हरियाणा के हिसार में स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म आरएचएच 2101 (RHH 2101) डेवलेप की है. यह नई किस्म हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू और उत्तरी राजस्थान के सिंचित क्षेत्रों में वक्त पर बुवाई के लिए तैयार की गई है. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने बताया कि अखिल भारतीय समन्वित सरसों और राई अनुसंधान प्रोजेक्ट के तहत तीन साल के गहन परीक्षण के बाद इसे गजट अधिसूचित किया गया है.
सरसों की यह हाइब्रिड किस्म 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक औसत पैदावार दे सकती है. मध्यम आकार के दानों वाली यह किस्म सिर्फ 142 दिनों में पककर तैयार हो जाती है.
सरसों की इस किस्म में तेल की मात्रा करीब 40 फीसदी पाई गई है, जो किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी.

पुरानी और प्राइवेट किस्मों को छोड़ा पीछे
कुलपति प्रो. काम्बोज के मुताबिक, आरएचएच 2101 की उपज क्षमता अन्य लोकप्रिय किस्मों के मुकाबले काफी ज्यादा है. यह पुरानी किस्म आरएच 749 की तुलना में 14.5 फीसदी और डीएमएच-1 से 11 फीसदी ज्यादा पैदावार देती है. इतना ही नहीं, यह प्राइवेट कंपनी के हाइब्रिड 45546 के मुकाबले भी आठ फीसदी ज्यादा प्रोडक्शन देने में सक्षम है. ज्यादा उपज और उच्च तेल मात्रा की वजह से यह किसानों के बीच तेजी से पॉपुलर होगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा.
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'तेल की मात्रा भी भरपूर...'
अनुसंधान निदेशक डॉ. राजबीर गर्ग ने इस किस्म के बारे में बात करते हुए बताया कि आरएचएच 2101 में शाखाओं की संख्या ज्यादा होती है. इसकी हर फली में दानों की तादाद भी ज्यादा होती है, जो इसकी ज्यादा उपज की अहम वजह है. 142 दिन की छोटी अवधि में पकने और 40 फीसदी तक तेल अंश होने की वजह से यह मार्केट में तिलहन उत्पादन को नई गति देगी. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किस्म सिंचित क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है.
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वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि...
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय का तिलहन अनुभाग देश के अग्रणी अनुसंधान केंद्रों में शुमार है, जिसे पिछले 12 साल में चार बार सर्वश्रेष्ठ केंद्र का अवार्ड मिल चुका है. हाइब्रिड किस्म के प्रजनक डॉ. राम अवतार ने बताया कि उनकी टीम ने पिछले 6 साल में अलग-अलग परिस्थितियों के लिए पांच किस्में विकसित की हैं. इनमें आरएच 725, आरएच 1424 और आरएच 1975 जैसी किस्में पहले से ही किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हैं और अन्य राज्यों में भी इनके बीजों की भारी मांग रहती है.
यह विश्वविद्यालय अब तक सरसों और राई की 25 एडवांस किस्में और एक हाइब्रिड किस्म किसानों तक पहुंचा चुका है. वैज्ञानिकों का यकीन है कि नई हाइब्रिड किस्म 'आरएचएच 2101' न सिर्फ तिलहन उत्पादन में बढ़ोतरी करेगी, बल्कि नेशनल लेवल पर कृषि विकास में भी अहम योगदान देगी. तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के टार्गेट को ध्यान में रखते हुए इस रिसर्च को काफी अहम माना जा रहा है.