भारत और वियतनाम दोनों ही देश अपनी-अपनी सीमाओं पर चीन से मिलने वाली चुनौती का सामना कर रहे हैं. चीन एक ऐसा महत्वपूर्ण फैक्टर है जिसने दोनों देशों को और अधिक नजदीक ला दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुक के बीच सोमवार को वर्चुअल शिखर वार्ता हुई. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम को एक महत्वपूर्ण सामरिक साझीदार (Strategic Partner) बताया.
देखें- आजतक LIVE
पीएम मोदी ने वियतनाम के प्रधानमंत्री से कहा ''पिछले महीने हम आसियान-इंडिया वर्चुअल कार्यक्रम में मिले थे. मुझे खुशी है कि आपसे आज बात करने का अवसर मिला है. वियतनाम भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' का महत्वपूर्ण स्तम्भ है और हमारे इंडो-पेसिफिक रीजन का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है, हमारी कम्प्रेहेंसिव साझेदारी का दायरा बहुत विस्तृत है, दोनों देशों के बीच आपसी सम्पर्क बढ़ रहे हैं, नए क्षेत्रों में भी फैल रहे हैं. हम वियतनाम के साथ अपने संबंधों को लॉन्ग टर्म और सामरिक दृष्टि से देखते हैं.''
''आज विश्व की चुनौतियों से निपटने के लिए हम अपने मूल्यों को साझा कर सकते हैं. अगले वर्ष दोनों ही देश संयुक्त राष्ट्र संघ की सिक्योरिटी काउंसिल के सदस्य होंगे. इसलिए वैश्विक मंच पर हमारी साझेदारी का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा.''
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, ''ये खुशी की बात है कि आज दोनों देश एक जॉइंट विजन डॉक्यूमेंट रिलीज कर रहे हैं. इसके साथ-साथ दोनों देशों के बीच की साझेदारी का 2021 से 2023 के लिए एक्शन-प्लान जारी कर रहे हैं. हमारे लोग और समृद्धि पूरी दुनिया को हमारे रिश्ते के बारे में एक मजबूत सन्देश देगी.
''हमारी बातचीत के अलावा 7 महत्वपूर्ण एग्रीमेंट भी आज दोनों देशों के बीच साइन हुए हैं. इनमें अलग-अलग क्षेत्रों के विषय शामिल हैं जैसे रक्षा, वैज्ञानिक शोध, न्यूक्लियर पॉवर, पेट्रो-केमिकल, सतत उर्जा और कैंसर का इलाज . हम सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्र में भी काम करने की कोशिश कर रहे हैं. ये सब दिखाता है कि दोनों देशों के बीच सहयोग की कितनी संभावनाएं हैं.''