मथुरा में फरसा वाले बाबा की गौ तस्करों ने गाड़ी से कुचल कर हत्या कर दी, एक को गिरफ्तार किया है... ये जानकारी शनिवार सुबह ईद के दिन करीब 10 बजे आई और साथ में पता लगा कि जमकर पथराव हुआ है, जिसमे कई पुलिसकर्मियों को चोट लगी है. ईद का दिन, गौ रक्षक की हत्या, पथराव साफ हो गया था कि दिन बेहद लंबा होने वाला था.
खबर की जानकारी मिलते ही सबसे पहले मैंने मथुरा के अपने तमाम पुलिस सोर्स को फोन कर शुरू किया, लेकिन पहली बार मे फोन नही उठा, इसकी वजह से मन में आशंका और उठी कुछ हालात कहीं ज्यादा खराब तो नहीं हो रहे.
मैंने तुरन्त बिना समय गवाएं मौके की तरफ जाना उचित समझा और हंगामे के स्पॉट की तरफ निकल पड़ा. रास्ते में मैंने फरसा वाले बाबा के सम्बंध में जानकारी जुटानी शुरू कर दी. मैं कुछ ही दूर गया था तभी मथुरा पुलिस का फोन आ गया. वो फोन पर काफी रिलैक्स नजर आए.
उन्होंने कहा कि हंगामा था, लेकिन अब सब शांत है. हमारे पुलिस कर्मी घायल हैं. लोगों को समझा दिया गया कि ये कोई हत्या नहीं, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना है.
पुलिस अधिकारी ने बताया कि अफवाह के बाद लोग बेकाबू हुए थे और बाहरी लोगों ने पत्थरबाजी की.
अब खबर बदल चुकी थी, जिसे हत्या बताया गया था वो एक्सीडेंट था और हंगामे की वजह अफवाह और हंगामा करने वाले बाहरी थे.
दोपहर करीब डेढ़ बजे मैं छाता पुलिस चौकी पहुंचा जो दिल्ली-आगरा हाई वे पर है. वहां निगम के लोग सड़क पर फैले पत्थर और लोगों के बिखरे चप्पल समेट रहे थे.
मौके पर पहुंचा उसके पहले घटना को लेकर यूपी पुलिस की तरफ से एक आधिकारिक बयान सामने आ गया था.
मथुरा पुलिस- थाना कोसी क्षेत्र में कल रात्रि लगभग 03:00-04:00 बजे के मध्य चंद्रशेखर उर्फ फरसा बाबा द्वारा एक वाहन को संदेह के आधार पर रोका गया था. इसी दौरान घने कोहरे के कारण पीछे से आ रहे एक ट्रक की टक्कर लगने से उनकी दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु हो गई.
जिस कंटेनर को बाबा ने रोका था, उसमें किराने का सामान पाया गया तथा पीछे से आए ट्रक में तार लदे हुए थे.
ये एक सड़क दुर्घटना है- गोवंश तस्करी से इसका कोई संबंध नहीं है. कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न करने वालों के विरुद्ध आवश्यक बल प्रयोग कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है. अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.
इस बयान के सामने आने के बाद साफ था कि ईद की दिन कुछ लोगों ने जानबूझकर कर अफवाह फैला कर माहौल खराब करना चाहते थे. उस इलाके में फरसा वाले बाबा की लोकप्रियता अब समझ आ गई थी. हालांकि, मौके पर सफाई कर्मी और पुलिस वालों के अतिरिक्त कोई भी नहीं था, लेकिन पुलिस चौकी में मौजूद पुलिसकर्मियों को देखकर आसानी से समझ आ रहा था कि क्या कुछ इस चौकी ने आज देखा है.
पुलिस चौकी का बोर्ड बेताहाशा पत्थरबाजी से टूट चुका था और गिर गया था.
हालांकि, दुर्घटना पुलिस चौकी से करीब 17 किलोमीटर दूर दिल्ली की तरफ हुआ था. लिहाजा हम तुरन्त एक्सीडेंट वाली जगह के लिए निकल पड़े. वहां हमे सड़क के किनारे खड़ी बाबा की बाइक नजर आई. आगे नंबर प्लेट टूटा था, पीछे का सादा था. वहां कोई भी नहीं था. हां दस कदम आगे बढ़ने पर सड़क पर एक्सीडेंट के निशान साफ नजर आ रहे थे और करीब 50 मीटर दूर सड़क के किनारे एक एक्सीडेंटल ट्रक खड़ा था. आगे से पूरी तरह डैमेज था ट्रक. अगले हिस्से को देखकर ही समझ आ चुका था ड्राइवर की क्या हालत हुई होगी. खून के धब्बे साफ नजर आ रहे थे.
