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फैक्ट चेक: श्रीगंगानगर गैंगरेप की शिकार लड़की की हर जगह दिखने वाली फोटो झूठी है

अगर आप 'श्रीगंगानगर गैंगरेप कांड' गूगल पर सर्च करेंगे तो आपको हर जगह पीड़िता की एक फोटो दिखेगी. कैंडल मार्च और शोक सभाओं में गुलाबी शर्ट पहने हुए एक बच्ची की माला चढ़ी फोटो खूब इस्तेमाल हो रही है. लेकिन न तो श्रीगंगानगर वाली लड़की की मौत हुई है और न ही वायरल फोटो वाली लड़की का इस घटना से कोई लेना-देना है.

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अर्पिता ने कहा, अपनी गुड़िया के नाम के साथ 'दुष्कर्म' जैसे शब्दों को देख-देखकर हम थक गए हैं. (Photo: ITG)
अर्पिता ने कहा, अपनी गुड़िया के नाम के साथ 'दुष्कर्म' जैसे शब्दों को देख-देखकर हम थक गए हैं. (Photo: ITG)

राजस्थान के श्रीगंगानगर से यूपी के फिरोजाबाद की दूरी 700 किलोमीटर है. लेकिन 13 साल की एक लड़की की मौत से जुड़ी एक झूठी कहानी ने ये फासला पल भर में कैसे तय कर लिया, ये जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

श्रीगंगानगर में एक बच्ची के साथ कई दिनों तक  गैंगरेप की दिल दहला देने वाली कहानी किसको नहीं पता. नोएडा में रहने वाली अर्पिता इसी कांड से जुड़ी एक खबर सोशल मीडिया पर देख रही थी. पोस्ट में लिखा था कि उस लड़की की अस्पताल में मौत हो गई. साथ में लड़की की फोटो भी लगी थी. लेकिन इस फोटो को देख कर अर्पिता सन्न रह गयी. 

फ्रेम करायी हुई फोटो में, गुलाबी शर्ट पहने जिस मुस्कराती हुए बच्ची को माला पहने हुए दिखाया गया था, वो उसकी छोटी बहन अंशु थी. फिरोजाबाद के  नगला रामा गांव में एक किराना दुकान चलाने वाले राजकुमार बघेल की सबसे छोटी बेटी अंशू बघेल.

अर्पिता ने ध्यान से देखा, ये तो वही फोटो है जिसे उसके पापा ने अपनी बेटी को याद करते हुए व्हाट्सऐप पर अपनी डीपी में लगा रखा है.

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आजतक फैक्ट चेक से बात करते हुए अर्पिता ने बताया कि ये देख कर उसकी आंखों में आंसू आ गए कि उसकी छोटी बहन की फोटो को लोग एक गैंगरेप की घटना से जोड़कर इस तरह शेयर कर हैं. तमाम विरोध प्रदर्शनों, कैंडल मार्च से लेकर शोक सभा तक, हर जगह उसकी बहन की फोटो को धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं. बिना इस बात की परवाह किए कि उनका श्रीगंगानगर की घटना से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है.

Fact check

अर्पिता ने कहा, अपनी गुड़िया के नाम के साथ 'दुष्कर्म' और 'गैंगरेप' जैसे शब्दों को देख-देखकर हम थक गए हैं. समझ में नहीं आ रहा कि ये सब कैसे रुकेगा. मैंने कई वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर इस बारे में बताया भी. लेकिन हमारी कौन सुनता है.

अर्पिता ने अंशू की परिवार के साथ यादगार पलों की तस्वीरें भी हमें भेजीं. 

अपने माता-पिता के साथ अंशू बघेल
अपने माता-पिता के साथ अंशू बघेल

चली गई घर की रौनक 

अर्पिता कहती हैं कि अंशू के जाने से मानो उनके घर की रौनक ही चली गई है. मौत से ठीक एक दिन पहले तो तीनों बहनें डांस करते हुए रील बना रही थीं. जसराना के शिवोम पब्लिक स्कूल में आठवीं क्लास की छात्रा अंशू पढ़ाई में काफी अच्छी थी और हाल ही में उसने एक राइटिंग कॉम्पिटिशन में ईनाम भी जीता था.  

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दिल्ली में यूपीएससी की तैयारी कर रहे अंशू के चचेरे भाई प्रियांशु ने बताया कि वो भी अपनी बहन की फोटो गलत तरह से शेयर होने से काफी परेशान हैं. 'अंशू जब भी मुझसे मिलती थी तो कहती थी कि वो आई बी यानी इंटेलिजेंस ब्यूरो जॉइन करना चाहती है क्योंकि उसे ये काम काफी दिलचस्प और रोमांचक लगता था. हमारा परिवार इस दुख से उबरने की कोशिश कर रहा है लेकिन लोग बस कुछ लाइक्स और शेयर्स के लिए उसे गैंगरेप पीड़िता बता रहे हैं.'    

फोटो बनी लाइक-शेयर कमाने का जरिया

'सेक्शन 375' और 'सफेद' जैसी फिल्मों में काम कर चुकी एक्ट्रेस मीरा चोपड़ा सहित सैकड़ों सोशल मीडिया यूजर्स ने अंशू को श्रीगंगानगर की पीड़िता बता दिया. एक्स से लेकर फेसबुक और इंस्टाग्राम तक हर जगह ऐसे पोस्ट्स की भरमार है. यहां तक दूसरे देशों के लोग भी इसे जमकर शेयर कर रहे हैं. एक कोरियाई एक्स यूजर ने भी अंशू की फोटो को श्रीगंगानगर की पीड़िता की तस्वीर बताकर शेयर किया और देखते ही देखते इस पर तीन मिलियन व्यूज आ गए.

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कुछ लोगों ने तो एआई से तस्वीर को मनमाने तरीके से एडिट करने में भी गुरेज नहीं किया. 

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यहां ये बताना बेहद जरूरी है कि श्रीगंगानगर में जिस बच्ची के साथ ये अपराध हुआ है वो जिंदा है और उसकी हालत ठीक हो रही है. श्रीगंगानगर की पुलिस ने हमें बताया कि उसकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी गई है और वो अपने परिवार के पास सुरक्षित है.

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श्रीगंगानगर और फिरोजाबाद, दोनों लड़कियों की कहानी दुखद है. लेकिन सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज बढ़ाने की रेस में लगे लोगों के लिए इन परिवारों के दुख का शायद कोई मोल नहीं है.

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इनपुट: सुधीर शर्मा
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