस पर आई इस सफाई के बाद अब नागरिकता साबित करने वाले असली दस्तावेजों को लेकर स्थिति समझनी जरूरी है. सवाल यही है कि जब पासपोर्ट सिर्फ भारतीय नागरिक को मिलता है, तो फिर इसे नागरिकता का पक्का प्रमाण क्यों नहीं माना जाता.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पासपोर्ट का मूल काम विदेश यात्रा को आसान बनाना है. यानी यह एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, नागरिकता तय करने वाला दस्तावेज नहीं. सिर्फ पासपोर्ट होना अपने आप में नागरिकता का कानूनी प्रमाण नहीं बन जाता. इसी के साथ यह बात भी साफ की गई है कि पासपोर्ट किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं होता. यह भारत सरकार की संपत्ति माना जाता है, जिसे जरूरत पड़ने पर सरकार कभी भी वापस ले सकती है.
फिर नागरिकता का असली सबूत क्या है?
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि आधार कार्ड नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं है, वह सिर्फ पहचान का एक जरिया है. वोटर आईडी भी नागरिकता साबित करने वाला कागज नहीं माना जाता. उसका इस्तेमाल पहचान, पते और मतदान के लिए होता है. ऐसे में नागरिकता का पूरा मामला सीधे नागरिकता कानून के दायरे में आता है, जहां जन्म, माता-पिता की नागरिकता के आधार पर फैसला होता है.
जानिए क्या कहता है नागरिकता का कानून
कानून के मुताबिक 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच देश में जन्म लेने वाला व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक माना जाता है. इसके बाद 1 जुलाई 1987 के बाद जन्म लेने वालों के लिए शर्त यह है कि माता या पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक हो. वहीं 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वालों के मामले में नियम और सख्त हो गए. अब नागरिकता तभी मिलेगी जब दोनों माता-पिता भारतीय हों, या एक भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो.
विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवा दिवस पर अपनी सेवाओं के विस्तार के आंकड़े भी जारी किए. साल 2025 में करीब 1.5 करोड़ पासपोर्ट, उससे जुड़ी सेवाएं लोगों को दी गईं. इसमें सिर्फ पासपोर्ट की संख्या 1.39 करोड़ रही. सरकार ने बताया कि अब पासपोर्ट बनने की प्रक्रिया काफी तेज हुई है. अगर पुलिस वेरिफिकेशन का समय छोड़ दें, तो पासपोर्ट महज छह कार्य दिवस में जारी हो रहा है.
पिछले दस साल में पासपोर्ट सेवा केंद्रों का नेटवर्क काफी बड़ा हुआ है. जहां एक दशक पहले देश में सिर्फ 77 पासपोर्ट केंद्र थे, वहीं अब इनकी संख्या 545 तक पहुंच गई है. सरकार का दावा है कि केंद्रों की संख्या बढ़ने से लोगों का इंतजार कम हुआ है. अब पासपोर्ट सेवा केंद्रों पर काम होने का औसत समय 45 मिनट से नीचे आ गया है. इसके अलावा चिप वाले ई-पासपोर्ट के विस्तार को भी बड़ी उपलब्धि बताया गया है.