कर्नाटक के राजस्व मंत्री कृष्णा गौड़ा ने सोमवार को विधानसभा में BJP विधायक प्रभु चव्हाण के सवाल का जवाब देते हुए राज्य में जमीन की गंभीर कमी की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार के पास अब स्कूलों, खेल के मैदानों और यहां तक कि श्मशान घाटों के लिए भी सरकारी भूमि शेष नहीं बची है. उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों में सरकार को सिर्फ शवदाह और कब्रिस्तान (दफन स्थलों) के लिए 58 करोड़ रुपये खर्च कर जमीन खरीदनी पड़ी है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों समेत विभिन्न समुदाय पर्याप्त कब्रिस्तान न मिलने के कारण सरकार से नाराज हैं.
कृष्णा बायरे गौड़ा ने सोमवार को विधानसभा में बोलते हुए कहा, 'पिछले 10 सालों में सभी सरकारों ने ये सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि सभी गांवों में उनकी जरूरतों के अनुसार कब्रिस्तान हों. यहां तक कि उच्च न्यायालय ने भी इस मामले को आगे बढ़ाया है. फिर भी, हम कुछ स्थानों पर जगह उपलब्ध कराने में असमर्थ रहे हैं.'
उन्होंने कहा कि किसानों और अन्य विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपलब्ध सभी भूमि उपलब्ध कराने के बाद, सरकार के पास अब कब्रिस्तान के लिए कोई भूमि नहीं बची है.
'3 सालों में खरीदी 58 करोड़ की जमीन'
उन्होंने आगे कहा, 'पिछले तीन वर्षों में सरकार को कब्रिस्तानों के लिए 58 करोड़ रुपये की लागत से जमीन खरीदनी पड़ी है. विभिन्न उद्देश्यों के लिए जमीन देने के कारण अब हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां हमें अंतिम संस्कार के लिए भी जमीन खरीदनी पड़ रही है.'
मंत्री ने आगे कहा कि विभिन्न उद्देश्यों के लिए जमीनें दान में देने के बाद, प्रशासन को जमीन की भीख मांगने के लिए 'भीख का कटोरा' लेकर घूमना पड़ रहा है.
'नाराज है अल्पसंख्यक समुदाय'
राजस्व मंत्री ने कहा कि हिंदू समुदाय में कुछ लोग शवों को जलाते हैं और कुछ दफनाते हैं, लेकिन बेंगलुरु के आसपास के क्षेत्रों में जगह की कमी के कारण अब दफनाने वाले लोग भी दाह संस्कार करने लगे हैं. हालांकि, मुस्लिम और ईसाई समुदायों में केवल दफनाने की परंपरा है, जिसके लिए जमीन देना अनिवार्य है.
उन्होंने बताया कि जमीन न होने की बात कोई समझने को तैयार नहीं है और अल्पसंख्यक समुदाय पर्याप्त जगह न मिलने पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं.
'जमीन देने को तैयार नहीं हैं लोग'
सदन में हस्तक्षेप करते हुए विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा कि सरकार आज उस स्थिति में पहुंच गई है, जहां उसे जमीन के लिए भीख मांगनी पड़ रही है. उन्होंने कहा कि लोग स्कूलों और अस्पतालों के लिए एक एकड़ जमीन भी देने को तैयार नहीं हैं, कब्रिस्तान की तो बात ही छोड़िए.
उन्होंने ये भी बताया कि जब वो बीजेपी सरकार में राजस्व मंत्री थे, तब उन्होंने जिला उपायुक्तों को जमीन आवंटित करने से पहले स्कूलों, आंगनवाड़ियों और कब्रिस्तानों के लिए जगह आरक्षित करने को कहा था.
अशोक ने सुझाव दिया कि भविष्य की पीढ़ी और अगले 25-30 सालों को ध्यान में रखते हुए आंगनवाड़ी, स्कूलों और श्मशान घाटों के लिए जमीन पहले ही आरक्षित की जानी चाहिए.
'बुनियादी सुविधाएं मुहैया करना जरूरी'
इन चुनौतियों के बावजूद मंत्री कृष्णा गौड़ा ने आश्वासन दिया कि राजस्व विभाग स्कूलों, पार्कों और खेल के मैदानों जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जगह आरक्षित करने की दिशा में काम करेगा.
उन्होंने जोर दिया कि गांवों में युवाओं के लिए बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना बेहद जरूरी है. सरकार अब उन क्षेत्रों की पहचान कर रही है, जहां प्राथमिकता के आधार पर जमीन खरीदकर कब्रिस्तान और अन्य सार्वजनिक जरूरतों को पूरा किया जा सके.