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'31 जिलों के जिलाधिकारी, 9 राज्यों के गृह सचिव को नागरिकता देने का अधिकार', गृह मंत्रालय ने दी जानकारी

गृह मंत्रालय के मुताबिक देशभर में अब तक 31 जिलों के जिलाधिकारियों और 9 राज्यों के गृह सचिव को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया गया है. ये नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए वहां के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता दे सकते हैं.

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गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)
गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो)

हाल ही में गृह मंत्रालय ने गुजरात के मेहसाणा और आणंद में पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए वहां के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का ऐलान किया था. गृह मंत्रालय ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी करते हुए गृह मंत्रालय को अधिकृत किया था. अब गृह मंत्रालय ने ये भी बताया है कि कितने जिलों के जिलाधिकारियों को नागरिकता देने का अधिकार दिया गया है.

गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि देश के 31 जिलों के जिलाधिकारियों को पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए वहां के अल्पसंख्यकों यानी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई को भारत की नागरिकता देने का अधिकार दिया गया है. 31 जिलों के जिलाधिकारियों के साथ ही नौ राज्यों के गृह सचिव को भी ये अधिकार दिया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक गृह मंत्रालय ने कहा है कि 31 जिलों के जिलाधिकारी और नौ राज्यों के गृह सचिव को भारत की नागरिकता देने का ये अधिकार नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत दिया गया है. इस निर्णय के बाद जिलाधिकारी और गृह सचिव पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को भारत की नागरिकता देने में सक्षम हो गए हैं.

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गृह मंत्रालय की ओर से जारी वार्षिक रिपोर्ट में ये भी जानकारी दी गई है कि 1 अप्रैल 2021 से 31 दिसंबर 2021 तक कुल 1414 विदेशी नागरिकों को भारत की नागरिकता दी गई. इनमें पड़ोसी देश पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए वहां के अल्पसंख्यक भी शामिल हैं. गृह मंत्रालय की ओर से ये भी साफ किया गया है कि सभी को नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत नागरिकता दी गई है.

गृह मंत्रालय की ओर से जारी इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि देश के 13 और जिलों के जिलाधिकारियों, दो राज्य के गृह सचिव को पड़ोसी देशों से आए वहां के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया गया है. इसके साथ ही देश में 29 जिलों के जिलाधिकारियों को भारत की नागरिकता देने का अधिकार दिया जा चुका है. गृह मंत्रालय ने हाल ही में गुजरात के मेहसाणा और आणंद के जिलाधिकारियों को भी भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया था जिसे मिलाकर ये आंकड़ा 31 पहुंच जाता है.

इन राज्यों के गृह सचिव दे सकते हैं भारतीय नागरिकता

केंद्र सरकार ने नौ राज्यों के गृह सचिवों को भी नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम नागरिकों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दिया है. इनमें गुजरात के साथ ही राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और दिल्ली शामिल हैं. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर निर्णय का अधिकार दिए जाने से नागरिकता दिए जाने की गति ने तेजी पकड़ी है.  

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CAA के तहत नहीं दी जा रही नागरिकता

पड़ोसी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए वहां के अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने के लिए 2019 में  नागरिकता संशोधन अधिनियम संसद से पारित कराया था. संसद से पारित इस विधेयक के विरोध में देशभर में आंदोलन हुए थे. इस विधेयक के नियम अभी तक नहीं बनाए जा सके हैं जिसकी वजह से इस कानून के तहत अब तक किसी को भी नागरिकता नहीं दी जा सकी है.

 

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