जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) प्रशासन ने सोमवार देर रात साबरमती हॉस्टल के बाहर हुई विवादित और भड़काऊ नारेबाजी की घटना पर संज्ञान लेते हुए बयान जारी किया है. प्रशासन ने इस घटना की जांच के लिए दिल्ली पुलिस से सहयोग मांगा है और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.
दरअसल, 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुए हमले की छठी बरसी के मौके पर कुछ छात्रों ने प्रोटेस्ट आयोजित किया गया था. इसी दौरान साबरमती हॉस्टल के बाहर देर रात को कुछ छात्रों पर पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ विवादित नारे लगाने का आरोप है. जिसका एक कथित वीडियो भी वायरल हो रहा है. वायरल हुए 35 सेकंड के वीडियो में 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी जेएनयू की धरती पर' जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं.
JNU प्रशासन ने जारी किया बयान
जेएनयू प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शुरुआत में यह जमावड़ा केवल 5 जनवरी की बरसी मनाने तक सीमित था, लेकिन उमर खालिद और शारजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर आए न्यायिक फैसले के बाद कार्यक्रम का लहजा अचानक बदल गया.
सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ छात्रों ने जानबूझकर भड़काऊ और विवादित नारेबाजी शुरू कर दी. प्रशासन ने इसे माननीय सुप्रीम कोर्ट की सीधी अवमानना माना है. प्रशासन का कहना है कि ये कोई अचानक हुई प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर किया गया काम है.
30-35 छात्रों की पहचान
बयान में बताया गया कि सभा में लगभग 30-35 छात्र मौजूद थे, जिनमें प्रमुख नाम आदिति मिश्रा, गोपिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली, साद आजमी, मेहबूब इलाही, कनिष्क, पाकीजा खान, शुभम और अन्य शामिल थे. ऐसे नारे लोकतांत्रिक असहमति से पूरी तरह असंगत हैं, जेएनयू आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं और विश्वविद्यालय तथा राष्ट्र की शांति, सद्भावना एवं सुरक्षा को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं. ये संवैधानिक संस्थाओं और नागरिक संवाद की स्थापित मानदंडों के प्रति जानबूझकर किया गया अपमान दिखाता है. सभी हितधारकों को असहमति, अपशब्द और घृणा फैलाने वाले भाषण के बीच स्पष्ट अंतर समझना चाहिए.
JNU प्रशासन ने पुलिस की दी शिकायत
जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने दिल्ली पुलिस के एसएचओ वसंत कुंज को शिकायत पत्र भेजा है, जिसमें घटना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.
पत्र में उल्लेख है कि सुरक्षा विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद थे और स्थिति की निगरानी कर रहे थे. नारे स्पष्ट रूप से सुनाई दे रहे थे और उन्हें जानबूझकर और दोहराया गया जो अनजाने अभिव्यक्ति की बजाय सुनियोजित कदाचार दिखाते हैं.
JNU ने टाला सवाल
इस पूरे विवाद पर आज तक/इंडिया टुडे से बात करते हुए जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि ये कोई विरोध प्रदर्शन नहीं था.
उन्होंने कहा कि वे केवल 5 जनवरी की हिंसक रात और एबीवीपी के कथित हमले को याद करने के लिए जमा हुए थे. हमने अदालत के फैसले पर दुख व्यक्त किया और हमने उस पर चर्चा की. हम ऐसी हिंसा को बढ़ावा देने वाली विचारधारा और लोगों की निंदा करते हैं और नारों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए.
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ नारों को आपत्तिजनक मानती हैं तो उन्होंने कहा कि ये नारे जब भी दिए जाते हैं तो उस व्यक्ति के खिलाफ होते हैं, जो पीएम हैं, जो एचएम हैं, जो 2002 में इतनी हत्याओं के लिए जिम्मेदार हैं. उन्हें कौन छू सकता है? लेकिन हमें विश्वास है कि वे जिस फासीवादी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसे इस देश में खत्म होना चाहिए. वहीं, जब दोबारा सवाल किया गया तो उन्होंने कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया.
ABVP का पलटवार
इस बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. एबीवीपी दिल्ली के अध्यक्ष मयंक पांचाल ने आज तक/इंडिया टुडे से बातचीत में कहा, 'हम दिल्ली पुलिस को शिकायत देंगे जो नारे लगा रहे हैं, उनकी मानसिकता को समझिए, ये हिंदुओं से और हिंदू धर्म से नफरत करते हैं.'
हालांकि, दिल्ली पुलिस सूत्रों ने सुबह बताया कि जेएनयू प्रशासन ने अब तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत नहीं दी है. जेएनयू के बाहर पुलिस की मौजूदगी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक रूटीन प्रक्रिया है.
विरोध प्रदर्शन और हेट स्पीच में बारीक अंतर
जेएनयू प्रशासन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि विरोध प्रदर्शन और नफरत भरे भाषण (Hate Speech) के बीच एक बहुत बारीक लकीर होती है. जेएनयू कोड ऑफ कंडक्ट के तहत इस तरह की नारेबाजी पूरी तरह प्रतिबंधित है, क्योंकि ये शैक्षणिक माहौल को बिगाड़ सकती है. सुरक्षा विभाग ने वसंत कुंज के एसएचओ से आग्रह किया है कि वे इस मामले की गहन जांच करें. प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे परिसर में शांति बनाए रखें और ऐसी किसी भी गतिविधि से दूर रहें, जिससे भविष्य में उन पर कानूनी आंच आए.