लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) के नतीजे आने के बाद केंद्र में एक बाार फिर से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का गठन हो चुका है. प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही उनके कैबिनेट के सभी मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह भी संपन्न हो गया. सोमवार शाम को एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ होने के एक दिन बाद मंत्रिपरिषद के विभागों का ऐलान किया गया.
नए मंत्रिमंडल में खास बात यह है कि पिछली बार की तुलना में इस बार मंत्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. इसके पीछे की एक वजह बीजेपी को कम लोकसभा सीटें मिलना भी है. मोदी 3.0 में कुल 72 मंत्रियों ने शपथ ली है. गृह, रक्षा और विदेश जैसे कई अहम मंत्रालयों में बदलवा नहीं देखने को मिला है जबकि पिछले कार्यकाल में मंत्री बने कुछ चेहरे इस बार नहीं नजर आए.
ऐसे में आइए जानते हैं कि रोटी, कपड़ा, मकान और शिक्षा-स्वास्थ्य से जु़ड़े मूलभूत मंत्रालयों की जिम्मेदारी किन राजनेताओं को सौंपी गई है.
कृषि मंत्रालय
नरेंद्र मोदी ने मंत्रिमंडल में शामिल किए गए पूर्व मुख्यमंत्रियों के अनुभव और क्षेत्र विशेषज्ञता का फायदा उठाया है. इसमें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम सबसे आगे आता है. उन्हें एमपी के कृषि क्षेत्र में परिवर्तन का श्रेय दिया जाता है. शिवराज सिंह चौहान को केंद्रीय कृषि मंत्री बनाया गया है. कृषि चुनौतियों और कृषि कानूनों को निरस्त करने के बाद रुके हुए सुधारों को दूर करने की कोशिशों को नए सिरे से गति देने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान का कार्यकाल विशेष रूप से महिलाओं के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए जाना जाता है, जैसे कि लाडली बहना योजना, जिसमें गरीब परिवारों की महिलाओं को 1,250 रुपये देने का प्रावधान है.
2005 से दिसंबर 2023 तक मध्य प्रदेश के सीएम रहने के बाद, शिवराज सिंह चौहान ने नवंबर 2023 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को एक और शानदार जीत दिलाई. हालांकि, तब बीजेपी नेतृत्व ने आश्चर्यजनक रूप से उनकी जगह उज्जैन के विधायक मोहन यादव को सीएम बना दिया. 24 अप्रैल 2024 को हरदा में एक चुनावी रैली के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान को दिल्ली ले जाया जाएगा और अब वो केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं.
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आवास एवं शहरी मामले और ऊर्जा मंत्रालय
हरियाणा के दो बार के सीएम मनोहर लाल खट्टर को आवास और शहरी मामले मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है. वो स्मार्ट सिटी फ्लैगशिप प्रोग्राम के प्रभारी होंगे. खट्टर को इसके साथ ही ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार भी सौंपा गया है. 70 वर्षीय खट्टर 12 मार्च तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे, उसके बाद नायब सिंह सैनी ने उनकी जगह ली. हाल ही में उन्होंने करनाल निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ा और 2,32,577 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की.
खट्टर 1977 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) में शामिल हुए और 1980 में पूर्णकालिक प्रचारक बन गए. 1994 में बीजेपी में शामिल होने से पहले उन्होंने चौदह साल तक इस पद पर काम किया. उन्होंने 2014 में चुनावी पारी की शुरुआत की और करनाल निर्वाचन क्षेत्र से हरियाणा विधानसभा के लिए चुने गए. उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनावों के लिए बीजेपी की हरियाणा चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया. कृषि बैकग्राउंड से आने वाले उनके परिवार ने विभाजन के बाद पाकिस्तान से हरियाणा में प्रवेश किया. उनका परिवार हरियाणा के रोहतक जिले के निंदाना गांव में बस गया. खट्टर का जन्म 1954 में निंदाना में हुआ था.
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कपड़ा मंत्रालय
बिहार के बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र से बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार में नए कपड़ा मंत्री बनाए गए हैं. इससे पहले वे बिहार सरकार में सहकारिता, पशुपालन और मत्स्य संसाधन विकास मंत्री रह चुके हैं. मोदी के पहले कार्यकाल में वे सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के पद पर कार्यरत थे.