और थोड़ी देर में जानकारी भी आ गई कि ड्राइवर की अस्पताल में मौत हो चुकी है. पुलिस ने पहले ही साफ कर दिया था कि गौवंश नहीं मिला है. जिस ट्रक को फरसा वाले बाबा ने रोका था, उसमें परचून का सामान था. नंबर नागालैंड का था और जिसने टक्कर मारी थी, उसमें तार था और वो राजस्थान का था.
अधिकारियों से बात करने पर पता लगा कि शुक्रवार और शनिवार की रात मौसम में बदलाव की वजह से काफी धुंध थी और शायद एक्सीडेंट की वजह में धुंध भी एक वजह थी.
एक्सीडेंट स्पॉट से फरसा वाले बाबा का आश्रम करीब 15 से 20 किलोमीटर था. जिसे कवर करने में 40 मिनट का वक़्त लगा.
वहां पहुंचा तो हालत काबू में नजर आया, लेकिन लोग पुलिस के बयान से सहमत नहीं नजर आ रहे थे. आश्रम के बीच आंगन में चिता जल रही थी और आसपास उनके सहयोगी खड़े थे. हम जनकारी थी कि बाबा रात में अकेले नहीं थे, हमने फिर हरिओम की तलाश की, क्योंकि वो बाइक पर फरसा वाले बाबा के साथ थे.
हरिओम इसे एक्सीडेंट नहीं मान रहा उसका कहना है कि इसके पीछे साजिश है. हरिओम का कहना है ट्रक ने अचानक से आकर टक्कर मारी, आश्रम में मौजूद ज्यादातर लोग यही कह रहै थे. आश्रम केसामने की तरह एक बड़ी चारदीवारी में बड़ी संख्या में गाय मौजूद थी जिनजी देखभाल फरसा वाले बाबा लोगों के सहयोग से करते थे.
आश्रम में लोगों का आना जाना लगातार लगा हुआ था, इसलिए पुलिस ने वहां की सुरक्षा बढ़ा रखी थी. अधिकारी भी लगातार नजर बना कर रखे थे.
चंद्रशेखर को फरसा वाला बाबा के सालों से कहते हैं. उनके आश्रम में मौजूद लोगों ने बताया कि वो फरसा लेकर चलते थे और गौ सेवा गौ रक्षा में काम था.
आश्रम पहुंचे मथुरा के डीएम चंद्र प्रकाश ने बताया कि हरियाणा बॉर्डर के पास चंद्रशेखर फरसे वाले बाबा जी का एक्सीडेंट हुआ, जिसमें उनकी मृत्यु हो गई. जिस ट्रक से दुर्घटना हुई थी. उस ट्रक का ड्राइवर भी मौत हो गई है. बाबा जी का इस क्षेत्र में गौ सेवा के लिए काफी बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया था. वह गए और गोवंश के प्रति श्रद्धा रखते थे. उनकी असामयिक मृत्यु से लोगों में दुख की लहर है. उसके लिए हम भी दुखी है. आज थोड़ा कानून-व्यवस्था बाधित हुई थी, जिसमें प्रशासन ने जनमानस के साथ बातचीत की. लोगों ने मांग रखी की बाबा की गाय की सेवा करते थे तो उनकी गौशाला का क्या होगा तो सरकार का दायित्व है कि गोवंश की वह रक्षा करेंगे. बाबा जी को शहीद का दर्जा देने के मांग की थी, स्मारक बनाने की मांग थी. गौरक्षकों को पात्रता दी जाय तो पात्र को नियम के तहत लाइसेंस दिया जाएगा. राजस्थान की तरह यहां पर टास्क फोर्स बनाने की बात की गई थी तो यहां पर भी बनाने की बात की गई है. हम लोगों से निवेदन करना चाहते हैं की अफवाह मना रहे हैं जैसा कि बाबा जी की हत्या की अफवाह फैलाई गई. आपको बता दें कि बाबा जी की मृत्यु दुर्घटना में हुई है, अगर कोई और बात होगी तो उसकी भी जांच की जाएगी. जिस ट्रक की बाबा ने जांच की थी, उसमें परचून का सामान मिला, जिससे एक्सीडेंट हुआ. वह राजस्थान का था और उसमें तार भरा हुआ था.
साथ में उन्होंने ये भी कहा कि शांति व्यवस्था से किसी को खिलवाड़ नहीं करने देंगे. आज सुबह काफी कोहरा था, ये हादसा है. आगे का कंटेनर उन्होंने रुकवाया था और पीछे से ट्रक आया है, हम जांच करेंगे.