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नवजोत सिंह सिद्धू फिर विवादों में फंसे, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुंह से निकली गाली

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवजोत सिंह सिद्धू चरणजीत सिंह चन्नी सरकार की योजनाओं के बारे में बता रहे थे. लेबर कार्ड के बारे में सवाल पूछे जाने पर वे चन्नी सरकार की स्कीम के बारे में बताने लगे और बातो-बातों में गाली दे बैठे.

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चन्नी सरकार की योजनाओं के बारे में बता रहे थे सिद्धू
चन्नी सरकार की योजनाओं के बारे में बता रहे थे सिद्धू
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पंजाब कांग्रेस भवन में कर रहे थे प्रेस कॉन्फ़्रेंस
  • चन्नी सरकार की स्कीम के बारे में बताते हुए दी गाली

नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं. पंजाब कांग्रेस भवन में नवजोत सिंह सिद्धू एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे, जिसमें वह चरणजीत सिंह चन्नी सरकार की योजनाओं के बारे में बता रहे थे. इस कॉन्फ्रेंस में पत्रकार सवाल-जवाब कर रहे थे. जब उनसे राज्य सरकार द्वारा बांटे जा रहे लेबर कार्ड के बारे में सवाल पूछा गया, तो वे चन्नी सरकार की स्कीम के बारे में बताने लगे और बातों-बातों में गाली दे बैठे.

सिद्धू ने कहा, 'मैं यह कह रहा हूं कि हमारी स्कीम वो नहीं है...हमारी जो अर्बन गारंटी है किसी ने दी है गारंटी...@#$@@@..' और बात को जारी रखा. समाचार एजेंसी एएनआई ने इस मामले का वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है.

 

पंजाब में शहरी बेरोज़गारी गांवों से ज़्यादा है

नवजोत सिद्धू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शहरों में बसने वाले मज़दूरों के पास नौकरियां नहीं हैं. पंजाब में शहरी बेरोज़गारी गांवों से ज़्यादा है. गांव के मुकाबले शहरों में बेरोज़गारी दोगुनी है. उन्होंने कहा कि पंजाब मॉडल शहरी रोज़गार का वादा करता है लोगों को नौकरी की गारंटी देता है, यहां तक की गैर कुशल लोगों को भी नौकरी की गारंटी है.

पंजाब में मज़दूरों का 1% रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ

नवजोत सिद्धू ने कहा कि पंजाब में मज़दूरों का 1% रजिस्ट्रेशन तक नहीं हुआ है. जब सरकार को पता ही नहीं है कि ज़रूरत किसे है, गरीब कौन है, तो वो फायदा किसे देगी और कैसे देगी. आज तक कोई सर्वे ही नहीं किया गया है, तो फिर कैसे पता चलेगा कि गरीब कौन है.

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महंगाई ने मज़दूरों की कमर तोड़ दी 

उन्होंने कहा कि गैस के सिलेंडर की कीमत दोगुनी हो गई है. पेट्रोल डीज़ल की कीमत दोगुनी, घर में खाने वाले तेल की कीमत डबल, दाल की कीमत डेढ़ गुनी हो गई. जब ये कीमत दोगुनी होती है तो बड़े लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन जब कोई 250-300 रुपए कमाने वाला मज़दूर टमाटर-प्याज लेने जाता है, तो उसके 250-300 की कीमत 100 रह जाती है.

जो लोग काम एक कर रहे हैं उनकी देहाड़ी तो एक होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार मजदूरी फिक्स करेगी. उन्होंने सोशल सिक्योरिटी ऑफ लेबर पर जोर देते हुए कहा कि हम और आप बीमार होते हैं तो आपकी तनख्वाह नहीं कटती, लेकिन इन मज़दूरों का क्या.

फिलहाल सरकार की योजनाएं बताते बताते सिद्धू अपनी ही बातों में एक बार फिर घिरते नजर आ रहे हैं. 


 

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