मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के पेपर लीक मामले में एक और बड़ा एक्शन हुआ है. पुणे पुलिस ने इस मामले में संलिप्तता के शक में एक महिला को हिरासत में लिया है. प्राथमिक पूछताछ के बाद पुलिस ने उस महिला को आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने बुधवार को जानकारी देते हुए बताया कि महिला को शहर के बिबवेवाड़ी इलाके से हिरासत में लिया गया. प्रारंभिक पूछताछ के बाद उसे आगे की जांच के लिए सीबीआई के हवाले कर दिया गया. हालांकि पुलिस ने महिला की पहचान सार्वजनिक नहीं की है और न ही यह स्पष्ट किया है कि पेपर लीक मामले में उसकी क्या भूमिका थी.
पुलिस आयुक्त ने कहा कि मामले की जांच संवेदनशील है, इसलिए फिलहाल अधिक जानकारी साझा नहीं की जा सकती. सीबीआई अब महिला से पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि प्रश्नपत्र लीक होने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और यह नेटवर्क कितना बड़ा है.
गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है. इस परीक्षा के जरिए एमबीबीएस, बीडीएस और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया जाता है. इस वर्ष परीक्षा का आयोजन 3 मई को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा कराया गया था, जिसमें देश के 22 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया.
परीक्षा रद्द होने से देशभर के 22 लाख से अधिक छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है. छात्र अब नई परीक्षा तिथि, एडमिट कार्ड, परीक्षा केंद्र और काउंसलिंग प्रक्रिया को लेकर असमंजस में हैं. कई अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने परीक्षा की तैयारी के लिए महीनों मेहनत की थी, लेकिन पेपर लीक की घटनाओं ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है.
ऐसे हुआ पेपर लीक मामले का खुलासा
बता दें कि 8 मई की रात करीब 8 बजे इंटेलिजेंस ब्यूरो से राजस्थान SOG को नीट पेपर लीक की आशंका से जुड़ा इनपुट मिला. इसके बाद रात 9 बजे से लेकर करीब 12 बजे तक एसओजी अधिकारियों ने ओरिजिनल नीट पेपर डाउनलोड कर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे सवालों से उसका मिलान किया.
जांच में बायोलॉजी और केमिस्ट्री के कई सवाल हूबहू मैच मिले. इसके बाद शक और गहरा गया. SOG ने करीब 80 स्टूडेंट्स समेत 150 से ज्यादा लोगों से बातचीत कर पेपर लीक की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं. जब 135 सवाल और उनके ऑप्शन तक मेल खाते मिले तो मामला लगभग साफ हो गया. रात 12 बजे के बाद SOG ने सीकर पुलिस की मदद से संदिग्ध लोगों से पूछताछ शुरू करवाई.
जांच में सामने आया कि पेपर सीकर में संचालित आरके कंसल्टेंसी से वायरल हुआ था. जब संचालक की लोकेशन ट्रेस की गई तो वह देहरादून में मिला. SOG ने तुरंत देहरादून पुलिस से संपर्क कर पूछताछ करवाई. वीडियो कॉल और फोन पर हुई पूछताछ में उसने 3-4 छात्रों के नाम बताए, जिनसे SOG ने तुरंत पूछताछ शुरू कर दी.
इसके कुछ ही घंटों में पेपर लीक का पूरा नेटवर्क बेनकाब हो गया. जांच ने सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, गुरुग्राम, देहरादून, नासिक और यहां तक कि केरल तक जुड़े तारों को सामने ला दिया. लगातार पूछताछ, डिजिटल ट्रैकिंग और रातभर चली पड़ताल के बाद आखिरकार पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ. इसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई.
राजस्थान पुलिस ने मंगलवार को विक्रम यादव, योगेश प्रजापत, संदीप हरितवाल, नीतेश अजमेरा, मांगीलाल, उसके बेटे विकास, भाई दिनेश, यश यादव और सत्यनारायण चौधरी समेत कई आरोपियों को CBI के सुपुर्द कर दिया. वहीं सीकर से विक्रम कुमार यादव, राकेश कुमार मंडावरिया, रजत कुमार, अमित मीणा और रोहित मावलिया को भी जांच एजेंसी के हवाले किया गया.