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परदेस में ईद मनाने को मजबूर हिंदुस्तानी...टिकट महंगा, जॉब खोने का खतरा और बेबसी का आलम

अमेरिका और ईरान युद्ध के चलते खाड़ी देश में रह रहे भारतीय मुस्लिम जंग के साये में ईद मनाने के लिए मजबूर है. इस बार घर और परिवार के साथ ईद मनाने के अरमानों पर पानी फिर गया है, युद्ध के चलते फ्लाइट कैंसिल हो रही है तो एयर टिकट महंगा है और नौकरी खोने का भी खतरा भी सता रहा है, जिसके चलते परदेस में ही ईद मनाने को बेबस हैं.

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गल्फ में नमाज पढ़ते मुस्लिम समुदाय (File-Photo-AFP)
गल्फ में नमाज पढ़ते मुस्लिम समुदाय (File-Photo-AFP)

दुनिया भर में मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार ईद-उल-फितर है. दुनिया और देश के किसी भी जगह पर रह रहा मुसलमान चाहता है कि ईद अपने परिवार के साथ अपने घर पर मनाए. इसके लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग परदेस से ईद मनाने के लिए घर आते हैं. खाड़ी देशों में ईद की पांच से सात दिन की छुट्टी होती है. इसके चलते मुस्लिम समुदाय के लोग ईद मानने के लिए भारत आते थे, लेकिन इस बार उन्हें जंग के साय में उन्हें परदेस में ही ईद मनानी पड़ रही है. 

सऊदी अरब, दुबई, कतर सहित तमाम खाड़ी देशों में ईद के लिए पांच दिनों की छुट्टी हो गई है. हिंदुस्तान में शुक्रवार या फिर शनिवार को ईद मनाई जाएगी. अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की चल रहे युद्ध ने खाड़ी देश में नौकरी करने वाले भारतीय मुस्लिमों की अपने घर-परिवार के साथ ईद मनाने की ख्वाहिश पूरी नहीं हो पा रही है. ऐसे में भारत में रहने वाले उनके परिजनों की ईद न सिर्फ फीकी होगी बल्कि उन्हें खाड़ी देशों में फंसे अपनों की फिक्र भी सता रही है.

अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान जारी जंग के चलते खाड़ी देशों से भारत आने वाली तमाम हवाई उड़ानें रद्द हो गई हैं और जो फ्लाइटें चल रही हैं उनका किराया करीब 10 से 12 गुना तक महंगा हो गया है. इसकी वजह से बड़ी संख्या में भारतीय ईद के त्योहार पर भी अपने घर नहीं आ पा रहे, इसके चलते उनकी ईद फीकी रहने वाली है. 

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फ्लाइट रद्द होने से परेशान त्यागी परिवार के साथ नहीं मना पा रहे ईद
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के रहने वाले अकरम त्यागी सउदी (बदला हुआ नाम) अरब के रियाद में नौकरी करते हैं. त्यागी ने परिवार के संग मुजफ्फरनगर में ईद मनाना की प्लानिंग काफी पहले से बना रखी थी. इसके लिए उन्होंने रियाद से दिल्ली के लिए 2 महीने पहले इंडिगो फ्लाइट का टिकट बुक करा रखा था, लेकिन युद्ध छिड़ जाने की वजह से उनकी फ्लाइट दो बार कैंसिल हो चुकी है. इस कारण त्यागी मुजफ्फरनगर में परिवार के साथ ईद मनाने की ख्वाहिश छोड़ दी है, अब मजबूरी में सउदी अरब में ही ईद मनाने का फैसला किया है. 

अकरम त्यागी कहते हैं कि हर साल ईद परिवार के साथ मनाने के लिए मुजफ्फरनगर जाते थे, इस बार भी घर पर ईद मनाने की तैयारी पहले से ही कर रखी थी. इसके लिए पहले ही टिकट भी बुक कर लिया था, लेकिन युद्ध के चलते उनकी फ्लाइट कैंसिल हो गई है. घर-परिवार के साथ त्योहार नहीं मना पाने का दुख बहुत है, लेकिन कर भी क्या सकते हैं? परिवार से दूर या उनके बिना ईद मनाने का कोई मतलब नहीं है. अम्मी और अब्बू को फोन करके बोल दिया है कि ईद मनाने घर नहीं आ पाउंगा. ये दर्द अकरम त्यागी का ही नहीं बल्कि कई परिवार हैं, जो जंग के साय में ईद मनाएंगे. 

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सैय्यद अली पहली बार परिवार के बिना परदेस में मनाएंगे ईद
उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले सैय्यद अली (बदला हुआ नाम) पिछले 6 सालों से दुबई में नौकरी करते हैं. हर साल परिवार के साथ साथ ईद मानने के लिए मनाने के लिए दुबई से बिजनौर आते थे, लेकिन इस बार नहीं आ पा रहे हैं. सैय्यद अली ने बताया कि जिंदगी में पहली बार है जब वो अपने परिवार के बिना ईद मनाएंगे, उस दर्द को बयां नहीं कर पा रहे हैं. परिवार से दूर और उनके बिना ईद मनाने का मतलब नहीं रह जाता है. त्योहार हंसी-खुशी और अपनों के साथ मनाने और उनसे गले मिलने का होता है, दुबई में ये सब नहीं हो सकता है.

