ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आते ही शिया कम्युनिटी में आक्रोश देखने को मिला. उत्तर प्रदेश से लेकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख तक शोक, गुस्सा और विरोध दिखा. कहीं लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया तो कहीं मस्जिदों और इमामबाड़ों में दुआ और फातिहा का दौर चला.
उत्तर प्रदेश के संभल जिले के सिरसी कस्बे में खामेनेई की मौत की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और जुलूस निकाला. स्थानीय लोगों का कहना था कि यह सिर्फ एक देश के नेता की मौत नहीं, बल्कि पूरी उम्मत के लिए एक बड़ा नुकसान है.
वहीं लखनऊ में भी शिया समुदाय के लोगों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया. तीन दिन के शोक का ऐलान किया गया और सड़कों पर मार्च निकाला गया. इमामबाड़ों में काले परचम लगाए गए और लोगों ने एकजुट होकर खामेनेई के लिए दुआएं कीं. समुदाय के नेताओं ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की, लेकिन भावनाओं का उफान साफ देखा गया.

बाराबंकी में समुदाय के लोगों ने जताया दुख
बाराबंकी जिले के किंतूर कस्बे में शोक का माहौल कुछ अलग तरह का था. यहां ईरान के पहले सुप्रीम लीडर रूहोल्लाह खुमैनी के वंशज रहते हैं. उन्होंने खामेनेई के निधन पर गहरा दुख जताया और इसे पूरी दुनिया के शिया समुदाय के लिए बड़ी क्षति बताया.
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स्थानीय लोगों ने दुआ-फातिहा का आयोजन किया और शांति व भाईचारे की अपील की. उनका कहना था कि बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच संयम और संवाद ही एकमात्र रास्ता है.
देश के उत्तरी हिस्सों, खासकर श्रीनगर, बांदीपोरा, कुलगाम, अनंतनाग और गांदरबल जैसे इलाकों में भी हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. बांदीपोरा जिले के नाउगाम और सोनावारी में सुबह-सुबह ही बड़े पैमाने पर रैलियां निकाली गईं. लोगों ने खामेनेई की मौत पर शोक जताते हुए विरोध मार्च किया. श्रीनगर के लाल चौक समेत कई जगहों पर भी प्रदर्शन हुए, जहां लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नाराजगी जाहिर की.

पुलवामा और कुलगाम में भी की गई दुआ
दक्षिण कश्मीर के पुलवामा और कुलगाम में भी लोगों ने इकट्ठा होकर खामेनेई के लिए दुआ की. पुलवामा के गंगू इलाके से लेकर मेन चौक तक लोगों ने मार्च निकाला और दुआ की गई. यहां लोग शांति से इकट्ठा होकर नेता को याद करते नजर आए.
लद्दाख के कारगिल और जम्मू-कश्मीर के रामबन जैसे इलाकों में भी शिया समुदाय ने विरोध मार्च निकाले. इन जगहों पर लोगों ने काले बैनर और झंडों के साथ जुलूस निकाला और खामेनेई की मौत पर गहरा दुख जताया.
दिल्ली में स्थित ईरान कल्चर हाउस के बाहर भी हलचल देखी गई. हालांकि वहां कोई बड़ा प्रदर्शन नहीं हुआ, लेकिन लोगों की आवाजाही और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी. हालात को लेकर प्रशासन सतर्क है.
चाहे संभल की सड़कों पर प्रदर्शन हो या कश्मीर की वादियों में निकली रैलियां, हर जगह लोगों ने अपनी भावनाएं जाहिर कीं, साथ ही यह उम्मीद भी जताई कि दुनिया एक और बड़े संघर्ष से बच सके.