संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन राज्यसभा में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला. पेपर लीक मामले और राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपों को लेकर विपक्षी सदस्यों ने सदन में भारी नारेबाजी की है. इस हंगामे के कारण उच्च सदन की कार्यवाही मंगलवार को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई. संसद के पहले ही दिन सुबह की कार्यवाही के दौरान ऊपरी सदन को छह बार स्थगित करना पड़ा.
सदन की शुरुआत नए चुने गए सदस्यों के शपथ ग्रहण और श्रद्धांजलि देने के साथ हुई. इसके तुरंत बाद जैसे ही पेपर पेश किए गए, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे पेपर लीक का मुद्दा उठाने के लिए खड़े हो गए. उन्होंने कहा कि यह विषय देश के लाखों छात्रों के भविष्य से सीधा जुड़ा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज को दबाने के लिए उन पर लाठीचार्ज कर रही है.
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, "यदि आपको परीक्षा संचालन नहीं आता, तो सिंहासन खाली करो, जनता आएगी. ये लोग सत्ता में रहने के लायक ही नहीं हैं." उन्होंने जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हजारों छात्र जुटे हैं, जिन पर लाठीचार्ज किया गया है. सरकार बल का इस्तेमाल करके छात्रों को भगाने और इस पूरे घोटाले को दबाने की कोशिश में जुटी है.
उन्होंने अयोध्या राम मंदिर का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि भगवान के नाम पर चंदा चोरी हुई है. रामभक्त के नाम पर जनता से पैसे चुराए जा रहे हैं. उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पूरे मामले की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने ही इस ट्रस्ट का निर्माण कराया है. दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिया.
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को बच्चों पर लाठियां बरसाने की जगह अपनी नीतियों और अक्षमताओं की गहन समीक्षा करनी चाहिए. पहले NEET का पेपर लीक हुआ, फिर परीक्षा रद्द की गई और अब Re-NEET में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की खबरें सामने आ रही हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले कहा गया था कि प्रधानमंत्री खुद इस मामले की निगरानी करेंगे, तो इसके बावजूद यह सब क्यों?
प्रियंका गांधी ने पूछा कि बार-बार इतने पेपर लीक आखिर कैसे हो रहे हैं. उन्होंने मांग की कि संसद में इस विषय पर विस्तृत चर्चा हो और प्रधानमंत्री खुद देश के करोड़ों युवाओं के सामने आकर जवाब दें. सदन में जब विपक्ष के सदस्यों ने "शर्म करो, शर्म करो" के नारे लगाना शुरू किया, तो चेयरमैन सी पी राधाकृष्णन ने कार्यवाही को पहले दोपहर 12 बजे तक के लिए टाल दिया.
कार्यवाही को दूसरी बार दोपहर 12.30 बजे तक, तीसरी बार 12.50 बजे तक और फिर चौथी बार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा. दोपहर के सत्र में विपक्षी सदस्य प्रदर्शनकारी छात्रों के पक्ष में और चंदा चोरी के खिलाफ लगातार नारेबाजी करते रहे. दोपहर 2 बजे जब सदन फिर से शुरू हुआ, तो डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने सदस्यों को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी के फैसले की जानकारी दी.
इसमें सरकारी कानूनी कामों के लिए समय तय किया गया था. उन्होंने विपक्षी सांसदों से शिष्टाचार और सदन का डेकोरम बनाए रखने का बार-बार आग्रह किया. हरिवंश ने कहा, "हाउस चर्चा के लिए है. प्लीज़, हमें बहस करने दें." उन्होंने चिंता जताई कि सुबह से सदन में कोई भी कामकाज नहीं हो सका है. जब सदस्य अपनी सीटों पर वापस नहीं लौटे, तो उन्होंने सदन को 2.30 बजे तक स्थगित कर दिया.
इसके बाद छठी बार कार्यवाही शुरू हुई, तो उन्होंने विपक्षी सदस्यों को शांत करने की आखिरी कोशिश की. सांसदों से अपनी सीटों पर जाने और हाउस को सुचारू रूप से चलने देने का आग्रह किया. जब विपक्ष ने उनकी इस अपील को भी पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, तो हरिवंश ने अंततः राज्यसभा की कार्यवाही को मंगलवार सुबह 11 बजे तक (यानी दिन भर के लिए) स्थगित करने की घोषणा कर दी.