सैयद अली की तरह राजस्थान का फारूकी परिवार भी है.पुराने जयपुर शहर में ईदगाह के पीछे बदनपुरा इलाके में रहने वाले वसीम फारूकी और रमीज फारूकी के पिता रशीद और छोटे भाई नदीम दुबई में नौकरी करते हैं. दोनों भाई हर साल ईद से करीब दस दिन पहले जयपुर आते थे.इस बार भी टिकट बुक थी लेकिन युद्ध के हालात की वजह से वह कैंसिल हो चुकी है. जो फ्लाइटें उड़ान भर रही हैं उनका किराया करीब 10 गुना बढ़ चुका है. 

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फारूकी परिवार ने इस बार धूमधाम से ईद मनाने का फैसला किया था. परिवार में कुछ खास फंक्शन भी होने थे, लेकिन युद्ध ने सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया. परिवार ने अब सिर्फ सादगी के साथ नमाज पढ़ने का फैसला किया है. फारूकी परिवार ने ओमान के जरिए भारत आने की प्लानिंग की थी, लेकिन वो भी सफल नहीं रही. ऐसे में दुबई में ईद मनाने के लिए मजबूर हैं, 

गल्फ में रहने वाले हिंदुस्तानी मुस्लिमों की बेबसी
लखनऊ के रहने वाले मो. आसिफ लंबे समय से दुबई में नौकरी करते हैं. ईद के लिए दुबई से लखनऊ आने के लिए एक महीने पहले फ्लाइट का टिकट बुक किया था, जिस दिन उनकी फ्लाइट थी, उसी दिन दुबई के एयरपोर्ट को ईरान ने निशाना बनाया, जिसके चलते उनकी फ्लाइट कैंसिल हो गई. दुबई से दूसरी फ्लाइट उन्होंने दस गुना महंगा टिकट लिया, उसके बाद भी वो भी कैंसिल हो गई.

मो. आसिफ कहते हैं कि हर साल साल ईद अपने घर और परिवार के साथ मनाते हैं, जिसके लिए उन्होंने तय कर रखा था कि वो हर हाल में जाएंगे. इसके लिए उन्होंने दुबई से ओमान तक बस से गए और फिर ओमान से फ्लाइट लेकर लखनऊ आए हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें जिस तरह की मशक्कत करनी पड़ी है, उसे बयां नहीं किया जा सकता है. डेढ़ लाख का टिकट लेकर ओमान से लखनऊ आए हैं जबकि आम दिनों में दस से 15 हजार रुपये लगते हैं. 

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दुबई से इंडिया की फ्लाइट दस गुना महंगी 

लखनऊ से 65 किलोमीटर दूर रायबरेली के रहने वाले मो. रियाज आठ साल से दुबई में रहते हैं. हर साल ईद मनाने के लिए पांच दिन पहले आ जाया करते थे, लेकिन इस बार युद्ध के चलते नहीं आ सके. उन्होंने बताया कि इस समय फ्लाइट का टिकट बहुत महंगा है, जो टिकट 10 हजार से 15 हजार के बीच मिल जाया करता था, वो इस समय एक लाख का मिल रहा है. इस तरह से आने जाने का बहुत ज्यादा खर्च आ रहा, उसके बाद भी यह फ्लाइट कैंसिल का डर है. 

रियाज कहते हैं कि किसी तरह से टिकट ले भी लेते हैं तो यह टेंशन है कि अगर ईद मनाने के लिए घर जाते हैं और युद्ध छिड़ गया तो फिर नौकरी को बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा. इसीलिए रायबरेली के बजाय दुबई में ही ईद मनाना बेहतर समझ रहे हैं. 

गाजियाबाद के रहने वाले आदिल कतर के एक सरकारी हॉस्पिटल में जॉब करते हैं, जो ईद मनाने के लिए गाजियाबाद आने की बहुत पहले से ही तैयारी कर रखी थी, लेकिन युद्ध छिड़ जाने के चलते उनकी छुट्टी कैंसिल कर दी गई है. फ्लाइट कैंसिल हो गई है और अब ईद कतर में मनाना पड़ रहा है.  उन्हें लगता है कि अगर वो ईद मनाने गए, उसी बीच युद्ध छिड़ गया तो फिर उनकी नौकरी खतरे में पड़ जाएगी.

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आदिल का कहना है कि मेरे जैसे हजारों लोग हैं, जो इस बार ईद मानने के लिए अपने घर नहीं जा पा रहे हैं और वो खाड़ी देश में ही ईद मनाएंगे. उन्होंने कहा कि किसी के सामने टिकट कैंसिल की समस्या है तो किसे बस में अब फ्लाइट टिकट नहीं है. बड़ी संख्या में लोग नौकरी के चलते नहीं जा रहे हैं. 

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