भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के दौरान हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना पाकिस्तान पर समुद्र से हमला करने से महज कुछ मिनट दूर थी, लेकिन तभी पाकिस्तान की ओर से काइनेटिक एक्शन यानी सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया गया.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मुंबई में आयोजित नेवल इन्वेस्टिचर समारोह के दौरान एडमिरल त्रिपाठी ने यह जानकारी दी. इस मौके पर उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में उत्कृष्ट सेवा देने वाले दो वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों को ‘युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित भी किया.
गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शुरुआत पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हुई थी. 6-7 मई की रात भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक एयर स्ट्राइक की थी. इस कार्रवाई का उद्देश्य आतंकियों के लॉन्चपैड और हथियारों के भंडार को नष्ट करना था.
भारत की इस सख्त कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने भी जवाबी हमले की कोशिश की. उसने भारतीय सैन्य ठिकानों और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारत के मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम ने उसके हमलों को नाकाम कर दिया. इसके बाद भारतीय सुरक्षाबलों ने भी पलटवार करते हुए कई आतंकी ठिकानों और पाकिस्तानी एयरबेसों को भारी नुकसान पहुंचाया.
नौसेना प्रमुख के मुताबिक, इस पूरे ऑपरेशन के दौरान भारतीय नौसेना पूरी तरह अलर्ट पर थी और समुद्री मोर्चे से कार्रवाई के लिए तैयार थी. उनका बयान इस बात का संकेत देता है कि अगर हालात और बिगड़ते, तो भारत तीनों सेनाओं के समन्वय से बड़ा सैन्य अभियान चला सकता था.
इसके अलावा एडमिरल त्रिपाठी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच तनाव के कारण 20 से अधिक व्यापारी जहाजों पर हमले हो चुके हैं. करीब 1900 जहाज इस संघर्ष के चलते फंसे हुए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि इस संकट का असर वैश्विक समुद्री व्यापार पर साफ दिख रहा है. पहले जहां रोजाना करीब 130 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर सिर्फ 6-7 रह गई है.