
अमेरिका के कैलिफोर्निया में गैंगस्टर भानु राणा की हत्या को लेकर बड़ा दावा सामने आया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा गया है कि इस मर्डर के पीछे लॉरेंस बिश्नोई गैंग का हाथ है. पोस्ट में दावा किया गया है कि 'सरपंच यूरोप', साहिल दुहान (हिसार) और बिश्नोई गैंग ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिलवाया. एजेंसियां इस फेसबुक पोस्ट में किए गए दावे की सत्यता की जांच कर रही हैं.
पोस्ट में यह भी लिखा गया कि एक साल पहले ही चेतावनी दी गई थी कि भानु राणा को मार दिया जाएगा. इसमें यह भी कहा गया है कि जो भी देश के खिलाफ जाएगा, उसे दुनिया के किसी भी कोने में छिपने पर भी छोड़ा नहीं जाएगा. साथ ही पोस्ट में 'गोल्डी ढिल्लों' को लेकर भी दावा किया गया है कि अब उसका बिश्नोई गैंग से कोई संबंध नहीं है और वह ड्रग्स के कारोबार में शामिल हो गया है.
Sarpanch Boss नाम के फेसबुक हैंडल से ये पोस्ट किया गया है, जिसमें लॉरेंस बिश्नोई की डीपी लगी है. सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा गया है, 'ये जो देशद्रोही भानु राणा का अमेरिका के कैलिफोर्निया में मर्डर हुआ है. यह मैंने सरपंच यूरोप, साहिल दुहान (हिसार) और लॉरेंस बिश्नोई ग्रुप ने करवाया है. आज से ठीक एक साल पहले हमने पोस्ट डालकर लिखा था कि हम इसे मरवा देंगे. लॉरेंस बिश्नोई भाई ने साफ कहा था कि जो देश के खिलाफ जाएगा, वह मारा जाएगा, चाहे वह कहीं भी छुप जाए.'

Sarpanch Boss नाम के फेसबुक यूजर ने लिखा है कि 'जो ये देशद्रोही और रेपिस्ट रोहित गोदारा आतंकवादियों को देश की मुखबरी कर रहा है, इसको भी जैसे भानु राणा को मारकर धरती के 10 फीट नीचे दफना दिया, वैसे ही दफना देंगे. लाश भी बरामद नहीं होगी. जो भी देश के दुश्मनों का साथ देगा, तैयार रहना मौत कभी भी आ सकती है.'
इस पोस्ट में आगे लिखा है कि, 'और यह गोल्डी ढिल्लों है, अब इसका लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि यह अब ड्रग्स का काम करता है और देश की मुखबिरी करने लगा है. सभी बचके रहें.'
बता दें कि भानु राणा लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कुख्यात गैंगस्टर (Bhanu Rana) है, जो मूल रूप से हरियाणा के करनाल का रहने वाला है. उसे नवंबर 2025 में अमेरिका में पकड़ा गया था. वर्तमान में भारतीय एजेंसियां उसे भारत प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं. उस पर हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में हत्या, जबरन वसूली (extortion) और आर्म्स एक्ट के कई मामले दर्ज हैं. पंजाब में हुए एक ग्रेनेड हमले की जांच में उसका नाम सामने आया था. जून 2025 में करनाल में पकड़े गए उसके गुर्गों ने स्वीकार किया था कि वे राणा के निर्देशों पर काम कर रहे थे.