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ओडिशा: 1980 से अपनी पहचान छिपकर रह रहे थे बांग्लादेशी नागरिक, अब किए गए डिपोर्ट

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिला प्रशासन, FRRO, पुलिस, IB और BSF के संयुक्त अभियान में तीन अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट किया है. प्रशासन ने बताया कि ये लोग दशकों से स्थानीय लोगों के बीच रह रहे थे. प्रशासन ने घर-घर जाकर दस्तावेजों की जांच की और विदेशी नागरिकों की पहचान की. डिपोर्टेशन प्रक्रिया के तहत तीनों को जेल में रखा गया, स्वास्थ्य जांच कराई गई और बीएसएफ के माध्यम से बांग्लादेश सरकार को सौंपा गया.

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तीन बांग्लादेशी डिपोर्ट. (Pholto: Representational)
तीन बांग्लादेशी डिपोर्ट. (Pholto: Representational)

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में प्रशासन ने अवैध विदेशी नागरिकों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. जिला प्रशासन ने विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) के साथ मिलकर तीन बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट कर दिया है. प्रशासन ने बताया ये लोग कई दशकों से अपनी पहचान छिपाकर स्थानीय लोगों के साथ यहां अवैध रूप से रह रहे थे .

जिला प्रशासन ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रपाड़ा से तीन बांग्लादेशी नागरिकों को उनके मूल देश वापस भेज दिया गया है. ये तीनों भाई-बहन कई दशकों से यहां अवैध रूप से रह रहे थे और स्थानीय लोगों के बीच मजदूरी व छोटे-मोटे काम करके गुजारा कर रहे थे. स्थानीय प्रशासन, विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ), ओडिशा पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के संयुक्त विशेष अभियान के दौरान इनकी पहचान अवैध घुसपैठियों के रूप में हुई थी.

प्रशासन ने बताया कि डिपोर्ट किए गए व्यक्तियों की पहचान 65 वर्षीय मुन्ताज खान, 59 वर्षीय इंसान खान और 70 वर्षीय अमीना बीबी के रूप में हुई है. ये तीनों भाई-बहन हैं और मूल रूप से बांग्लादेश के नागरिक थे. परिवार में कुल नौ सदस्य थे, लेकिन अब केवल कुछ ही बचे हैं. मुन्ताज खान और इंसान खान केंद्रपाड़ा सदर ब्लॉक के कपलेश्वर पंचायत अंतर्गत गरापुर बस्ती में रहते थे, जबकि उनकी बहन अमीना बीबी जंबू मरीन पुलिस स्टेशन क्षेत्र के अरुण नगर में रह रही थीं.

घर तलाशी से खुलासा राज

प्रशासन के अनुसार, हाल के महीनों विशेष रूप से नवंबर और दिसंबर 2025 में केंद्रपाड़ा जिला प्रशासन ने अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए घर-घर जाकर दस्तावेजों की जांच का अभियान चलाया था. जांच के दौरान इन तीनों के पास कोई वैध भारतीय पहचान पत्र नहीं मिला. उनके पास केवल पुराने बांग्लादेशी पहचान पत्र और कुछ स्थानीय प्रमाण-पत्र थे जो भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे.

प्रशासन को जांच में पता चला कि ये लोग 1980 के दशक में बांग्लादेश से ओडिशा आए थे और समय के साथ यहां बस गए थे, लेकिन नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की.

जांच के बाद FRRO और विदेश मंत्रालय के निर्देश पर इन्हें डिपोर्ट करने का फैसला लिया गया. डिपोर्टेशन प्रक्रिया के तहत पहले तीनों को केंद्रपाड़ा जेल में रखा गया, उनकी स्वास्थ्य जांच कराई गई और फिर बीएसएफ के माध्यम से बांग्लादेश सरकार को सौंप दिया गया. वे ढाका पहुंचाए गए, जहां उन्हें बांग्लादेशी अधिकारियों के हवाले कर दिया गया.

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आगे भी जारी रहेगा ऑपरेशन

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन जिले में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन का अभियान आगे भी चलाता रहेगा, ताकि कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था दोनों मजबूत रह सकें.

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