मई 2019 में गिरिराज पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री बने. जुलाई 2021 में वे कैबिनेट फेरबदल के बाद ग्रामीण विकास मंत्री और पंचायती राज मंत्री बने. गिरिराज सिंह, नरेंद्र मोदी के प्रबल समर्थक और हार्डकोर हिंदुत्व लाइन के नेता माने जाते हैं. राजनीति में अपने शुरूआती दौर से ही वो बीजेपी के कैडर कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहे हैं. पार्टी ने उन्हें 2002 में बिहार विधान परिषद का सदस्य बनाया था. 2008 से 2010 तक नीतीश कैबिनेट में सहकारिता मंत्री रह चुके हैं.
शिक्षा मंत्रालय
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नई सरकार में धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री बने रहेंगे. 54 वर्षीय राजनेता धर्मेंद्र प्रधान, नरेंद्र मोदी के पिछले दो कार्यकालों में केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं. उन्होंने पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, शिक्षा और कौशल विकास जैसे प्रमुख विभागों को संभाला है. उन्हें ओडिशा में बीजेपी का एक प्रमुख चेहरा माना जाता है. धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के सफल कार्यान्वयन का श्रेय दिया जाता है.
पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रधान के बेटे धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ खास संबंधों के लिए जाने जाते हैं. भुवनेश्वर में उत्कल विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त करने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता के रूप में अपना सियासी सफर शुरू किया था.
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ओडिशा के अंगुल जिले के तालचेर से ताल्लुक रखने वाले धर्मेंद्र प्रधान पहली बार 2000 में पल्लाहारा विधानसभा सीट से राज्य विधानसभा के लिए चुने गए थे और 2004 में तत्कालीन देवगढ़ संसदीय क्षेत्र से लोकसभा में गए थे. 2019 में, जब बीजेडी के साथ गठबंधन खत्म होने के बाद बीजेपी ने ओडिशा में अपने दम पर विधानसभा चुनाव लड़ा, तो धर्मेंद्र ने फिर से पल्लाहारा से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्हें दो बार राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया.
धर्मेंद्र प्रधान ने बिहार में बीजेपी के चुनाव प्रभारी और कर्नाटक, उत्तराखंड, झारखंड और ओडिशा में पार्टी मामलों के प्रभारी के रूप में भी काम किया है. 15 साल बाद 2024 में ओडिशा में चुनावी राजनीति में वापसी करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने पार्टी में तीसरे नंबर पर काबिज बीजेडी के संगठन सचिव प्रणब प्रकाश दास को 1.19 लाख वोटों से हराया और सांसद बने.
स्वास्थ्य मंत्रालय
भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख जेपी नड्डा को स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रभार दिया गया है. इससे पहले जेपी नड्डा पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में भी स्वास्थ्य मंत्री थे. स्वास्थ्य के साथ ही नड्डा को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी गई है.
जगत प्रकाश नड्डा पेशे से एक वकील भी रहे हैं. नड्डा, हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य और भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड सचिव रह चुके हैं. पहले वह हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री भी थे.
जेपी नड्डा का जन्म 2 दिसंबर 1960 को बिहार की राजधानी पटना में हुआ था. उनके पिता नारायण लाल नड्डा और मां कृष्ण नड्डा थीं. वह एक ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं. जेपी नड्डा की शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल, पटना में हुई है. इसके बाद उन्होंने बी.ए. पटना कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय से भी पढ़ाई की.
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जेपी नड्डा पहली बार 1993 और 1998 के चुनाव में बिलासपुर से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए थे. अपने पहले कार्यकाल के दौरान, उन्होंने 1994 से 1998 तक हिमाचल प्रदेश विधान सभा में अपने पार्टी समूह के नेता के रूप में कार्य किया. वह अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और संसदीय मामलों के मंत्री थे.
हिमाचल में प्रेम कुमार धूमल की सरकार बनने के बाद, नड्डा ने 2008 से 2010 तक वन, पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए जिम्मेदार कैबिनेट मंत्री के रूप में नड्डा को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया. 2012 में भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा के लिए चुने गए. 2014 में, कैबिनेट फेरबदल के दौरान, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नड्डा को स्वास्थ्य मंत्री बनाया.